आई.बी.स्नातकोत्तर महाविद्यालय में राष्ट्रीय स्तर पर लोकगीत/ हरियाणवी लोकगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया
BOL PANIPAT : आई.बी.स्नातकोत्तर महाविद्यालय पानीपत में राष्ट्रीय स्तर पर लोकगीत/ हरियाणवी लोकगीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया | दोनों प्रतियोगिताओं में अलग-अलग प्रतिभागियों ने अपनी रूचि के अनुरूप भाग लिया | लोकगीत/ हरियाणवी लोकगीत भारतीय संस्कृति के दयोतक है | भिन्न-भिन्न रीति रिवाजों और परंपराओं को इंगित कर आज के समाज में उसकी प्रासंगिकता को दर्शाने वाले हैं | युवा पीढ़ी अपनी लोक प्रचलित परंपरा से विमुख होती जा रही है | इसलिए लौकिक परंपरा ही समाज में संवेदनशीलता एवं आपसी भाईचारा पैदा करती है | दोनों प्रतियोगिताओं में लगभग 50 प्रतिभागियों ने भाग लिया |
इसके अंतर्गत भिन्न – भिन्न विषय जैसे अनुष्ठान, शास्त्रविधि, धार्मिक क्रिया, धार्मिक संस्कार, रस्म, रिवाज ऐसे क्रमबद्ध कार्यों के उद्देश्यों से परिपूर्ण गीतों का गायन रहा | कॉलेज प्राचार्य डॉ. अजय कुमार गर्ग ने बताया कि इस तरह के आयोजन से हमें अपनी लोक संस्कृति में प्रचलित रीति रिवाज का ज्ञानबोद्दय होता है और भारतीय संस्कृति के भावपक्ष का जीवन में कितना महत्व है इसका अनुभव होता है इस अनुभूति को जीवन में आत्मसात कर हम अपनी पुरातन परंपराओं के महत्व को युवा पीढ़ी को समझा सकते है |
इस कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. शर्मिला यादव ने कहा कि गीत-संगीत में निहित राग-रागनियों से जीवन की उदासीनता दूर होती है एवं जीवन में माधुर्य भाव का संचार होता है | इसलिए लोकगीत हमारी संस्कृति का आईना है | पुरातन काल से ही भावनाओं का उदगार गीत – संगीत के माध्यम से होता रहा है | संयोग हो या वियोग दोनों में मानव मन की झंकार गीत बन जाती है |
साहित्य में मीरा बाई, महादेवी वर्मा की रागात्मकता गीतों के माध्यम से हमें दिखाई देती है | इसी तरह तुलसीदास ने हमारी संस्कृति में व्याप्त 16 संस्कारों का जो वर्णन अपने काव्य में किया है वही संस्कार भारतीय संस्कृति में गीत संगीत के माध्यम से शादी से लेकर जीवन की अंतिम विदाई तक के गीत भजन समाहित है जो हमारी लोक संस्कृति के प्रति हमारी जागरूकता को दर्शाता है | हरियाणवी गीत – संगीत भी आजकल लोगो के द्वारा सुना जाता है और हरियाणवी संस्कृति को युवाओं तक पहुँचाना अहम कार्य करता है |
सह संयोजिका डॉ. रंजू ने इस आयोजन में अहम भूमिका का वहन किया | उन्होंने बताया कि हरियाणवी संस्कृति उन्माद से भरी है और इसका संरक्षण गीत संगीत से ही है | दोनों प्रतियोगिताओं के परिणाम इस प्रकार से रहे |
1. Lokgeet (लोकगीत)
Ist Position Mankirat kaur (MLN College Yamunanagar )
IInd Position Pragati Sharma (Shaheed Mangal Pandey Govt. Girls Degree College, Sonipat )
IIIrd Position Vishu (Hindu Girls College, Sonipat) and Isha Rani (Dayanand Mahila Mahavidhyalya, Kurukshetra)
2. Haryanvi Lokgeet (हरियाणवी लोकगीत )
Ist Position Muskan (R.K.S.D (PG) College, Kaithal)
IInd Position Rajni Devi (Dayanand Mahila Mahavidyalya ,Kurukshetra)
IIIrd Position Neelam (I.B. (PG) College, Panipat)

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