जिले में”विकसित कृषि संकल्प अभियान” को मिल रहा किसानों का भरपूर समर्थन
-89 गावों में किसानों को इस अभियान के साथ जुड़कर ले चुके लाभ
-अभियान में 9877 किसानो ने ली कृषि सबंधित आधुनिक जानकारी
-कृषि विज्ञानं केंद्र, आईसीएआर इफको, मछली पालन, पशुपालन, बागवानी के वैज्ञानिक कर रहे किसानों को जागरूक
BOL PANIPAT ,7 जून। भारत सरकार और आईसीएआर की संयुक्त पहल से संचालित अत्यंत महत्वकांक्षी व राष्ट्रीय स्तर का विशाल जागरूकता अभियान “विकसित कृषि संकल्प अभियान” जो जिले में 29 मई को शुरू हुआ था व कृषि विज्ञानं केंद्र, उझा व अन्य कई विभागों के सहयोग से सफतापूर्वक अपनी मंजिल की ओर अग्रसर है।
कृषि विज्ञान केंद्र उझा के संयोजक डॉक्टर सतपाल ने बताया कि इस अभियान के मध्यम से अभी तक जिले के 89 गावों के किसानों को जागरूक किया जा चुका है।
इस अभियान में किसान बढ़ चढ़ कर भाग ले रहे है व् विभिन्न गावों के 9877 किसान कृषि सबंधित नवीनतम जानकारी ले चुके हैं।
इस कर्यक्रम में कृषि विज्ञानं केंद्र, आईसीएआर (दिल्ली) की विभिन्न प्रकोष्ट, कृषि विभाग, इफको, मछली पालन, पशुपालन, बागवानी सहित अन्य विभागों के ब्लॉक तथा जिला स्तर के वैज्ञानिक व् विशेषज्ञ शामिल हो रहे है व् अपने विभाग से सम्बंधित सरकारी योजनाओं व् वैज्ञानिक विधि से कृषि के तरीके किसानों तक पंहुचा रहे है।
कैथ गांव में हुए इस जागरूकता अभियान में राष्ट्रीय डेरी अनुसन्धान संस्थान, करनाल के निदेशक डॉ धीर सिंह ने शिरकत की व् किसानों को पशुओं में होने वाली प्रमुख समस्याओं जैसे पशुओं में गर्भ धारण में समस्या के निदान, संतुलित आहार, खनिज मिश्रण खिलाने के फायदे के बारे में बताया। उन्होंने युवा किसानों से वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन करने के बारे में जागरूक किया व् एनडीआरआई करनाल में होने वाले विभिन्न ट्रेनिंग कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित व् आंमत्रित किया।
इस अभियान में वैज्ञानिकों ने किसानों को कृषि में उपयुक्त होने वाली विभिन्न नवीनतम उपकरणों जैसे ड्रोन तकनीक व् आर्टिफिशिल इंटेलीजेन्स युक्त विभिन्न मोबाइल फ़ोन ऍप्लिकेशन्स के बारे में विस्तार से बताया गया।
उन्होंने किसानों को
एआई डीईवाई किसान साथी और केवीके ऐप जैसे नवीनतम कृषि ऐप्स के ज्ञान से भी समृद्ध किया।
वैज्ञानिकों ने ड्रोन दीदी”के बारे में भी चर्चा की व् बताया की ड्रोन तकनीक का उपयोग फसलों की निगरानी करने, उर्वरकों का छिड़काव करने और यहां तक कि बीमारियों का शीघ्र पता लगाने के लिए किया जाता है जिस से समय की बचत होती है और शारीरिक श्रम कम होता है।
ड्रोन के साथ-साथ विषेशज्ञों ने मिट्टी की गुणवत्ता का विश्लेषण करने, मिट्टी और पानी के नमूने लेने की तकनीक, मौसम का पूर्वानुमान करने के फायदे, सही तरीके से धान की नर्सरी तैयार करने की विधि जिस से पौधों में अच्छी वृद्धि हो सके, धान में उर्वरकों और रसायनों का उपयोग आदि के बारे में बताया। वैज्ञानिकों ने भू जल के स्तर को बचने के लिए धान की सीधी बिजाई व् सरकार द्वारा दी जारी अनुदान राशि के बारे में किसानों को विस्तार से बताया।
कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने “मेरी फसल मेरा ब्योरा”, “मेरा पानी मेरी विरासत” आदि के पंजीकरण के महत्व के बारे में बताया।
बागवानी, प्राकृतिक खेती, मत्स्य पालन और पशुपालन पर विभिन्न सब्सिडी और योजनाओं पर भी चर्चा की गई।
केवीके के वैज्ञानिकों ने फसल विविधीकरण और वैकल्पिक फसलों के रूप में सब्जियों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक पशु आहार पद्धतियों, कृमि मुक्ति, खनिज मिश्रण आदि के महत्व के बारे में भी बताया।
अभियान के दौरान किसानों से प्राप्त उनके द्वारा किये गए नवाचारों व उनके द्वारा सामना की जा रही कृषि सम्बंधित विभिन्न संशयों को भी प्रतिदिन भारत सरकार को सीधी पहुंचाई जा रही है जिससे उच्चतम स्तर पर आवश्यक व शीघ्र कार्यवाही हो सके।
कार्यक्रम में किसानों को जागरूकता कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेने और सरकारी योजनाओं के बारे में जागरूक होने के लिए प्रोत्साहित किया गया ।
कार्यक्रम में किसानो ने भारत सरकार और आईसीएआर द्वारा की गई पहल से संतुष्ट होते भविष्य में भी ऐसी गतिविधियां जारी रखने का सुझाव दिया।

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