एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा ‘वर्ल्ड नो टोबेको डे’ (विश्व तम्बाकू निषेध दिवस) पर एक दिवसीय सेमीनार और जागरूकता रैली का आयोजन
–एनएसएस यूनिट्स के स्वयंसेवकों ने निकाली तम्बाकू निषेध जागरूकता रैली और उठाई तम्बाकू को छोड़ने-छुडवाने की शपथ
–भटका या मौज-मस्ती ढूँढने वाला इन्सान ही नशे को अपनाता है: डॉ अनुपम अरोड़ा
–धूम्रपान की मार सबसे बड़ी मार, ये बर्बाद कर देती है सुखी परिवार: डॉ राकेश गर्ग
BOL PANIPAT , 31 मई,
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की एनएसएस इकाइयों के तत्वाधान में ‘विश्व नो टोबेको डे” (विश्व तम्बाकू निषेध दिवस)पर एक दिवसीय सेमिनार और जागरूकता रैली का आयोजन हुआ जिसमें बतौर विशिष्ट मेहमान प्रधान दिनेश ने शिरकत की और कार्यकर्ताओं का हौंसला बढाया । कार्यक्रम का मार्गदर्शन प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा और अगुआई एनएसएस प्रभारी डॉ राकेश गर्ग ने की । इस अवसर पर एनएसएस स्वयंसेवकों ने तम्बाकू निषेध जागरूकता रैली निकाली और ‘जिंदगी को यूँ धुंए में न उड़ाओ, होश में आओ होश में आओ’, ‘धूम्रपान की मार सबसे बड़ी मार, ये बर्बाद कर देती है सुखी परिवार’, ‘सिगरेट का प्रयोग, जीवन में लाता है अनेक रोग’ जैसे नारे लगाकर कॉलेज के युवाओं और समाज को हर प्रकार के नशे विशेषकर तम्बाकू से दूर रहने बारे सचेत किया । प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कॉलेज के युवा छात्र-छात्राओं को सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, शराब, ड्रग्स इत्यादि के कुप्रभावो एवं इनसे बचने के उपायों के बारे में विस्तार से समझाया । उन्होनें तम्बाकू से दूर रहने की शपथ भी विद्यार्थियों को दिलाई । विश्व तम्बाकू निषेध दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य तम्बाकू के खतरों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके नकारात्मक प्रभावों के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाना है । यही नहीं, निकोटिन और तम्बाकू व्यवसाय का पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे प्रभावों के प्रति अभियान चलाना और इससे होने वाली बिमारियों और मौतों को कम करना भी इस दिन को मनाने का प्रमुख उद्देश्य है । इसीलिए इस ख़ास दिन पर तम्बाकू के खतरों के बारे में जागरूकता फैलाई जाती है । तम्बाकू का उपयोग किस तरह से शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है इसके बारे में सारी जानकारियाँ इस ख़ास दिन पर दी जाती है । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की एक रिपोर्ट के अनुसार हर साल दुनिया भर में लगभग 80 लाख लोग तम्बाकू के सेवन से होने वाले रोगों की वजह से मौत के मुंह में चले जाते है और यह आंकड़ा बढ़ता जा रहा है । विदित रहे कि मादक पदार्थों के दुरूपयोग पर कॉलेज में एक जागरूकता केंद्र भी स्थापित है जिसका उद्देश्य नशे जैसी सामाजिक बुराई से लड़ने के लिए युवाओं को तैयार करना है । विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वैश्विक तम्बाकू संकट और महामारी से होने वाली बीमारियों और मौतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए साल 1987 में पहला ‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस’ मनाया । फिर 1988 में अपने संकल्प में 31 मई को इसे मनाया जाने लगा । इस बार के विश्व तम्बाकू निषेध दिवस का थीम है – ‘तंबाकू उध्योग के हस्तक्षेप से बच्चों की रक्षा करना’ ।
दिनेश गोयल प्रधान ने कहा कि धूम्रपान करना और तम्बाकू का प्रयोग करना हमारी सेहत के लिए बहुत अधिक खतरनाक है । इससे हमारे फेफड़ों, शरीर और मस्तिष्क में कैंसर और ह्रदय सम्बन्धी बीमारियाँ पैदा होती है । तम्बाकू के प्रयोग से हमें ऐसे रोग होने शुरू हो जाते है जिनका इलाज करना बाद में मुश्किल होता है । पंजाब और हरियाणा में नशे का जिस प्रकार से फैलाव हुआ है वह देश और समाज के लिए चिंता का विषय है और इसके खिलाफ अब युवाओं को ही खड़ा होना पड़ेगा । कॉलेज चाहता है कि आज का युवा जो कल का भविष्य है हर मायने में तंदुरस्त और सेहतमंद रहे तथा कभी नशे के भंवर में न फंसे ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि आधुनिक समय तनाव और प्रतिस्पर्धा से भरा है और ऐसे में युवाओं के भटकने का खतरा भी सबसे अधिक है । भटका इंसान या फिर मौज-मस्ती ढूँढने वाला इन्सान ही तम्बाकू और अन्य नशों को अपनाता है । आज के सेमिनार को आयोजित करने का उद्देश्य भी यही है कि युवाओं को सही मार्ग दिखाया जाए और उनकी धूम्रपान एवं अन्य नशों से मुक्ति दिलाने में मदद की जाए । किसी भी प्रकार का नशा करना एक ऐसी बीमारी है जो खुद हमें, हमारे समाज और देश को तेजी से बर्बाद कर सकती है । शहर और गावों में पढ़ने-खेलने की उम्र में स्कूल और कॉलेज जाने वाले होनहार युवा अब मादक पदार्थों के बाहुपाश में जकड़ते जा रहे हैं । वक्त आ गया है कि अब हम अपनी सोच और प्राथमिकताओं को तुरंत बदले वरना बहुत देर हो जायेगी । उन्होनें धुम्रपान और तम्बाकू का नशा छोड़ने के उपायों एवं उपचारों के बारे भी विस्तार से बताया । उन्होनें कहा कि हमें हमेशा सकारात्मक रहना चाहिए तथा खुद को खेल-कूद, किताबो एवं अन्य ऐसे उपायों में व्यस्त रखना चाहिए जिससे हमारा मन न भटके । यदि इतने उपाय करने के बाद भी हम नशा छोड़ने में सफल न हों तो विशेषज्ञ एवं नशा मुक्ति केंद्र से राय लेना हमेशा बेहतर होता है ।
डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि युवाओं से सबसे ज्यादा उम्मीद उनके माता-पिता को होती है और जब युवा तम्बाकू और अन्य नशों के चक्कर में पड़ जाते है तो उनके माता-पिता को सबसे ज्यादा कष्ट झेलना पड़ता है । व्यक्ति का यदि समय खाली है और उसने कोई लक्ष्य भी स्वयं के लिए निर्धारित नहीं किया है तो उसका नशे के चुंगल में फंसना आसान हो जाता है । उन्होनें युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने समय का अधिक से अधिक सदुपयोग करे । लक्ष्यविहीनता और खालीपन हमें नशे की ओर धकेल सकते है । इसलिए हमें खुद को खूब व्यस्त रखना चाहिए और इसमें एनएसएस इस भूमिका को बखूबी निभाता है ।
डॉ एसके वर्मा ने कहा कि आनंद का एक कश आने वाली बीमारियों की वजह बन सकता है । कभी शौक के नाम पर तो कभी दोस्ती की आड़ में, कभी दुनियाँ के दुखों का बहाना करके तो कभी कोई मज़बूरी बताकर, कभी टेंशन तो कभी बोरियत दूर करने के लिए लोग तम्बाकू, गुटखे और अन्य प्रकार के मादक द्रव्यों को लेना शुरू कर देते है । लेकिन नशा कब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है उन्हें पता ही नहीं चलता और जब पता चलता है तब तक सब खत्म हो जाता है ।
इस अवसर पर सभी युवा छात्र-छात्राओं को नशा मुक्ति की शपथ डॉ अनुपम अरोड़ा ने दिलाई । कार्यक्रम में डॉ एसके वर्मा, एनएसएस अधिकारी डॉ संतोष कुमारी, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला भी उपस्थित रहे ।

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