एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय सात दिवसीय एनएसएस विशेष कैंप का छठा दिन
सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काबड़ी में महिलाओं को किया कुपोषण एवं अनीमिया के प्रति जागरूक
एनएसएस कार्यकर्ताओं ने पाया अग्निशमन और आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षण
लोगों को प्रबुद्ध और प्रशिक्षित करने का कार्य एनएसएस स्वयंसेवकों से बेहतर कोई नहीं कर सकता: धर्मेन्द्र दाहिया
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र के एनएसएस पाठ्यक्रम के अनुसार 15 से 21 फरवरी तक चलने वाले सात दिवसीय एनएसएस विशेष कैंप का आज छठा दिन रहा जिसमे अग्निशमक थर्मल पानीपत से पधारे धर्मेन्द्र दाहिया ने एनएसएस कार्यकर्ताओं को आग बुझाने और आपदा प्रबंधन पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया और उन्हें मुसीबत के समय धैर्य, संयम और निडरता का महत्व समझाया. तत्पश्चात सभी स्वयंसेवक सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गए और वहां मौजूद बच्चों और महिलाओं को कुपोषण, खून की कमी (अनीमिया) और कोरोना से लड़ने और बचने के उपायों बारे समझाया और उन्हें संतुलित एवं पौष्टिक भोजन का महत्त्व समझाया. उन्हें मास्क लगाने और कोरोना महामारी से अब भी सचेत रहने का आग्रह किया गया. माननीय मेहमान का स्वागत कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज में एनएसएस प्रभारी डॉ राकेश गर्ग एवं डॉ संतोष कुमारी ने किया. धर्मेन्द्र दाहिया के अनुभवों और ज्ञान को एनएसएस यूनिटस के कार्यकर्ताओं ने काबड़ी ग्रामवासियों के साथ साझा किया और उन्हें पराली और खेतों में आग न लगाने और पर्यावरण को बचाने की नसीहत दी. कार्यकर्ताओं ने युवाओं, बच्चों, वयस्कों और महिलाओं को नशे के नुकसान और बच्चों के शोषण जैसे सामाजिक हित के विषयों पर भी जागरूक किया.

धर्मेन्द्र दाहिया अग्निशमक थर्मल पानीपत ने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं को रोकना संभव नहीं है लेकिन इनके बचाव के तौर-तरीकों को सीखकर हम इनसे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते है. प्राकृतिक आपदाओं के प्रबंधन बारे लोगों का जागरूक और प्रशिक्षित होना बहुत जरूरी है और यह कार्य एनएसएस कार्यकर्ताओं से बेहतर कोई नहीं कर सकता है. इसी उद्देश्य से अग्नि सुरक्षा एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित यह कार्यशाला आयोजित की गई है. देश के विभिन्न हिस्सों में घटने वाली प्राकृतिक मानवीय आपदाओं को ध्यान में रखकर राष्ट्रीय आपदाएं प्रबंधन प्राधिकरण योजनाएं बनाती है. किस क्षेत्र में बाढ़, भूकंप, आगजनी की आशंकाएं अधिक हैं इसके मुताबिक़ पूरे साल की आपदा प्रबंधन योजनाएं बनाई जाती हैं. इस प्रकार की योजनाओं से संबंधित क्षेत्र में घटने वाली आपदा पर तुरंत प्रभाव से काबू पाया जा सकता है. आपदा प्राकृतिक या मानव निर्मित हो सकती है लेकिन सभी प्रकार की आपदाओं पर पूरी तरह से काबू पाना मुमकिन नहीं है. फिर भी आपदा प्रबंधन के उचित तौर-तरीकों के प्रशिक्षण से इनसे होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि साधारणतः पांच प्रकार से आग की घटनाएं होती है. पहली साधारण आग जो घास-फूस आदि में लगती है, दूसरी तरल पदार्थ तेल आदि की आग, तीसरी गैस की आग जिसमें रसोई गैस शामिल है, चौथी धातु की आग और पांचवीं बिजली से लगने वाली आग है. इन सभी प्रकार से लगने वाली आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए अलग-अलग तौर-तरीके अपनाए जाते हैं. उन्होंने सभी प्रकार से लगने वाली आग पर काबू पाने के तौर-तरीकों की विस्तार से जानकारी दी और इन्हें व्यवहारिक तरीके से आग लगाकर और फिर उसे बुझाकर सभी को सिखाया. उन्होनें कहा की आग और आपदाओं पर काबू पाने का सबसे महत्वपूर्ण गुण मनुष्य का मनोबल और साहस है क्यूंकि निडर और साहसी व्यक्ति ही बिना घबराए प्राकृतिक आपदाओं और आग पर काबू पा सकता है. उन्होंने बताया कि स्कूल, कॉलेज या घर में अग्नि शमन यंत्रों को सही जगह पर रखना चाहिए ताकि आगजनी के समय उनका इस्तेमाल करने में आसानी हो. अग्निशमन यंत्र चालू हालत में होने चाहिए और हमें उन्हें चलाना भी आना चाहिए. इस अवसर पर छात्राओं एवं प्राध्यापकों ने आग लगने पर अग्नि शमन यंत्र का इस्तेमाल करना सीखा. भूकंप आने की स्थिति में हमें तुरंत खुले स्थान की ओर दौड़ना चाहिए. अगर दो-तीन सैकेंड में खुले स्थान पर पहुंचना मुश्किल है तो हमें घर के किसी कोने में या टेबल आदि के नीचे बैठ जाना चाहिए. लिफ्ट का प्रयोग बिलकुल नहीं करना चाहिए.

एसडी पीजी कॉलेज प्रधान पवन गोयल ने कहा कि युवाओं में राष्ट्रीयता की भावना उत्पन्न करने के लिए ही एनएसएस की स्थापना की गई थी और आज इस योजना में विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं स्कूलों के चालीस लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हुए है. बिना किसी इच्छा के दूसरों की सहायता करना और समाज की सेवा करना बहुत बड़ी बात है. एनएसएस लोगों के साथ मिलकर कार्य करना और राष्ट्रीय आपदाओं के समय सेवा करना सिखाता है. उन्होंने स्वयंसेवकों को निरंतर देश और समाज की सेवा करने का आह्वान किया.
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने एनएसएस कार्यकर्ताओं का हौंसला बढ़ाते हुए कहा की एनएसएस के तहत छात्र-छात्राएं बहुत अच्छे और पुनीत कार्य कर रहे हैं. युवा अवस्था में अच्छे कार्य करने की क्षमता और भी ज्यादा होती है. कॉलेज के सभी एनएसएस स्वयंसेवी युवा भारतीय हैं और वे समाज के सबसे गतिशील वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्हें खुद पर नाज होना चाहिए.
इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में प्रो कविता, प्रो जुगमती, प्रो मीतू सैनी, प्रो सन्नी, प्रो डेनसन डी पॉल, प्रो अनूप आदि भी एनएसएस स्वयंसेवकों के साथ रहे.

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