आर्य कॉलेज के प्राणीशास्त्र विभाग व इको क्लब द्वारा ‘सतत जलीय कृषि तकनीक’ पर हुआ कार्यशाला का आयोजन
– पद्मश्री सुल्तान सिंह के अनुभवों से विद्यार्थियों ने समझी आधुनिक फिश ब्रीडिंग तकनीक
– प्रदर्शनी, पावरपॉइंट प्रस्तुति, काव्य-पाठ, भाषण एवं वीडियोग्राफी प्रतियोगिताएं रहीं मुख्य आकर्षण
BOL PANIPAT, बुधवार 16 सितंबर 2026, आर्य स्नातकोत्तर महाविद्यालय के इको क्लब एवं प्राणीशास्त्र संगठन 2026-27 के संयुक्त तत्वावधान में ‘विश्व ओज़ोन दिवस’ के उपलक्ष्य में ‘सतत जलीय कृषि तकनीक’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ओज़ोन परत के संरक्षण के साथ-साथ जल संसाधनों के संरक्षण, मछली प्रजनन एवं पर्यावरण-अनुकूल जलीय कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना रहा।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता एवं उपचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम की संयोजिका एवं प्राणीशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्षा डॉ. गीतांजलि साहनी ने पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय फिश ब्रीडर सुल्तान सिंह व उनके सुपुत्र नीरज चौधरी का पुष्पगुच्छ भेंट कर अभिनंदन किया तथा उनके जीवन, कार्यों और उपलब्धियों से विद्यार्थियों को अवगत कराया।
कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों के लिए प्रदर्शनी, पावरपॉइंट प्रस्तुति, काव्य-पाठ, भाषण एवं वीडियोग्राफी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।
विद्यार्थियों ने इन गतिविधियों के माध्यम से मछली प्रजनन, जलीय कृषि, जल संरक्षण तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने विचार एवं रचनात्मकता प्रस्तुत की। कार्यशाला में विभिन्न मछली प्रजातियों के प्रजनन एवं पालन की विधियों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया। इस दौरान कैटफिश, पैनगेसियस, मिस्टस, शिंधाला, ओमपोक मुरल, चितल एवं तिलापिया सहित विभिन्न मछली प्रजातियों के प्रजनन से संबंधित तकनीकी जानकारी विद्यार्थियों को दी गई।
महाविद्यालय प्रबंधन समिति एवं प्राचार्य डॉ. जगदीश गुप्ता ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक संस्था या व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “स्वस्थ आकाश और स्वस्थ जल, दोनों मिलकर ही स्वस्थ पृथ्वी का निर्माण करते हैं।” उन्होंने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने और भावी पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।
महाविद्यालय की उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल एक दिवस तक सीमित रखने के बजाय इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि ओज़ोन परत पृथ्वी को हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, वहीं जल संसाधनों का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों के लिए उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने और जल संरक्षण को अपनी सामाजिक जिम्मेदारी समझने का आह्वान किया।
पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय फिश ब्रीडर सुल्तान सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जलीय कृषि में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करके कम संसाधनों में अधिक एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मछली पालन को केवल व्यवसाय के रूप में देखने के बजाय इसे जल संरक्षण, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को जलीय कृषि के क्षेत्र में उपलब्ध आधुनिक तकनीकों और रोजगार की संभावनाओं से भी अवगत कराया।
अंतरराष्ट्रीय मछली उत्पादक नीरज चौधरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि जलीय कृषि का उद्देश्य केवल मछली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि जल संसाधनों का संरक्षण करते हुए पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव के साथ अधिक उत्पादन प्राप्त करना है। उन्होंने कहा कि सतत जलीय कृषि के लिए आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जल के विवेकपूर्ण उपयोग पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
प्राणीशास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. गीतांजलि साहनी ने अपने संबोधन में कहा कि ओज़ोन परत हमारे आकाश की रक्षा करती है और सतत जलीय कृषि हमारे जल संसाधनों को सुरक्षित रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वायु और जल दोनों के संरक्षण पर समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि आधुनिक तकनीक ‘रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम’ को वर्ष 2014 में स्थापित करने वाले सुल्तान सिंह उत्तरी भारत के शुरुआती किसानों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे अनुभवी विशेषज्ञ का महाविद्यालय में आकर विद्यार्थियों से संवाद करना उनके लिए ज्ञान एवं प्रेरणा का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से वैज्ञानिक सोच विकसित करने और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रतियोगिताओं के निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. गीतांजलि साहनी, डॉ. हरदीप एवं प्रा. प्रेरणा ने निभाई।
यूं रहे परिणाम:
काव्य-पाठ प्रतियोगिता में बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा आकांक्षा ने प्रथम स्थान हासिल किया, जबकि बीजेएमसी तृतीय वर्ष के छात्र पुनीत को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
भाषण प्रतियोगिता में बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा दिव्या ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि बीजेएमसी प्रथम वर्ष की छात्रा कशिश को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
पावरपॉइंट प्रस्तुति प्रतियोगिता में बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा सुप्रिया मलिक ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। तान्या एवं दीपिका ने द्वितीय स्थान, जबकि खुशी ने तृतीय स्थान हासिल किया। निकिता को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
वीडियोग्राफी प्रतियोगिता में बीएससी तृतीय वर्ष की छात्रा खुशबू ने प्रथम स्थान, बविता ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि तन्नू एवं बीजेएमसी प्रथम वर्ष की छात्रा प्रीति को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।
इस अवसर पर महाविद्यालय की उपाचार्या डॉ. अनुराधा सिंह, डॉ. अनिल वर्मा, प्राध्यापिका सुदेश एवं सुषमा तथा सहायक कर्मचारी अंकित एवं शोभनाथ सहित अन्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन विद्यार्थियों एवं उपस्थित सदस्यों द्वारा पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूक रहने के संकल्प के साथ हुआ।

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