हाली अपना स्कूल में गणतंत्र दिवस के अवसर पर उत्साहपूर्ण और गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया।
BOL PANIPAT : माता सीता रानी सेवा संस्था द्वारा संचालित हाली अपना स्कूल में गणतंत्र दिवस के अवसर पर एक उत्साहपूर्ण और गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। इस समारोह में प्रसिद्ध पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक वीरेंद्र सोनी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए, जिन्होंने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को संबोधित करते हुए गणतंत्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला।
समारोह की शुरुआत राष्ट्रीय ध्वज फहराने के साथ हुई, जिसके बाद राष्ट्रगान गाया गया। मुख्य अतिथि श्री सोनी ने अपने संबोधन में गणतंत्र दिवस के ऐतिहासिक महत्व और पृष्ठभूमि पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी 1950 को भारत ने अपना संविधान अपनाया था, जिसके माध्यम से देश एक संप्रभु लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इस संविधान ने भारत को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों पर आधारित एक मजबूत ढांचा प्रदान किया। उन्होंने युवा पीढ़ी को इन मूल्यों को अपनाने और देश की एकता एवं अखंडता के प्रति समर्पित रहने का आह्वान किया।
श्री सोनी ने गणतंत्र दिवस को भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के संदर्भ में समझाते हुए कहा कि यह दिवस केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम के योद्धाओं और संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता तथा बलिदान की याद कराता है.
श्री सोनी ने कहा, “आज के युवाओं को देश की प्रगति में सक्रिय योगदान देना चाहिए और सामाजिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए एक मजबूत भारत का निर्माण करना चाहिए।” उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए थॉमस एडिसन के जीवन का उदाहरण दिया, जिन्होंने बिजली के बल्ब का आविष्कार किया। उन्होंने कहा कि एक उपेक्षित बालक होने के बावजूद, एडिसन ने प्रताड़ना और असफलताओं का सामना करते हुए अपनी मेहनत और लगन से न केवल वैज्ञानिक आविष्कारों में सफलता प्राप्त की, बल्कि अपने जीवन को भी उज्ज्वल बनाया। यह उदाहरण युवाओं को बताता है कि कठिनाइयों के बावजूद निरंतर प्रयास से लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
छात्रा रिया ने इतिहास प्रस्तुत करते हुए कहा कि 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम, जिसे सिपाही विद्रोह के नाम से जाना जाता है, ब्रिटिश शासन के खिलाफ पहला बड़ा विद्रोह था। इसके बाद 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई, जिसने स्वतंत्रता की मांग को संगठित रूप दिया। 20वीं सदी के शुरुआत में महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन (1920-22), सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930) और भारत छोड़ो आंदोलन (1942) जैसे महत्वपूर्ण आंदोलनों ने स्वतंत्रता संग्राम को गति प्रदान की। इन आंदोलनों में लाखों भारतीयों ने अपनी जान की बाजी लगाई और जेलों में सड़ गए।
विशेष रूप से, गीतिका ने 26 जनवरी 1930 के लाहौर अधिवेशन का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 1929 के लाहौर कांग्रेस अधिवेशन में, जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने पूर्ण स्वराज (पूर्ण स्वतंत्रता) की मांग की थी। इस अधिवेशन के निर्णय के अनुसार, 26 जनवरी 1930 को पूरे देश में स्वतंत्रता दिवस मनाया गया, जहां लोगों ने ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता की शपथ ली। यही तिथि बाद में गणतंत्र दिवस के रूप में चुनी गई, क्योंकि 1950 में संविधान लागू होने के साथ यह स्वतंत्रता संग्राम की उस भावना को साकार करती है।
कार्यक्रम में स्कूल के छात्रों ने आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, जिसमें राष्ट्रभक्ति गीत, देशभक्ति नृत्य, कविता पाठ और भाषण शामिल थे। इन प्रस्तुतियों ने समारोह को और अधिक जीवंत बना दिया। मुख्य अतिथि ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया, जिससे छात्रों में उत्साह का संचार हुआ।
माता सीता रानी सेवा संस्था की अध्यक्ष कृष्णा कान्ता राय ने मुख्य अतिथि का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि वीरेंद्र सोनी जी जैसे प्रबुद्ध व्यक्तित्व की उपस्थिति से छात्रों में देशभक्ति एवं सामाजिक चेतना का संचार हुआ है। स्कूल की जानकारी एवं परिचय देने का कार्य संस्था की महासचिव पूजा सैनी ने किया। इस अवसर पर स्कूल के निदेशक एडवोकेट राम मोहन राय, स्पर्श वर्मा, मन्नू ढींगरा, ओम नांदेड़कर, श्रेय वर्मा, मधु यादव, कंचन डावर, रोजी चावला, श्रुति जैन,सोनी यादव, आरती दुबे, सोनू त्यागी, ललिता राजावत, डॉली अवस्थी, संतोष देवी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। मंच संचालन का दायित्व सोनिया गर्ग ने कुशलतापूर्वक निभाया।
यह समारोह गरिमामय एवं प्रेरणादायक माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें सभी ने राष्ट्र के प्रति अपनी निष्ठा और समर्पण व्यक्त किया। इस प्रकार का आयोजन न केवल छात्रों को इतिहास से जोड़ता है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित भी करता है।

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