पानीपत की जुवेनाईल बोर्ड द्वारा किया गया सुधारात्मक फैसला. बाल न्याय की भावना को मिलेगा बल.
BOL PANIPAT , 4 फरवरी। पानीपत जुवेनाईल कोर्ट द्वारा बाल न्याय की भावना को मजबूत करने वाला एक सुधारात्मक फैसला सुनाया गया है जोकि एक सराहनीय कदम है। जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसीपल मैजिस्ट्रेट पुनित लिम्बा, सदस्य आशिमा कौशिक और अशोक कुमार ने अपने फैसले में दर्शाया कि किशोर अवस्था में की गई गलतियों को आजीवन अपराध के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए बल्कि उन्हें सुधार, शिक्षा और मार्गदर्शन के माध्यम से एक बेहतर नागरिक बनने का अवसर दिया जाना चाहिए। जुवेनाईल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसीपल मैजिस्ट्रेट पुनित लिम्बा ने 2023 के मर्डर केस में जिला के ही अहर गांव के नाबालिक (15 वर्ष) को जीवन सुधार का मौका देते हुए उसे प्रोबेशन बॉंड पर रिफोर्म करने के निर्देश दिए हैं।
इस ऐवज में इसके सामाजिक व्यवहार, चाल-चलन और आचरण पर पूर्ण रूप से नजर रखी जाएगी। यह नाबालिक पहले ही अण्डर गोन एक साल 6 महीने 18 दिन की सजा काट चुका है। इस नाबालिक ने एक महिला और उसके दूसरे साथी की मर्डर करने में सहायता की थी। जिसमें उक्त महिला ने अपने मित्र के साथ मिलकर अपने पति का मर्डर किया था।
जुवेनाईल जस्टिर बोर्ड ने कहा कि कुछ नाबालिक गलत संगत में पडक़र आसामाजिक तत्वों के साथ मिलकर गलत काम करते हैं और इसका खामियाजा उन्हें जेल में जाकर भुगतना पड़ता है जिससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ उसका पूरा जीवन भी बर्बाद होता है। इस प्रकार के सुधारात्मक निर्णय ना केवल सम्बंधित बालक के भविष्य को सुधारते हैं बल्कि समाज में मानवीय दृष्टिïकोण को भी बढ़ावा देते हैं। जुवेनाईल कोर्ट का यह कदम न्यायप्रणाली में संवेदनशीलता, करूणा और सुधार की भावना को सशक्त करता है।

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