एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय में आयोजित अन्वेषण 2025 में पाया पहला और दूसरा स्थान
–‘जैव विविधता और जैव-रासायनिक युग्मन’ ने हासिल किया प्रथम स्थान
–‘विभाजन की विभीषिका‘ विषय ने पाया द्वितीय स्थान
–कॉलेज की टीम ने उत्तराखंड में आयोजित होने वाली नार्थ जोन की प्रतियोगिता के लिए किया क्वालीफाई
–अन्वेषण देश में शैक्षणिक अनुसंधान, नवीन विचारों और छात्रवृत्ति को बढ़ावा देने हेतु जीवंत मंच प्रदान करता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 13 नवम्बर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की दो टीमों ने कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र में 12 नवम्बर को भारतीय विश्वविधालय संघ द्वारा आयोजित अन्वेषण 2025 में अंतर्विषयक केटेगरी में भाग लेते हुए पहला स्थान हासिल किया और उत्तराखंड में आयोजित होने वाली नार्थ जोन की प्रतियोगिता के लिए क्वालीफाई कर लिया । इसी केटेगरी में ‘विभाजन की विभीषिका’ विषय पर कॉलेज की टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया । विजेता छात्र-छात्राओं और प्राध्यापक समन्वयक डॉ रवि कुमार का कॉलेज प्रांगण में पहुँचने पर प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और अन्य स्टाफ सदस्यों ने भव्य स्वागत किया । कॉलेज के विज्ञान के विद्यार्थियों ने अन्वेषण 2025 के लिए अपना शोध प्रस्ताव ‘जैव विविधता और जैव-रासायनिक युग्मन: वनस्पतियों, एवियन जीवों और गोबर भृंगों के बीच कार्यात्मक अंतःक्रियाएं’ विषय पर प्रस्तुतु किया जिसे जूरी ने खूब सराहा । बीएससी (जीवन विज्ञान) के विद्यार्थी हिमांशु, यशिका, कशिश और अंकित सैनी की टीम ने इस खिताब को हासिल कर कॉलेज का नाम रोशन किया । ‘विभाजन कि विभीषिका’ विषय पर अपना शोध दिव्यांशु और श्वेता ने प्रस्तुत किया जिसे दूसरा स्थान मिला । विदित रहे कि अन्वेषण भारतीय विश्वविद्यालय संघ द्वारा स्थापित एक मंच है जहाँ विश्वविद्यालय और महाविधालय के छात्र अपनी शोध योग्यता और कौशल विकसित कर इसे प्रदर्शित करते हैं। यह संघ अंतर्राष्ट्रीय छात्र समुदाय के लिए भारत भर के एक हज़ार से अधिक विश्वविद्यालयों के छात्रों के साथ सहयोगात्मक परियोजनाओं पर काम करने हेतु इस मंच को उपलब्ध कराता है । प्रथम आने वाली कॉलेज की टीम अब उत्तराखंड में आयोजित होने वाली नार्थ जोन की प्रतियोगिता में भाग लेगी ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि 2007 में शुरू किए गए अन्वेषण शोध को भारत में शैक्षणिक अनुसंधान समुदाय को नवीन विचारों और छात्रवृत्ति को बढ़ावा देने हेतु एक जीवंत मंच प्रदान करने के लिए स्थापित किया गया है । G20 में भारत की अध्यक्षता के उपलक्ष्य में यह संघ सभी देशों के विश्वविद्यालय के छात्रों को सहयोगात्मक परियोजनाएँ विकसित करने और अपने शोध विचारों को अगले स्तर तक ले जाने के लिए आवश्यक संसाधन और सहायता प्राप्त करने के अवसर हेतु अन्वेषण में शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है । सर्वश्रेष्ठ शोध परियोजनाओं को बाद में नकद पुरस्कार, प्रमाण पत्र और स्वर्ण पदक के साथ सम्मानित किया जाता है ।
हिमांशु, यशिका, कशिश और अंकित सैनी की ने ‘जैव विविधता और जैव-रासायनिक युग्मन: वनस्पतियों, एवियन जीवों और गोबर भृंगों के बीच कार्यात्मक अंतःक्रियाएं’ विषय पर बताते हुए कहा कि यह परियोजना यह प्रदर्शित करती है कि कैसे विभिन्न पोषी स्तरों पर जैविक विविधता जैव-भू-रासायनिक स्थिरता के जीवंत इंजन के रूप में कार्य करती है जिससे मौलिक वैज्ञानिक अंतर्दृष्टि और अनुप्रयुक्त संरक्षण लाभ दोनों प्राप्त होते हैं । इसकी एकीकृत प्रकृति इसे पारिस्थितिकी तंत्र-स्तरीय स्थिरता अनुसंधान के लिए एक आदर्श के रूप में स्थापित करती है ।

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