एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के एनसीसी कैडेट्स ने “ड्रग एब्यूज” के खिलाफ निकाली रैली
-शपथ के माध्यम से समाज और युवाओं का किया नशे से दूर रहने का आह्वान
-पहले हम नशे को पीते है बाद में नशा हमें पीने लगता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनसीसी यूनिट्स के कैडेट्स ने “ड्रग एब्यूज” एवं “नशा-मुक्ति”अभियान के समर्थन में सेमीनार का आयोजन किया और नशे से दूर रहने की शपथ लेने के पश्चात जागरूकता रैली निकाली. एनसीसी ग्रुप हेडक्वार्टर पंजाब, हरियाणा एवं हिमाचल प्रदेश चंडीगढ़ के आह्वान पर और 12 हरियाणा एनसीसी बटालियन सोनीपत के कमांडिंग अफसर कर्नल अनिल यादव एवं एडम अफसर लेफ्टिनेंट कर्नल अनूज मान के मार्गदर्शन में आज आयोजित कार्यक्रमों में कॉलेज के युवा छात्र-छात्राओं और समाज को शराब, सिगरेट, बीडी, गुटखा, ड्रग्स इत्यादि के कुप्रभावो एवं इनसे बचने के उपायों के बारे में विस्तार से समझाया गया तथा उन्हें नशे से दूर रहने रहने की शपथ दिलाई. कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और एनसीसी अधिकारी डॉ (लेफ्टिनेंट) बलजिंदर सिंह ने की. कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई तथा इसका समापन युवाओं को नशे से दूर रहने और दूसरो की भी नशे से मुक्ति दिलाने की शपथ दिलाकर हुआ.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की युवा शुरू में तो प्रयोग के तौर पर नशे का सेवन करते है परन्तु धीरे-धीरे यह उनकी आदत में शामिल हो जाता है. पहले वे नशे को पीते है बाद में नशा उनको पीने लगता है. उन्होनें उपस्थित युवाओं और कैडेट्स से कहा की वे नशे को आज ही ‘नो’ कहें. उन्होनें बच्चो पर विशेष ध्यान रखने की सलाह अभिभावकों को दी. धूम्रपान पर विशेष रूप से बोलते हुए उन्होनें कहा की यह हमारी सेहत के लिए बहुत अधिक खतरनाक है. इससे हमारे फेफड़ों में कैंसर और ह्रदय की बीमारी पैदा होती है. धूम्रपान करने से हमें ऐसे रोग लगते हैं जिनका इलाज करना मुश्किल होता है. जब हमें धूम्रपान या किसी भी प्रकार के नशे की लत लग जाती है तो उसे हम आसानी से नहीं छोड़ सकते. इसे छोड़ना तभी संभव होता है जब हमारी इच्छा शक्ति दृढ होती है अन्यथा कोई हमें इससे छुटकारा नहीं दिला सकता.
धूम्रपान का सीधा असर हमारे फेफड़ों पर पड़ता है. धूम्रपान करने से हमारी त्वचा पर झुरियां पड़ जाती है जिसके कारण हम उम्र से पहले ही बूढ़े हो जाते हैं. हमारा चेहरा काला पड़ जाता है और हमारे रक्त के प्रवाह में समस्या पैदा हो जाती है. इसका हमारे दांतों और मसूड़ों पर भी बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ता है. धूम्रपान हमारे पाचन तन्त्र पर भी असर डालता है. धुम्रपान वाला खुद की जिंदगी को तो मुसीबत में डालता ही है वह अनजाने में दूसरो को भी धुंआ देकर उनके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ करता है. जिन लोगों को धुम्रपान की आदत होती है उनके दिमाग पर भी इसका असर होता है. इससे सीने में दर्द, साँस लेने में कठिनाई, टीबी आदि बीमारियाँ भी हो सकती है. समाज में फैली हिंसा, चोरी, आत्महत्या आदि अनेक अपराधों के पीछे नशा एक बहुत बड़ी वजह बन गई है.
उन्होनें बीड़ी, शराब, तम्बाकू, हेरोइन, कोकीन, लएसडी या ड्रग्सल गोलियां या जिलेटिन, क्रिस्टल मेथ इत्यादि जैसे नाशो पर भी विस्तार से प्रकाश डाला. लेफ्टिनेंट बलजिंदर सिंह ने कहा की आधुनिक समय तनाव और प्रतिस्पर्धा से भरा है और ऐसे में युवाओं के भटकने का खतरा सबसे अधिक होता है. भटका इंसान या फिर मौज-मस्ती ढूँढने वाला इन्सान ही नशे को अपनाता है. आज के कार्यक्रमों को आयोजित करने का प्रायोजन भी यही है की हम युवाओं को सही मार्ग दिखाए और नशे से मुक्ति में इनकी मदद करे. नशा ऐसी बीमारी है जो हमें, हमारे समाज और देश को तेजी से निगलती जा रही है. आज शहर और गावों में पढ़ने-खेलने की
उम्र में स्कूल और कॉलेज के बच्चे एवं युवा वर्ग मादक पदार्थों के बाहुपाश में जकड़ते जा रहे हैं. इस बुराई के कुछ हद तक जिम्मेदार अभिभावक भी हैं. वे अपने काम धंधों में इतना उलझ गए हैं कि उन्हें फुर्सत ही नहीं है ये जानने की की उनका बच्चा कर क्या रहा है, कहाँ जा रहा है. इसके विपरीत बच्चों की हर मांग पूरी करना ही वे अपनी जिम्मेदारी समझ बैठे हैं.
यह सोच हमको तुरंत बदलनी होगी नहीं तो बहुत देर हो जायेगी. कमांडिंग अफसर कर्नल अनिल यादव ने अपने सन्देश में कहा की कभी शौक के नाम पर तो कभी दोस्ती की आड़ में, कभी दुनियाँ के दुखों का बहाना करके तो कभी कोई मज़बूरी बताकर, कभी टेंशन तो कभी बोरियत दूर करने के लिए लोग शराब, सिगरेट, तम्बाकू, ड्रग्स आदि अनेक प्रकार के मादक द्रव्यों को लेना शुरू करते है. लेकिन नशा कब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है उन्हें पता ही नहीं चलता और जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है.
शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट करना, शादीशुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात है. इसके साथ-साथ मुँह, गले व फेफड़ों का कैंसर, ब्लड प्रैशर, अल्सर, यकृत रोग, अवसाद एवं अन्य अनेक रोगों का मुख्य कारण विभिन्न प्रकार का नशा है. उन्होनें नशा छोड़ने के लिए उपाय एवं उपचारों बारे भी बताया.
पवन गोयल प्रधान ने अपने सन्देश में कहा की हर युवा को अपने मन, कर्म और आत्मा को पूरी तरह नियंत्रण में रखना चाहिए. उन्होनें कहा की हमें हमेशा पॉजिटिव रहना चाहिए तथा खुद को खेल-कूद, किताबो एवं अन्य ऐसे उपायों में व्यस्त रखना चाहिए जिससे हमारा मन नहीं भटके. यदि इतने उपाय करने के बाद भी वे नशा छोड़ने में सफल न हों तो विशेषज्ञ एवं नशा मुक्ति केंद्र से राय लेना हमेशा बेहतर होता है. शराब के बारे में बोलते हुए उन्होनें कहा की शराब एक धीमा जहर है जो सेवन करने वाले व्यक्ति को धीरे-धीरे मौत के मुँह मे धकेलता रहता है. लोग जाने-अनजाने शराब का सेवन करते रहते है और धीरे-धीरे यह शौक लत में परिवर्तित हो जाता है. तम्बाकू उत्पादों का सेवन भी अनेक रूप में किया जाता है जैसे बीड़ी, सिगरेट, गुटखा, जर्दा, खैनी, हुक्का, चिलम आदि. सिगरेट, बीडी और हुक्के का हर कश एवं गुटखे, जर्दे, खैनी की हर चुटकी हमें हर पल मौत की ओर ले जाती है.
इस अवसर पर सभी युवा छात्र-छात्राओं और कैडेट्स को नशा मुक्ति की शपथ दिलाई गई.

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