पर्यावरण बचाने के लिए फर्ज निभाएं. खेतों में पराली न जलाएं: डीसी
BOL PANIPAT , 8 अक्टूबर। डीसी डाक्टर वीरेंद्र कुमार दहिया ने जिला के किसानों से आह्वान किया कि हम संकल्प लें कि पर्यावरण बचाने के लिए अपना फर्ज निभाएंगे और खेतों में पराली नहीं जलाएंगे। उन्होंने कहा कि हम खुद को और नई पीढ़ी को सुरक्षित व स्वस्थ जीवन दें।
डीसी डॉक्टर वीरेन्द्र कुमार दहिया ने कहा कि वायु प्रदूषण से सांस, फेफड़ों से सम्बंधित बीमारियां तो होती ही है, सामान्य स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जीवन प्रत्याशा में कमी व असमय मृत्यु भी हो सकती है। उन्होंने बताया कि खेतों में आग लगाने से हवा में प्रदूषण के छोटे-छोटे कणों से पी.एम. 2.5 का स्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। इससे सिरदर्द एवं सांस लेने में तकलीफ होती है, अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियां भी हो रही हैं।
डीसी ने बताया कि पराली को जलाने से वायु प्रदूषण पर प्रभाव पड़ता है, मिट्टी की जैविक गुणवत्ता प्रभावित होती है, मिट्टी में मौजूद कई उपयोगी बैक्टीरिया व कीट नष्ट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इसके उपाय के लिए राष्ट्रीय कृषि नीति का पालन करें, पराली को जलाने के बजाए इससे जैविक खाद बनायें, इसका उपयोग बायोमास एनर्जी, छप्पर बनाने तथा मशरूम की खेती आदि करने में करें। बेल्स बनाकर उद्योगों और पैलेट / ब्रिकेट्स बनाने वाली कंपनियों को बेचें।
पराली जलाने पर सख्त जुर्माना और प्रतिबंध
डीसी डाक्टर वीरेंद्र कुमार दहिया ने बताया पराली जलाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। उल्लंघन करने वालों पर जेल व जुर्माना अथवा दोनों हो सकते है। डीसी ने सभी से आह्वान किया कि हर किसान की जिम्मेदारी है, कोई भी किसान खेतों में पराली न जलाए, इसके लिए दूसरे किसानों को भी जागरूक करें।

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