अंग्रेजी, गणित और विज्ञान के साथ कानूनी शिक्षा भी जरूरी: अधिवक्ता निखिल चुघ
BOL PANIPAT । वर्तमान समय में बच्चों और युवाओं का जीवन केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रह गया है। इंटरनेट, सोशल मीडिया, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन खरीदारी और विभिन्न सरकारी सेवाओं के बढ़ते उपयोग ने उन्हें ऐसे अनेक कानूनी पहलुओं से जोड़ दिया है जिनकी जानकारी अक्सर उन्हें नहीं होती। बदलते सामाजिक और तकनीकी परिवेश में कानूनी साक्षरता अब केवल वकीलों या कानून के विद्यार्थियों तक सीमित विषय नहीं रही, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक के लिए आवश्यक जीवन कौशल के रूप में उभर रही है।
अधिवक्ता, लेखक एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य निखिल चुघ ने कहा कि जिस प्रकार विद्यार्थियों को अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की शिक्षा दी जाती है, उसी प्रकार कानून की बुनियादी जानकारी भी शिक्षा का हिस्सा होनी चाहिए। उनका कहना है कि आज का विद्यार्थी तकनीकी रूप से तो पहले से अधिक सक्षम है, लेकिन अपने अधिकारों और कानूनी जिम्मेदारियों के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं रखता।
निखिल चुघ ने कहा कि साइबर ठगी, सोशल मीडिया से जुड़े विवाद, ऑनलाइन गेमिंग, डिजिटल भुगतान और उपभोक्ता अधिकार जैसे विषय सीधे युवाओं के जीवन से जुड़े हुए हैं। ऐसे में कानून की सामान्य समझ उन्हें गलतियों से बचाने और सही निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
निखिल चुघ ने कहा कि जीवन के किसी न किसी चरण में लगभग हर व्यक्ति का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कानूनी व्यवस्था से सामना होता है, चाहे वह पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का मामला हो, उपभोक्ता विवाद हो, साइबर अपराध का शिकार होना हो, रोजगार से जुड़े अधिकार हों या फिर किसी सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा बनना हो। ऐसे में कानून की बुनियादी जानकारी नागरिकों को अपने अधिकारों की रक्षा करने और कानूनी प्रक्रियाओं को बेहतर ढंग से समझने में सहायता करती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में वे कानूनी साक्षरता को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के मिशन पर कार्य कर रहे हैं। अपनी पुस्तक, जन-जागरूकता अभियानों, लेखों और विभिन्न संवाद कार्यक्रमों के माध्यम से वे लोगों को सरल भाषा में कानून समझाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि कानूनी ज्ञान केवल वकीलों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर नागरिक तक पहुंचना चाहिए।
अधिवक्ता निखिल चुघ ने कहा कि यदि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर पर ही संविधान, नागरिक अधिकारों और कानून की मूलभूत जानकारी दी जाए तो वे अधिक जागरूक, जिम्मेदार और सशक्त नागरिक बन सकते हैं। उन्होंने स्कूलों और कॉलेजों में नियमित कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि विद्यालय स्तर पर एक बुनियादी ‘कानूनी साक्षरता’ विषय या मॉड्यूल प्रारंभ किया जा सकता है, जिसमें संविधान, मौलिक अधिकार एवं कर्तव्य, साइबर सुरक्षा, उपभोक्ता अधिकार, महिला एवं बाल संरक्षण कानून तथा नागरिक जिम्मेदारियों जैसे विषयों को सरल भाषा में पढ़ाया जाए। इससे विद्यार्थियों को केवल परीक्षा संबंधी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन से जुड़े व्यावहारिक कानूनी ज्ञान भी प्राप्त होगा।
निखिल चुघ ने कहा कि वे आने वाले समय में स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से कानूनी जागरूकता कार्यक्रमों को और व्यापक बनाने का प्रयास करेंगे। उनका उद्देश्य कानून को आम नागरिक की भाषा में समझाना तथा ऐसी पीढ़ी तैयार करना है जो अपने अधिकारों के प्रति सजग होने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों और संवैधानिक मूल्यों के प्रति भी समान रूप से प्रतिबद्ध हो।

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