विद्यार्थियों, मरीजों और आमजन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा मनमानी स्वीकार नहीं: उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ
एनसी मेडिकल कॉलेज में निरीक्षण के दौरान डीसी ने कसी व्यवस्था की नकेल
अनियमितताओं पर मांगी जवाबदेही विद्यार्थियों से फाइन वसूलने का अधिकार क्या है ?
व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं
डीसी ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को परखा, हाजिरी रजिस्टर व उपकरण जांचे, एसओपी के पालन के दिए निर्देश
एनसी मेडिकल कॉलेज में डीसी का निरीक्षण
BOL PANIPAT, 7 सितंबर। इसराना स्थित एनसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने सोमवार को प्रशासनिक अधिकारियों के साथ निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कॉलेज एवं अस्पताल में व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और सामने आई कथित अनियमितताओं पर संज्ञान लेते हुए कॉलेज प्रशासन को आवश्यक निर्देश दिए।
उपायुक्त डॉ हरीश ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों, मरीजों और आमजन से जुड़े मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही अथवा मनमानी स्वीकार नहीं की जाएगी। व्यवस्थाएं निर्धारित नियमों और मानकों के अनुरूप होना जरूरी है। निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों से फाइन वसूलने के मामले पर उपायुक्त ने कॉलेज प्रशासन से स्पष्ट रूप से पूछा कि विद्यार्थियों से किस अधिकार क्षेत्र और किस नियम के तहत फाइन लिया जा रहा है। उन्होंने फाइन वसूलने के आधार, संबंधित अथॉरिटी तथा नियमों की जानकारी मांगी। उपायुक्त ने इस मामले में जांच करने के निर्देश भी दिए, ताकि पूरी स्थिति स्पष्ट हो सके और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
उपायुक्त ने कॉलेज में हाजिरी रजिस्टर भी चेक किए और संस्थान की प्रशासनिक व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान में विद्यार्थियों से संबंधित सभी रिकॉर्ड व्यवस्थित, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप होने चाहिए। इसके बाद उपायुक्त ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों और ओपीडी का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग, नगला ओपीडी, त्वचा विज्ञान ओपीडी तथा महिला वार्ड का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं, साफ-सफाई, बेड की व्यवस्था और चिकित्सा उपकरणों की स्थिति को भी परखा। कई उपकरणों को उन्होंने अपने सामने चेक करवाया।
उपायुक्त ने अस्पताल में बेड की व्यवस्था को लेकर भी आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एसओपी के अनुसार एक बेड से दूसरे बेड के बीच निर्धारित दूरी और आवश्यक गैप का पालन सुनिश्चित किया जाए। अस्पताल में मरीजों की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर उपचार व्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने भवन के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य से भवन का निर्माण किया गया है, उसका उपयोग उसी उद्देश्य के अनुरूप दिखाई देना चाहिए। सरकारी अथवा संस्थागत संसाधनों का निर्धारित उद्देश्य के अनुसार प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि अस्पताल और शिक्षण संस्थान दोनों ही सीधे तौर पर विद्यार्थियों, मरीजों और आमजन से जुड़े होते हैं। इसलिए यहां व्यवस्था, पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो उसकी निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी। व्यवस्थाओं में सुधार के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि निर्धारित मानकों और एसओपी का पूरी तरह पालन हो। विद्यार्थियों और मरीजों के हितों से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस अवसर पर सीएमओ विजय मलिक, पीडब्ल्यूडी विभाग के कार्यकारी अभियंता साबित पन्नू, धर्मवीर गुप्ता, भूषण गुप्ता, दमकल विभाग से गुरमेल सिंह, गोस्वामी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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