Thursday, April 23, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में चार दिवसीय 9वें रत्नावली युवा सांग महोत्सव का रंगारंग आगाज़.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 18, 2024 Tags: , , , , ,

• डॉ महा सिंह पूनिया निदेशक युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने किया सांग महोत्सव का उदघाटन

• जो युवा अपनी संस्कृति से जुड़ा रहेगा केवल उसी का भविष्य सुरक्षित होगा: डॉ महा सिंह पूनिया

BOL PANIPAT , 18 मार्च :

           एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र द्वारा प्रायोजित चार दिवसीय 9वें रत्नावली युवा सांग महोत्सव का रंगारंग आगाज़ हुआ । युवा सांग महोत्सव का उदघाटन मुख्य अतिथि डॉ महा सिंह पूनिया निदेशक युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र ने किया । श्रवण मित्तल वाईस-चेयरमैन एपीट एसडी इंडिया, वीरेंद्र शर्मा चेयरमैन और सम्पादक सुनील झा अति विशिष्ट उपस्थिति में मौजूद रहे । माननीय मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, उप-प्रधान राजीव गर्ग, कोषाध्यक्ष विशाल गोयल और प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने पौधा रोपित गमलें भेंट करके किया । 18 से 21 मार्च तक चलने वाले इस चार दिवसीय सांग महोत्सव में प्रत्येक दिन एक सांग पेश किया जाएगा । कार्यक्रम की शुरुआत में नीरज और प्रदीप के शिव स्तुति नृत्य से हुई जिसने सभी दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया । तत्पश्चात शीतल ने नृत्य पेश किया । आज बारी आरके एसडी कॉलेज कैथल की रही जिसके कलाकारों ने ‘सत्यवान सावित्री’ सांग का मार्मिक एवं अविस्मर्णीय प्रदर्शन किया । सत्यवान की भूमिका कमल ने, सावित्री की पूर्णिमा ने, यमराज की मिशांत ने, नारद की मनीत सिंह ने और सावित्री की सहेलियों की भूमिका सपना, जन्नत शर्मा, ऋतु और ज्योति सैनी ने अदा की । हारमोनियम अनिल भारती एवं गुरनाम सिंह, ढोलक अजय कुमारा और नगाड़ा संदीप साजिंदों ने बजाया । नृत्य डायरेक्टर शिवम् अशोक सिंह रहे और पूरा सांग डॉ राजीव शर्मा हिंदी विभाग आरकेएसडी कॉलेज कैथल की देख-रेख में तैयार किया गया ।   

    विदित रहे कि करनाल जोन के इस रत्नावली युवा सांग महोत्सव आयोजित करने का जिम्मा इस बार एसडी कॉलेज को मिला है । 70 कालेजो वाले इस जोन से उन चार कालेजो के सांगो को दिखाने के लिए चुना गया है जिन्होनें कुरुक्षेत्र में आयोजित रत्नावली फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ चार स्थानो पर कब्ज़ा किया था । इसमें भाग लेने वाली हर प्रतिभागी टीम को 35 हज़ार रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा । मंच संचालन डॉ (श्रीमती) संगीता गुप्ता ने किया । 

    सांग महोत्सव में आकर्षण का केंद्र दूर-दराज गावों से आये हुए बुजुर्ग और हरियाणवी को जानने-समझने वाले दर्शक थे । चौधरी वीरेंद्र शर्मा इस पुरे आयोजन से गदगद नज़र आये और उन्होनें कहा कि इतनी उच्च कोटि की पेशकश उन्होनें अपने पूरे जीवन में नहीं देखी है । उन्होनें तो यहाँ तक आग्रह किया कि अगली प्रस्तुतियों में कोई कांट-छांट न की जाए । रणधीर सिंह और राम कुमार ने भी प्रस्तुति को हरियाणवी संस्कृति का संरक्षक बताया । सभी दर्शकों ने कहा कि बेशक युवा पीढ़ी पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव में आ रही है परन्तु जीवन में कामयाबी और सच्ची ख़ुशी उन्हें अपने ही लोक साहित्य और संस्कृति से मिलेगी । प्राचार्य ने भी सभी आमजनों से आग्रह किया की वे कॉलेज में पधार कर इन प्रस्तुतियों को देखे और कॉलेज को अनुग्रहित करे ।

    डॉ महा सिंह पूनिया ने कहा कि वे अब तक हरियाणवी सांस्कृतिक की 35 से अधिक विधाओं को न सिर्फ पुनर्जीवित कर चुके है बल्कि इनको दुनिया में एक अलग पहचान दिलाने की कोशिश में भी लगे है । हरियाणवी भाषा, शिल्प, भावों और उदगारों  का अन्य किसी भी भाषा में कोई सानी नहीं है । जितनी सटीकता और असर हरियाणवी भाषा में है उतनी तो हिंदी और अंग्रेजी में भी नहीं है । उन्होनें कहा कि एसडी कॉलेज ने इस सांग महोत्सव को आयोजित करके हरियाणवी कला और रंगमंच को जीवित करने का जो कार्य किया है वह बहुत ही सराहनीय है । यह आयोजन प्रदेश की लुप्त होती कला को पुनर्जीवित करने का कार्य करेगा । हरियाणवी भाषा तो अब फिल्मो और साहित्य जगत की भाषा बनती जा रही है । जो युवा अपनी संस्कृति से जुड़ा रहेगा उसी का भविष्य सुरक्षित होगा । लड़कियों ने सांग में भाग लेकर शिक्षा के आधुनिकीकरण पर मोहर लगाई है ।  

    दिनेश गोयल ने कहा कि सांग महोत्सव से छात्र-छात्राओं को हरियाणवी संस्कृति, लोक काव्य और कला के बारे में बहुत कुछ सिखने को मिलेगा । हरियाणा में एक नए समाज का निर्माण तभी हो पायेगा जब हम इस प्रकार के आयोजन करेंगे और इन से सीख भी लेंगे । नैतिकता, भाईचारे और प्रेम युक्त समाज की स्थापना भी तभी हो पाएगी ।

    प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि रत्नावली युवा सांग महोत्सव कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र के युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम है जिसका मकसद हरियाणवी संस्कृति को बढ़ावा देना और नए एवं उभरते युवा कलाकारों को मौका देना है । उन्होनें कहा कि हरियाणा की संस्कृति और धरोहरों के प्रचार-प्रसार के लिए युवा एवं सांस्कृतिक विभाग निरंतर प्रयासरत है । प्रदेश के हर जिले की संस्कृति और बोलचाल को पूरे प्रदेश में सम्मान दिलाना भी इसका एक उद्देश्य है । प्राचार्य ने कहा कि हरियाणा की संस्कृति काफी प्राचीन है और विलुप्तता के कगार पर जाने के बाद भी आज यह पुन: एक नई पहचान के साथ खुद को स्थापित कर रही है ।  युवाओं को भी प्रदेश की संस्कृति के प्रति ज्यादा से ज्यादा जागरूक होना ही पड़ेगा क्योंकि यदि हमने अपनी धरोहरें ही खो दी तो जीवन में हम कुछ भी नया नहीं प्राप्त कर पायेंगे ।

    प्रथम प्रस्तुति आरकेएसडी कॉलेज कैथल के कलाकारों ने सांग ‘सत्यवान सावित्री’ पेश कर दी । पांडव जब वनवास के दौरान ऋषि मारकंडेय से मिलते हैं तो युधिष्ठर ऋषि जी से सवाल करते हैं कि जितने दुखी हम और हमारी पत्नी द्रोपदी है संसार में इतना दुखी कोई और नहीं रहा होगा । इस पर ऋषि जी उन्हें बताते हैं कि जितने दुख सत्यवान सावित्री ने उठाए हैं उतने दुख किसी और ने नही उठाए है । पतिव्रता सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण बचा लिए थे । इसलिए पतिव्रता स्त्री का सदैव सम्मान करना चाहिए । ‘सत्यवान सावित्री’ संगे में दिखाया गया कि सावित्री भगवान ब्रह्मा की शक्ति से राजा अश्वपति के घर पर जन्मी  थी। पुत्री के बड़ी होने पर राजा देश-विदेश घूम लिया लेकिन उसे सावित्री के बराबर का वर नही मिला । इस पर सावित्री खुद अपने वर की तलाश में निकल पड़ती है । सावित्री वन में गौतम ऋषि के आश्रम में पहुंच जाती है जहां पर एक राजा दयुमतसेन अपनी रानी के साथ रह रहा था । युद्ध में राजा और उसकी रानी अंधे हो गए थे और उनका बेटा सत्यवान जंगल से लकड़ी काटकर गुजारा करता था । सावित्री लकड़ी काट रहे सत्यवान को देखती है और उसे मन ही मन उसे अपना पति मान लेती है । सावित्री अपने पिता के पास राजमहल में आती है और सत्यवान के साथ शादी का प्रस्ताव रखती है । राजा के साथ बैठे नारद जी ने सावित्री को बताया कि सत्यवान की उम्र केवल एक वर्ष की बची है और शीघ्र उसकी मृत्यु हो जाएगी । परन्तु सावित्री नहीं मानती और राजा अश्वपति ने अपनी बेटी सावित्री का सत्यवान के साथ विवाह कर दिया । सावित्री भी अपने पति, सास व ससुर की तरह से ऋषियों की तरह से जीवन बीताने लगी । जब पति सत्यवान की आयु के एक साल में से मात्र चार दिन रह गए तो सावित्री ने खाना और पीना बंद कर दिया । उसने अखंड उपवास शुरू कर दिया । जब नारद के बताए हुए दिन पूरे हो गए तो सत्यवान उस दिन लकड़ी काटने के लिए वन में जाने लगा । उस दिन सावित्री भी उसके साथ चल देती है । यमराज सत्यवान के प्राण लेने पहुंचे तो सावित्री अपने पति के शव को अपनी गोद में रखकर बैठ गई और चारों तरह से अपने सत से अग्नि जला ली । जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर चलने लगे तो सावित्री भी उनके पीछे- पीछे चल पड़ी । यमराज ने काफी प्रार्थना की लेकिन सावित्री नहीं मानी । जब यमराज हार गया तो उसने सावित्री से सत्यवान के प्राणों को छोड़कर कोई एक वचन मांगने को कहा । सावित्री ने यमराज से पुत्र मांगा । जब यह आशीर्वाद देकर यमराज सत्यवान के प्राण लेकर चलने लगे तो सावित्री ने कहा कि वह पतिव्रता नारी है और बगैर पति के उसे कैसे पुत्र होगा ? इस पर यमराज हार गए और बोले कि यदि वह अपनी उम्र में से आधी उम्र अपने पति को दे देगी तो उसके पति को जीवित कर सकते हैं । इस प्रकार से सावित्री अपनी उम्र में से आधी उम्र अपने पति सत्यवान को दे देती है । इस प्रकार पतिव्रता सावित्री यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राणों की रक्षा करती है ।

    मंगलवार को एसडी गर्लस कॉलेज जींद की टीम अपना सांग प्रस्तुत करेगी । इस अवसर पर डॉ नवीन गोयल, डॉ राहुल जैन, डॉ संगीता गुप्ता, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ सुरेन्द्र कुमार वर्मा, डॉ रवि कुमार, डॉ दीपिका अरोड़ा, प्रो मयंक अरोड़ा, प्रो बलजिंदर सिंह, प्रो जगमती, प्रो किरण मलिक, प्रो मीतु सैनी, प्रो कविता रानी, दीपक मित्तल समेत लगभग सभी स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे ।  

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