Wednesday, August 5, 2026
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पराली जलाने वालों पर अब ड्रोन की पैनी नजर, प्रदूषण फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई: उपायुक्त डॉ हरीश कुमार वशिष्ठ

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at August 5, 2026 Tags: , , , , ,

फसल अवशेष जलाने की हर घटना होगी रिकॉर्ड, प्रशासन करेगा तुरंत कानूनी कार्रवाई

स्वच्छ हवा की दिशा में बड़ा कदम, ड्रोन निगरानी से रुकेगा पराली जलाने का सिलसिला

शाम से रात तक आसमान से होगी निगरानी, पराली जलाने वालों की नहीं बचेगी कोई गतिविधि

ड्रोन की निगरानी में रहेगा जिला, पराली जलाने वालों पर होगी तत्काल कार्रवाई

BOL PANIPAT , 5 अगस्त। जिले में वायु प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अब फसल अवशेष (पराली) जलाने वालों पर ड्रोन के माध्यम से कड़ी निगरानी रखी जाएगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के तहत जिले में सितंबर माह में पराली जलाने की घटनाओं पर तकनीक आधारित निगरानी शुरू होगी। ड्रोन शाम 3 बजे से रात 9 बजे तक संवेदनशील क्षेत्रों में उड़ान भरेंगे और आग लगने की प्रत्येक घटना की फोटो, वीडियो, जीपीएस लोकेशन तथा अन्य साक्ष्य संबंधित विभागों को उपलब्ध कराएंगे, ताकि दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने कहा कि जिला प्रशासन वायु गुणवत्ता सुधारने और पर्यावरण संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे फसल अवशेष जलाने से बचें और सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे वैकल्पिक कृषि यंत्रों एवं प्रबंधन तकनीकों का अधिक से अधिक उपयोग करें। उन्होंने कहा कि ड्रोन निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य किसानों को दंडित करना नहीं, बल्कि प्रदूषण रोकना और आने वाली पीढिय़ों को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर पराली जलाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासन किसानों के सहयोग से प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ पानीपत बनाने के लिए पूरी गंभीरता से कार्य करेगा।

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के उप निदेशक डॉक्टर बलवंत सहारण ने बताया कि ड्रोन संचालन और निगरानी के लिए विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों तथा ड्रोन पायलटों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। ड्रोन के माध्यम से खेतों में होने वाली गतिविधियों की वास्तविक समय में निगरानी होगी, जिससे उपग्रह निगरानी से बचने के प्रयास भी विफल होंगे।

कृषि विभाग के सहायक अभियंता सुधीर ने बताया कि प्रदेश में धान की कटाई के बाद सितंबर से नवंबर तक पराली जलाने की घटनाओं के कारण वायु प्रदूषण गंभीर रूप ले लेता है। इसके अलावा वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों की धूल तथा अन्य कारण भी प्रदूषण बढ़ाते हैं। ऐसे में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। जिला प्रशासन भी किसानों को जागरूक करने के साथ-साथ फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपाय अपनाने के लिए लगातार प्रेरित करेगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण और जनस्वास्थ्य दोनों सुरक्षित रह सकें।

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