‘भक्त पूरणमल’ सांग का जानदार एवं ह्रदय स्पर्शी प्रदर्शन
–एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में चार दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव का तीसरा दिन
–आज के सांग को देखने उमड़ा ग्रामीण युवा और बुजुर्ग महिलाओं का सैलाब, आयोजन को बताया यादगार और ऐतिहासिक
–पुरानी रीतियों को तोड़कर लड़कियों को सांग में भाग लेते देख, सांग देखने आने की प्रेरणा मिली: आशा देवी ग्राम तुगाना
BOL PANIPAT , 20 मार्च. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र प्रायोजित चार दिवसीय रत्नावली युवा सांग महोत्सव का आज तीसरा दिन रहा जिसमे ‘भक्त पूरणमल’ सांग की मार्मिक प्रस्तुति दी गई । आज के सांग की मुख्य विशेषता ग्रामीण अंचल से आई युवा और वृद्ध महिलाओं का सैलाब रहा जो इस सांग की प्रस्तुति को देखने कॉलेज प्रांगण में उमड़ा । कार्यक्रम में अतिविशिष्ट अतिथि आशा देवी गाँव तुगाना पानीपत रही जिनका स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और डॉ संगीता गुप्ता ने पुष्प-रोपित गमला भेंट करके किया । आज का सांग आर्य कॉलेज की टीम ने पेश किया । मंच संचालन डॉ संगीता गुप्ता ने किया । सांग महोत्सव का आकर्षण समालखा, मतलौडा एवं इसराना के दूर-दराज के गावों के बुजुगों और हरियाणवी बोली जानने-समझने वाले दर्शको को भी अपनी तरफ खींच लाया । चाय की चुस्कियों एवं के साथ उन्होनें पूरे सांग का बड़े चाव के साथ लुत्फ़ उठाया तथा ऐसे आयोजन बार-बार करने का आग्रह प्राचार्य से किया । उन्होनें छात्रों की कला पर पकड़ और सुरीली आवाज की जमकर तारीफ़ की ।
आर्य कॉलेज की सांग टीम का मार्गदर्शन डॉ विजय सिंह ने किया । पूरणमल का अभिनय विनय ने, नूना दे का अंकित ने, बेड़े बंद और राजा का दीपक ने, बंदी का हिमांशु ने, रानी इच्छा दे का आशीष और रूपेशाट का विनय ने अदा किया । नरेश कुमार निर्देशित सांग की दर्शकों ने भूरी-भूरी प्रशंसा की ।
छात्रा ईशा शर्मा ने कहा कि हरियाणवी संस्कृति का इतिहास समृद्ध है जिसमें सांग का अहम हिस्सा है । सांग आरंभ से ही हरियाणा में लोकप्रिय रहा है । उन्होंने कहा कि सांग केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहा है अपितु हरियाणवी संस्कृति के संवाहक के तौर पर इसकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है । अंग्रेजी ऑनर्स के छात्र रोहित कुमार ने बताया कि हरियाणवी सांग कला अपने आप में अदभुत और अभिभूत करने वाली कला है । हरियाणवी भाषा की वाकपटुता और हाजिरजवाबी लाजवाब है । गाँव से आये विभिन्न वृद्ध और अनुभवी लोगो ने कहा कि जीवन में कामयाबी और ख़ुशी का राज इन्ही सांगो और इनकी कहानियों में छुपा है । प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने भी पानीपत और इसके आस-पास की जनता से आग्रह किया कि चूँकि कल सांग का अंतिम प्रदर्शन होगा इसलिए वे अधिक से अधिक संख्या में कॉलेज में पधार कर सांग को देखे और कॉलेज को अनुग्रहित करे ।
आशा देवी ने सांग देखने के पश्चात कहा कि हरियाणवी सांग-स्वांग परंपरा कालजयी है और सांग में हरियाणवी संस्कृति के दर्शन होते हैं, हरियाणवी जन-जीवन की झलक मिलती है । आज जरूरत है कि हरियाणवी संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के लिए सांग की परंपरा को आगे बढ़ाया जाए और यही काम एसडी कॉलेज ने किया है । ख़ासतौर पर जिस तरह से कन्याओं ने आगे आकर इस विधा को आगे बढाया है उससे उन्हें भी यहाँ आने की प्रेरणा मिली है और वे खुद को रोक नहीं पाई हैं । शिक्षा का यह पहलु उन्हें बहुत सुखद लगा है ।

दिनेश गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि रागनी एक कौरवी लोकगीत विधा है जो अब स्वतंत्र लोकगीत विधा के रूप में स्थापित हो चुकी है । हरियाणा में मनोरंजन के लिए गाए जाने वाले गीतों में रागनी प्रमुख है । यहां रागनी एक स्वतंत्र व लोकप्रिय लोकगीत विधा के रूप में प्रसिद्ध है । हरियाणा की रागनियों की चर्चा हो और पं लखमीचंद का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आज की परिस्थितियो में अधिकांश लोग एकाकी और दुःख से भरा जीवन जीने को मजबूर हैं । यह इंसान और इंसानियत के लिए अच्छे संकेत नहीं है । ऐसी घड़ी में गीत, संगीत और सांग द्वारा ही युवाओं में परिलक्षित गहरी खाई को समाप्त किया जा सकता है और जीवन के प्रति उनके मन में जो भावानुरा है उन्हें बदला जा सकता है ।
आज की प्रस्तुति में ‘भक्त पूरणमल’ सांग प्रस्तुत किया । पूरणमल एक ऐसा भक्त हुआ है जिसने भारतवर्ष और भारतीय संस्कृति को चरम पर पहुंचाया । पूरणमल के पिता संख्पति सियालकोट के राजा थे और उनकी माता का नाम अम्बादे था । रानी अम्बादे को काफी वर्षो तक कोई संतान नहीं हुई तब उन्होनें महान गुरु गोरखनाथ की उपासना की । उधर गोरखनाथ बंगाल से चले और उन्होनें पंजाब राज्य में सियालकोट के राजा संख्पति के बाग में डेरा डाल लिया । जब यह समाचार रानी अम्बादे ने सुना तो वह गोरखनाथ के पास गई और अपना दुःख बताया । गुरु गोरखनाथ ने बताया कि उनके इस जन्म में तो क्या अगले सात जन्म तक कोई संतान नहीं होगी क्योंकि उसने बचपन में एक पक्षी के अण्डों को तोड़ दिया था । इस पर रानी रोने लगी और आत्मदाह करने की सोचने लगी । तब गोरखनाथ के शिष्य रसुतनाथ ने अपने गुरूजी से आज्ञा मांगी कि वह रानी के गर्भ से जन्म लेना चाहता है । गोरखनाथ उसकी बात मान गए और फिर रानी अम्बादे को एक पुत्र पैदा हुआ जिसका नाम पूरणमल रखा गया । इधर राजा संख्पति ने भी स्वयंवर कर पुन: युवा रानी से विवाह कर लिया । पहले से शादीशुदा राजा की बडी रानी का पुत्र पूरणमल रौबीला जवान बन जाता है । राजा की युवा रानी भक्त पूरणमल पर आसक्त हो जाती है लेकिन भक्त पूरणमल पिता द्वारा विवाह करने पर नवयुवा रानी को मां का सम्मान देता है । गुस्से और आसक्ति में लिप्त रानी झूठा आरोप लगवाकर भक्त पूरणमल को मरवा देती है । लेकिन गुरु गोरखनाथ और औधडनाथ भक्त पूरणमल के ब्रह्मचर्य और चरित्र की निष्ठा को देखते हुए उसे पुनः जिन्दा कर देते है और वह गोरखनाथ के साथ चला जाता है और कुछ दिनों में ही सब विद्या ग्रहण कर लेता है । गुरु जी उसकी योग्यता को देखते हुए उसे सब शिष्यों का मुखिया बना देते है । इससे सभी शिष्य ईर्ष्या में भर जाते है और मिलकर पूरणमल को फंसाकर चीन की रानी के पास भिक्षा लेने के लिए भेज देते है । सीधे स्वभाव के पूरणमल को पता ही नहीं है कि रानी ने साधु को ही मरवा दिया है । जब पूरणमल वहां जाकर भिक्षा की आवाज लगता है तो रानी तलवार लेकर आती है परन्तु पूरणमल के रूप को देखकर मंत्र-मुग्ध हो जाती है और शादी का प्रस्ताव पूरणमल के आगे रखती है । पूरणमल मना करता है तो रानी पूरणमल को भी मरवा देती । उधर गोरखनाथ ने अंतर-ध्यान से देखा तो वे भी चीन में रानी के पास जाते है और पूरणमल को पुनः जीवित करते है । इस पर रानी गोरखनाथ पर तलवार से प्रहार करती है परन्तु पत्थर की बन जाती है और गोरखनाथ से प्राथना करती हुए माफ़ी मांगती है ।
वीरवार को एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की टीम इस आयोजन का अंतिम सांग प्रस्तुत करेगी । इस अवसर पर प्रो सुषमा दहिया, डॉ इंदु गर्ग, प्रो सविता पुनिया, डॉ रेणु गुप्ता, प्रो साक्षी, प्रो दिव्या, प्रो रजनी, प्रो मुक्ता चांदना, प्रो सपना, प्रो श्वेता, डॉ प्रोमिला, प्रो शिवी खुराना, प्रो प्रियंका, प्रो भाविका, प्रो कीर्ति, प्रो इंदु पुनिया, प्रो सुनील कुमार, प्रो सचिन समेत अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे ।

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