Wednesday, August 19, 2026
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पीढिय़ों को इतिहास से सीख लेने का संदेश भी देती हैं विभाजन विभीषिका प्रदर्शनी: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at August 19, 2026 Tags: , , , , ,

विभाजन की विभीषिका को याद कर भावुक हुए जिला वासी, पांच दिन में हजारों लोगों ने देखी प्रदर्शनी

प्रदर्शनी में विभाजन के समय की घटनाओं को दर्शाने वाले दुर्लभ चित्र

ट्रेनों में अपने घर-बार छोडक़र सुरक्षित स्थानों की ओर जाते शरणार्थियों के दृश्य बने आकर्षण का केंद्र

BOL PANIPAT , 19 अगस्त। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के उपलक्ष्य में सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग, हरियाणा की ओर से  जिला सचिवालय के द्वितीय तल पर लगाई गई प्रदर्शनी में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। आज पांचवें दिन दिनों तक  प्रदर्शनी को हजारों लोगों ने देखा और वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान देशवासियों द्वारा झेले गए विस्थापन, पीड़ा, संघर्ष और अपनों से बिछडऩे के दर्द को तस्वीरों एवं ऐतिहासिक दस्तावेजों के माध्यम से जाना।

    प्रदर्शनी में विभाजन के समय की घटनाओं को दर्शाने वाले दुर्लभ चित्र, समाचार पत्रों की कतरनें, ऐतिहासिक दस्तावेज और विस्थापित लोगों के संघर्ष से जुड़ी सामग्री प्रदर्शित की गई। ट्रेनों में अपने घर-बार छोडक़र सुरक्षित स्थानों की ओर जाते शरणार्थियों के दृश्य, काफिलों की कठिन यात्रा, दंगों की भयावहता तथा उजड़ते आशियानों के चित्र लोगों को भावुक कर रहे थे। प्रदर्शनी में 4 जून 1947 को नई दिल्ली में वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन की ऐतिहासिक पत्रकार वार्ता, मुस्लिम लीग की विभाजन संबंधी गतिविधियों, कलकत्ता और नोआखली में हुए सांप्रदायिक दंगों तथा विभाजन के बाद बड़े पैमाने पर हुए विस्थापन से जुड़े तथ्य भी प्रदर्शित किए गए।  

    सामग्री के माध्यम से बताया गया कि विभाजन के कारण करोड़ो लोग अपनी जड़ों से उखडक़र विस्थापित हुए और लाखों लोगों को असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ी। प्रदर्शनी में लगाए गए भावपूर्ण संदेशों ने लोगों को विशेष रूप से प्रभावित किया। ‘पीछे छूट गई परम्पराएं, विरासत, अधिकार और रिश्तेदारियां’ तथा ‘नई शुरुआत की उम्मीद में आखिरी ट्रेन पकडऩे की जद्दोजहद’ जैसे संदेश विभाजन की त्रासदी को जीवंत कर रहे थे। लोगों ने प्रदर्शनी में प्रदर्शित सामग्री को ध्यानपूर्वक देखा और नई पीढ़ी को इतिहास की इस पीड़ा से परिचित कराने के प्रयास की सराहना की।

    उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि विभाजन विभीषिका के उपलक्ष्य में लगाई गई प्रदर्शनी केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों को इतिहास से सीख लेने का संदेश भी देता है। उपायुक्त ने बताया कि विभाजन के दौरान लाखों परिवारों ने अपना घर, संपत्ति, रिश्ते और अपनों को खोया। उन पीडि़तों की पीड़ा और संघर्ष को कभी भुलाया नहीं जा सकता। ऐसी प्रदर्शनियां युवाओं को इतिहास की वास्तविक घटनाओं से जोडऩे और सामाजिक एकता, भाईचारे तथा सद्भाव की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उपायुक्त ने कहा कि हमें इतिहास की त्रासद घटनाओं से सीख लेकर ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए आपसी विश्वास, शांति और भाईचारे को मजबूत करना चाहिए। देश की एकता और अखंडता सर्वोच्च है तथा समाज में सद्भाव बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।

    डीआईपीआरओ डॉ. सुनील बसताडा ने कहा कि प्रदर्शनी का उद्देश्य विभाजन के दौरान देशवासियों द्वारा सहन की गई पीड़ा, संघर्ष और विस्थापन की कहानी को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि पांच दिनों में करीब 1 हजार लोगों का प्रदर्शनी देखने पहुंचना इस बात का प्रमाण है कि आमजन अपने इतिहास को जानने के प्रति जागरूक और उत्सुक है। प्रदर्शनी में रखी गई ऐतिहासिक सामग्री ने लोगों को उस दौर की परिस्थितियों को करीब से समझने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन की पीड़ा को याद करना किसी के प्रति नफरत पैदा करना नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य में शांति, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करना है।

      गौरतलब है कि प्रदर्शनी में आने वाले लोगों ने सामग्री में गहरी रुचि दिखाई और इसे ज्ञानवर्धक एवं भावनात्मक अनुभव बताया। प्रदर्शनी के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि विभाजन की विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले तथा विस्थापन का दर्द झेलने वाले लाखों भारतवासियों को सदैव याद रखा जाएगा। इतिहास की इन स्मृतियों को संजोकर नई पीढ़ी को देश की एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव का महत्व समझाना ही ऐसे आयोजनों का मूल उद्देश्य है।

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