Friday, August 14, 2026
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स्वतंत्रता दिवस केवल उत्सव नहीं, अपने कानूनी अधिकारों को जानने का भी अवसर : अधिवक्ता निखिल चुघ

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at August 14, 2026 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT । स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लेखक, अधिवक्ता निखिल चुघ, सदस्य सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन, ने नागरिकों से अपने कानूनी एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता केवल एक राष्ट्रीय पर्व मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि एक जागरूक नागरिक के रूप में अपने अधिकारों को समझना और उनका उचित उपयोग करना भी स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

अधिवक्ता निखिल चुघ ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को कम-से-कम अपने मौलिक अधिकारों, गिरफ्तारी एवं पुलिस कार्रवाई से जुड़े अधिकारों, FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया, जमानत के मूल सिद्धांतों और कानूनी सहायता के अधिकार की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून की जानकारी व्यक्ति को केवल अपने अधिकारों की रक्षा करने में ही सक्षम नहीं बनाती, बल्कि उसे अपने कर्तव्यों के प्रति भी अधिक जिम्मेदार बनाती है।

उन्होंने कहा, “जिस नागरिक को अपने अधिकारों की जानकारी है, वह न केवल अन्याय के खिलाफ बेहतर तरीके से आवाज उठा सकता है, बल्कि कानून और व्यवस्था के प्रति अधिक जिम्मेदार भूमिका भी निभाता है। कानूनी जागरूकता एक मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद है।”

निखिल चुघ ने विशेष रूप से युवाओं से संविधान और कानून की बुनियादी समझ विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने वाली अधूरी या गलत कानूनी जानकारी के बजाय नागरिकों को विश्वसनीय कानूनी स्रोतों और योग्य कानूनी विशेषज्ञों से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को पुलिस, प्रशासन या किसी अन्य प्राधिकरण के समक्ष अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी के बिना घबराने की आवश्यकता नहीं है। कानून नागरिकों को अधिकार देता है और साथ ही कानून का पालन करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी भी है।

स्वतंत्रता दिवस पर नागरिकों को संदेश देते हुए अधिवक्ता निखिल चुघ ने कहा, “आजादी की सबसे मजबूत पहचान एक जागरूक नागरिक है। अपने अधिकार जानिए, अपने कर्तव्य निभाइए और कानून का सम्मान कीजिए।”

उन्होंने स्वतंत्रता दिवस पर सभी नागरिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि कानूनी रूप से जागरूक समाज ही न्यायपूर्ण, जिम्मेदार और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।

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