परंपरा नहीं, अपराध है बाल विवाह. अक्षय तृतीया पर प्रशासन की सख्त चेतावनी.
“अक्षय तृतीया पर बाल विवाह करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा—प्रशासन पूरी तरह सतर्क”
BOL PANIPAT , 17 अप्रैल–अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर बाल विवाह जैसी कुप्रथा को रोकने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क और प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर उपायुक्त डॉ वीरेंद्र कुमार दहिया ने भी बाल विवाह के दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कम उम्र में विवाह और गर्भधारण से किशोरियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरे उत्पन्न होते हैं। इससे मातृ एवं शिशु मृत्यु दर बढ़ने की संभावना रहती है तथा कुपोषण, एनीमिया और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं भी बढ़ती हैं। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य को प्राथमिकता दें तथा बाल विवाह जैसी प्रथा से दूर रहें।
प्रोटेक्शन एवं बाल विवाह निषेध अधिकारी रजनी गुप्ता ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि इस दिन किसी भी प्रकार का बाल विवाह न केवल सामाजिक अपराध है, बल्कि कानून के तहत दंडनीय अपराध भी है, जिस पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
रजनी गुप्ता ने अपने वक्तव्य में कहा कि “बचपन किसी भी बच्चे का अधिकार है, इसे किसी भी कीमत पर छीना नहीं जा सकता।” उन्होंने बताया कि बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की लड़की एवं 21 वर्ष से कम आयु के लड़के का विवाह पूर्णतः अवैध है। ऐसे मामलों में अभिभावकों, विवाह कराने वालों और सहयोग करने वाले सभी व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि विभाग द्वारा पिछले वर्ष में 16 बाल विवाह रुकवाए गए तथा 11 मामलों में पुलिस कार्रवाई करवाई गई, जो प्रशासन की सख्ती और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया जैसे अवसरों पर परंपराओं के नाम पर बच्चों का भविष्य दांव पर लगाना अत्यंत चिंताजनक है। बाल विवाह से बच्चों की शिक्षा बाधित होती है, स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ता है और उनका समग्र विकास प्रभावित होता है।
रजनी गुप्ता ने समाज के सभी वर्गों—पंचायत प्रतिनिधियों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, धार्मिक गुरुओं एवं जागरूक नागरिकों—से अपील की कि वे बाल विवाह के खिलाफ एकजुट होकर खड़े हों और ऐसी किसी भी सूचना को तुरंत प्रशासन तक पहुंचाएं।
उन्होंने यह भी बताया कि अक्षय तृतीया के दिन विशेष निगरानी टीमें सक्रिय रहेंगी और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी, ताकि किसी भी बाल विवाह को समय रहते रोका जा सके।
“यह केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि समाज की जिम्मेदारी है। आइए, इस अक्षय तृतीया पर हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि किसी भी बच्चे का बचपन नहीं छिनने देंगे।”

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