Wednesday, June 3, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में रोजगार मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यशाला का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at May 20, 2022 Tags: , , , ,

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया की नार्थ इंडिया रीजनल कौंसिल पानीपत के अधिकारियों ने किया वाणिज्य के छात्रों का मार्गदर्शन
– सीए का कोर्स हमें न सिर्फ आत्मनिर्भर, बल्कि रोजगार देने वाला भी बनाता है: जयदीप धनखड़, सी.ए.

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज में वाणिज्य संकाय के बीकॉम, बीबीए एवं एमकॉम के विद्यार्थियों के लिए एक दिवसीय रोजगार मार्गदर्शन एवं परामर्श कार्यशाला का शानदार आयोजन किया गया जिसमे लगभग 400 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया और सीए पाठ्यक्रम में प्रवेश लेनें से लेकर इसके रोजगारपरक महत्व को जाना.

कार्यशाला में बतौर विशिष्ट मेहमान नार्थ इंडिया रीजनल कौंसिल पानीपत से सीए मितेश मल्होत्रा वाईस चेयरमैन, सीए रविन्द्र सिंह सेक्रेटरी, सीए ममता प्रजापति ब्रांच इंचार्ज, सीए विमल गोयल मेम्बर, सीए जयदीप धनखड़ पैनल एक्सपर्ट और सीए शिवम कक्कड़ ने शिरकत की. मेहमानों का स्वागत कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, डॉ नवीन गोयल, प्रो पवन सिंगला, डॉ राकेश गर्ग, डॉ दीपा वर्मा, प्रो दीपिका अरोड़ा और डॉ पवन कुमार ने किया.

पैनल एक्सपर्ट सीए जयदीप धनखड़ ने वाणिज्य के छात्र-छात्राओं को बताते हुए कहा कि कॉमर्स करने वाले ज्‍यादातर छात्रों का सपना ग्रेजुएशन के बाद चार्टर्ड अकाउंटेंट या सीए कोर्स करना होता है. सीए कोर्स को करने के लिए अथक मेहनत और लगन की आवश्यकता होती है क्यूंकि इस कोर्स में छात्रों को कठिन परीक्षा से होकर गुजरना पड़ता है. सीए का काम वित्तीय लेखा-जोखा तैयार करना, वित्तीय सलाह देना, ऑडिट अकाउंट का विश्लेषण करना और टैक्स से संबंधित कार्य करना होता है. टैक्स के भुगतान का हिसाब-किताब भी सीए के ही जिम्मे होता है. मान-सम्मान के हिसाब से सीए का कार्य उच्च कोटि में गिना जाता है.

किसी भी अच्छे अकाउंटेंट का स्टेटस डॉक्टर और इंजीनियर से कम नहीं होता. उन्होनें कहा कि सीए के फाउंडेशन कोर्स को करने के लिए हमें कम से कम 12वी के बाद सीपीटी परीक्षा को पास करना होता है. सीपीटी परीक्षा को पास करने के बाद हम आईपीसीसी परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. यदि किसी कारणवश हम सीपीटी की परीक्षा देने से चूक जाते हैं तो इसे हम ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद भी दे सकते है. आईपीसीसी में सीधा प्रवेश लेने के लिए हमारे वाणिज्य की ग्रेजुएशन में 55 फीसदी अंक होने चाहिए जबकि अन्य विषयों में ग्रेजुएशन के लिए 60 फीसदी अंक होना अनिवार्य है.

जुएशन के बाद सीए का कोर्स करने की न्यूनतम अवधि 3 वर्ष है क्योंकि हम खुद को पंजीकृत करने के 9 महीने बाद सीधे आईपीसीसी परीक्षा दे सकते हैं. इसके बाद हमें चार्टर्ड अकाउंटेंट बनने के लिए ढाई से तीन साल की आर्टिकलशिप पूरी करनी होटी है. सीए कोर्स एक प्रोफेशनल कोर्स है परन्तु अन्य कोर्सेज की तुलना में नार्थ इंडिया रीजनल कौंसिल पानीपत इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के निर्देशों अनुसार बहुत ही वाजिब फीस विद्यार्थियों से लेता है. ग्रेजुएशन के बाद सीए करने की फीस लगभग 19 हजार से 27 हजार रुपये है. इसमें पंजीकरण शुल्क, लेख पंजीकरण शुल्क, पाठ्यक्रम शुल्क और सूचना प्रौद्योगिकी शुल्क शामिल हैं. इसके अलावा निर्धन और टैलेंटेड विद्यार्थियों को फीस में रियायत और स्टाईपंड भी दी जाती है. सीए मितेश मल्होत्रा वाईस चेयरमैन नार्थ इंडिया रीजनल कौंसिल पानीपत ने सीए द्वारा किये जाने वाले कार्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक सफल सीए फाइनेंशियल सिस्टम और बजट का मैनेजमेंट करता है, फाइनेंशियल ऑडिट करता है, वित्तीय सलाह देता है, क्लाइंट के साथ संपर्क बना कर रखता है, फाइनेंशियल जानकारीयां और परामर्श देता है. कंपनी के सिस्टम का रिव्यू और जोखिम का एनालिसिस करना, फाइनेंसियल जानकारी और सिस्टम की जांच करने के लिए टेस्ट करना, टैक्स प्लनिंग पर ग्राहकों को सलाह देना, अकाउंटिंग रिकॉर्ड्स को मेंटेन करना और छोटे बिजनेस के लिए अकाउंट मैनेजमेंट इनफार्मेशन तैयार करना, फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन पर क्लाइंट को सलाह देना, बिजनेस में इम्प्रूवमेंट लाने के लिए क्लाइंट को सलाह देने के साथ दिवालियापन से निपटने के तरीके बताना आदि भी सीए के द्वारा किये जाने वाले कार्य है.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने माननीय मेहमानों का स्वागत करते हुए कहा की इस प्रकार के कार्यक्रम से योग्य एवं सक्षम करियर की योजना बनाने में और शैक्षिक मार्गदर्शन में भरपूर मदद मिलती है. कामयाब व्यक्तियों को तैयार करने के लिए इस प्रकार के वृहद ज्ञान से कैरियर का भी बखूभी निर्माण होता है. कैरियर मार्गदर्शन और परामर्श सार्वजनिक और निजी शिक्षा के क्षेत्र में युवाओ को दिशा दिखाता है. सरकार भी अब शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की दिशा में कई कदम उठा रही है. कालेजो में मेंटर का प्रावधान भी इसीलिए किया गया है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे है. आज का कार्यक्रम भी इसी दिशा में एक कड़ी है. हमारा पहला कदम ये जानना होना चाहिए की हम जीवन में क्या बनना चाहते हैं और इसी बात को जानने में उन्होनें विद्यार्थियों की मदद भी की. उन्होनें कहा की कई बार हम खुद के लिए बहुत छोटे-छोटे लक्ष्य निर्धारित करते है लेकिन उन्हें हासिल करने के लिए हम समय रहते क्या विचार करते है यह सफलता प्राप्ति की दिशा में पहला महत्वपूर्ण एवं ठोस कदम होता है. फिर हमें अपने लक्ष्यों के हमारे लिए क्या मायने है विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

कार्यशाला में प्रो राकेश सिंगला, डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, दीपक मित्तल, प्रो मनमीत सिंह, प्रो नम्रता, प्रो हिमानी, प्रो आशीष, प्रो यशोदा अग्रवाल, प्रो सोनिका भी उपस्थित रहे.

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