एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप का शानदार समापन
– समर्थ, संवेदी युवा ही विकसित भारत का आधार है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 17 मार्च, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के एनएसएस पाठ्यक्रम के अनुसार आयोजित सात दिवसीय विशेष एनएसएस कैंप का विधिवत समापन हो गया । कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा,प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने समापन समारोह में सभी प्रतिभागी एनएसएस कार्यकर्ताओं को कैंप में किये गये उत्कृष्ठ कार्य और सेवा भाव के लिए प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार वितरित किये गए । विदित रहे कि सात दिन चले इस कैंप में झुग्गी-बस्तियों एवं सार्वजनिक स्थलों को स्वयंसेवकों ने अपनी कर्मस्थली बनाकर वहां सामाजिक और सामुदायिक हित के कार्य किये जिनमे साफ़-सफाई, कुपोषण के प्रति जागरूकता, कैशलेस अर्थव्यवस्था, महिलाओं की शिक्षा और सुरक्षा, बच्चों की बिमारियों से मुक्ति, डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, कन्या भ्रूण हत्या रोकथाम, घरेलू हिंसा से बचाव जैसे मुद्दों पर युवाओं ने बढ़-चढ़ कर काम किया । सांय कालीन सत्र में एसएसएस स्वयंसेवकों ने नृत्य और गीत पेश किये । आज स्वयंसेवकों ने रेलवे स्टेशन पर जाकर आमजन को कॉलेज में आयोजित होने वाली विकसित भारत युवा संसद 2025 की जानकारी दी । कैंप में अच्छे प्रदर्शन पर पुरुषों में सौरभ और महिलाओं में काजल एवं संध्या को सर्वश्रेष्ठ एनएसएस स्वयंसेवक चुना गया ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि एनएसएस कार्यकर्ताओ को समाज के गरीब लोगों, भेदभाव की भावना, व्यसन की आदत, शारीरिक बीमारीयो, बेरोजगारी, शैक्षिक समस्याओं, अक्षमता तथा मानसिक बीमारीयो जैसी जीवन की कठिन चुनौतियों में दूसरों की मदद का जरिया बनना चाहिए । अच्छे एनएसएस कार्यकर्ता को संकट का निवारण करना आना चाहिए और दैनिक जीवन के तनावों को अधिक प्रभावी रूप से सामना करने में व्यक्तियों तथा परिवारों को परामर्श देने में समर्थ रहना चाहिए । एनएसएस एक ऐसा कार्य है जो जीवन की उन्नत गुणवत्ता के लिए निवारक तथा पुनर्स्थापन कार्य के इच्छुक व्यक्तियों, परिवारों तथा समुदायों को सेवाएं देता है । समुदायवाद और परस्पर मदद का भाव एनएसएस की आत्मा है । उन्हें कॉलेज के एनएनएस कार्यकर्ताओं के जज्बे और लगन को देखकर बहुत सुखद अहसास हुआ है । ये छात्र अवश्य ही अपने जीवन में नई ऊँचाइयों को छुएंगे । समर्थ, संवेदी युवा ही विकसित भारत का आधार है ।
प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि एनएसएस एक कल्याणकारी सोच है और इसके माध्यम से उपचारात्मक संबंध स्थापित कर सामाजिक कार्य किये जा सकते है । सामाजिक कार्य करने वाला व्यक्ति समाज में अपने आप विशिष्ट बन जाता है । सामाजिक कार्यकर्ता व्यक्ति की सम्पूर्ण स्थिति को समझ कर उसके साथ कार्य करता है । समाज सेवा से बढ़कर कोई दूसरा कार्य नहीं है । ऐसा करने से न सिर्फ हमें आत्मिक सुख महसूस होता है बल्कि इससे हमारा व्यक्तित्व भी मजबूत और दृढ़ होता है । सकारात्मक सोच पैदा होने से हमें जीवन में इसका भरपूर लाभ मिलता है । दूसरो के बारे में सोचना और उनके लिए कुछ करना सबसे सर्वोत्तम जज्बा है । कॉलेज को अपने युवा और कर्तव्य परायण एनएसएस कार्यकर्ताओं पर गर्व है ।
डॉ एसके वर्मा ने साफ़-सफाई और स्वच्छता पर बल देते हुए कहा कि यदि हम अपने शरीर की साफ़-सफाई को सैदव बेहतर रखे और ऐसा प्रयास निरंतर करे तो कोई बिमारी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती है । यदि हमारे आस-पास साफ-सफाई होगी तो रोगकारक तत्व हमसे दूर रहेंगे । शरीर की अस्वच्छता और हमारे आस पड़ोस की गंदगी बीमारियों का एटीएम है । विडम्बना है कि स्वच्छता का सीधा सम्बन्ध हमारी सेहत से होने के बाद भी कुछ लोग स्वच्छता को लेकर गम्भीर नहीं है । उन्होनें एनएसएस कार्यकर्ताओं से साफ़-सफाई को जन अभियान बनाने का आह्वान किया ।

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