भारत का सबसे बड़ा संकट भ्रष्टाचार नहीं, शिकायत न करना है: अधिवक्ता निखिल चुघ
BOL PANIPAT । आमतौर पर जब देश की समस्याओं की चर्चा होती है तो भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अपराध या प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दों का उल्लेख किया जाता है। लेकिन इन सभी समस्याओं के पीछे एक ऐसी प्रवृत्ति छिपी हुई है जिस पर अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। वह है नागरिकों का अन्याय, अनियमितता या अधिकारों के उल्लंघन के विरुद्ध शिकायत न करना। यही कारण है कि अनेक समस्याएं वर्षों तक बनी रहती हैं और व्यवस्था में सुधार की गति अपेक्षाकृत धीमी दिखाई देती है।
अधिवक्ता, लेखक एवं सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य निखिल चुघ ने कहा कि भारत का सबसे बड़ा संकट केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि उसके विरुद्ध आवाज न उठाना है। उनका कहना है कि जब नागरिक अपने अधिकारों के उल्लंघन पर शिकायत दर्ज नहीं कराते, तब गलत कार्य करने वालों का मनोबल बढ़ता है और जवाबदेही की भावना कमजोर पड़ जाती है।
निखिल चुघ ने कहा कि आज भी बड़ी संख्या में लोग पुलिस में शिकायत दर्ज कराने, उपभोक्ता मंच का सहारा लेने, साइबर अपराध की रिपोर्ट करने या किसी सरकारी विभाग की लापरवाही के विरुद्ध आवाज उठाने से बचते हैं। कई बार लोग प्रक्रिया को जटिल समझते हैं, तो कई बार उन्हें यह विश्वास नहीं होता कि उनकी शिकायत पर प्रभावी कार्रवाई होगी।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल मतदान तक सीमित नहीं है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति नागरिक सहभागिता में निहित होती है। जब नागरिक गलतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं, शिकायत दर्ज कराते हैं और जवाबदेही की मांग करते हैं, तभी संस्थाएं अधिक पारदर्शी और उत्तरदायी बनती हैं। शिकायत करना व्यवस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाने का माध्यम है।
निखिल चुघ ने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश शिकायत प्रणालियां पहले की तुलना में अधिक सुलभ हो चुकी हैं। साइबर अपराध पोर्टल, ऑनलाइन जन शिकायत मंच, उपभोक्ता आयोग, सूचना का अधिकार और विभिन्न विभागों की डिजिटल शिकायत प्रणालियां नागरिकों को अपनी बात रखने का अवसर प्रदान करती हैं। इसके बावजूद जागरूकता और पहल की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि समाज में अक्सर शिकायत करने वाले व्यक्ति को नकारात्मक दृष्टि से देखा जाता है, जबकि वास्तव में वही व्यक्ति सार्वजनिक हित में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन या किसी सार्वजनिक सेवा में कमी दिखाई देती है और नागरिक उस पर चुप्पी साध लेते हैं, तो सुधार की संभावना भी कम हो जाती है।
अधिवक्ता निखिल चुघ ने कहा कि नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया की भी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संस्थाओं में नागरिक अधिकारों, जन शिकायत तंत्र और कानूनी जागरूकता से संबंधित कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने सुझाव दिया कि युवाओं को प्रारंभिक स्तर से ही यह सिखाया जाना चाहिए कि किसी समस्या को केवल सोशल मीडिया पर साझा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उचित मंच पर औपचारिक शिकायत करना भी उतना ही आवश्यक है। जागरूक नागरिक वही है जो समस्या की पहचान करने के साथ-साथ उसके समाधान के लिए संस्थागत प्रक्रिया का उपयोग भी करे।
निखिल चुघ ने कहा कि वे अपने लेखों, पुस्तकों और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से लोगों को उनके अधिकारों और शिकायत तंत्र के प्रति जागरूक करने का प्रयास जारी रखेंगे। उनका मानना है कि जब नागरिक चुप रहने के बजाय जिम्मेदारी के साथ अपनी आवाज उठाएंगे, तभी एक अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और सशक्त समाज का निर्माण संभव हो सकेगा।

Comments