Saturday, August 8, 2026
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धागों में बसी विरासत, हुनर को नई उड़ान. पानीपत में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस धूमधाम से मनाया गया.

By LALIT SHARMA , in SOCIAL , at August 8, 2026 Tags: , , , ,

फैशन शो में दिखा बुनकरों का हुनर और नई पीढ़ी का रचनात्मक अंदाज, बुनकर भाइयों को उपहार देकर किया सम्मानित

BOL PANIPAT , 7 अगस्त। हथकरघा की समृद्ध परंपरा, बुनकरों के हुनर और भारतीय वस्त्र संस्कृति को समर्पित 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पानीपत में उत्साह और गरिमापूर्ण माहौल में मनाया गया। समारोह का आयोजन जिमखाना क्लब, सेक्टर-25, पानीपत में किया गया। कार्यक्रम बुनकर सेवा केंद्र, पानीपत, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार एवं I.I.H.T. Alumni Association के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

फैशन शो बना आकर्षण का केंद्र

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर सनातन धर्म कॉलेज, चंडीगढ़ के फैशन डिजाइनिंग विभाग के विद्यार्थियों द्वारा स्वयं तैयार किए गए परिधानों का विशेष फैशन शो आयोजित किया गया। विद्यार्थियों ने अपने रचनात्मक डिजाइन और आकर्षक परिधानों के माध्यम से हथकरघा वस्त्रों की आधुनिक उपयोगिता और संभावनाओं को मंच पर प्रस्तुत किया। फैशन शो समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा।

कार्यक्रम का मंच संचालन वारिस खान ने किया। उन्होंने प्रभावी ढंग से कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए हथकरघा की परंपरा, बुनकरों के योगदान और बदलते दौर में इस क्षेत्र की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

हर साल पद्मश्री सिर्फ़ iiht के विद्यार्थियों को ही सम्मानित किया जाता है।

एक मंच पर जुटे गणमान्य अतिथि

समारोह में मुख्य अतिथि पानीपत नगर निगम की मेयर कोमल सैनी, शिक्षा मंत्री के भाई हरि पाल ढांडा,  I.I.H.T. Alumni Association के प्रधान धर्मवीर सिंह ,पानीपत के विधायक के पुत्र राहुल विज, पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित खेम राज सुंदरीयाल,बुनकर सेवा केंद्र के उपनिदेशक हीरा लाल, विनोद धमीजा, ललित गोयल, देवगिरी एक्सपोर्ट के उद्योगपति अशोक गुप्ता, वाइस चेयरमैन राकेश जैन तथा अनिल देशवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति एवं हथकरघा क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधि मौजूद रहे।

हथकरघा को आधुनिक बाजार से जोड़ने पर जोर

वक्ताओं ने कहा कि हथकरघा केवल कपड़ा बनाने की कला नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत और लाखों परिवारों की आजीविका का आधार है। पारंपरिक बुनाई को आधुनिक तकनीक, फैशन डिजाइनिंग, नए बाजार और डिजिटल माध्यमों से जोड़ने की आवश्यकता है, ताकि बुनकरों को उनके हुनर का उचित मूल्य मिल सके।

प्रधान धर्मबीर सिंह ने लोगों से सप्ताह में एक दिन खादी या हैंडलूम वस्त्र पहनने की अपील करते हुए कहा कि इससे बुनकरों को रोजगार और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण, नए डिजाइन, उत्पादों की गुणवत्ता, विपणन तथा रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक फैशन और पारंपरिक हथकरघा के मेल से इस क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा की जा सकती हैं।

हर साल पर्व के रूप में मनाया जा रहा हथकरघा दिवस

वाइस चेयरमैन राकेश जैन एवं अनिल देशवाल ने कहा कि राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को हर वर्ष एक पर्व के रूप में मनाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि समाज में हथकरघा और बुनकरों के प्रति सम्मान और जागरूकता बढ़े।

उन्होंने बताया कि पहले इस दिन को स्वदेशी दिवस के रूप में मनाया जाता था, लेकिन वर्ष 2015 के बाद इसे राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। इसका उद्देश्य देश के हथकरघा बुनकरों और उनके पारंपरिक कौशल को पहचान एवं सम्मान देना है।

बुनकर भाइयों को उपहार देकर किया सम्मानित

समारोह के दौरान बुनकर भाइयों को उपहार भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके योगदान की सराहना करते हुए कहा गया कि देश की पारंपरिक वस्त्र विरासत को जीवित रखने में बुनकरों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

देवगिरी एक्सपोर्ट के उद्योगपति अशोक गुप्ता के यहां 100 से अधिक I.I.H.T. विद्यार्थियों के कार्यरत होने का भी उल्लेख किया गया। इस दौरान हथकरघा एवं टेक्सटाइल क्षेत्र में युवाओं के लिए उपलब्ध प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों पर चर्चा हुई।

पानीपत की पहचान को आगे बढ़ाने का आह्वान

वक्ताओं ने कहा कि पानीपत देश के प्रमुख टेक्सटाइल केंद्रों में शामिल है। यहां के बुनकरों और कारीगरों के पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक, डिजाइन और बाजार से जोड़कर पानीपत के हथकरघा उद्योग को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई।

समारोह का समापन बुनकर समुदाय के सम्मान और हथकरघा की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।

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