Thursday, April 16, 2026
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व्यक्ति को हनुमान जी के चरित्र से शिक्षा लेनी चाहिए : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी


BOL PANIPAT : सनौली रोड, नेता जी कालोनी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण सांई बाबा मन्दिर के 54वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत त्रिदिवसीय श्री राम कथा सत्संग के अंतिम दिन प्रवचन करते हुए स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने हनुमान जी की के गुणों का वर्णन करते हुए कहा कि व्यक्ति को हनुमान जी के चरित्र से शिक्षा लेनी चाहिए।
महाराज श्री ने अपने प्रवचनों में हनुमान जी के चरित्र पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि रामायण में से हनुमान जी का चरित्र बाहर निकाल दिया जाए तो रामायण में कुछ नहीं बचता। उन्होंने कहा कि हनुमान जी गुणों की खान, शास्त्रों ज्ञाता और महाबली थे लेकिन फिर भी अवसर के अनुसार छोटा बनने में संकोच नहीं करते थे। यहीं उनके चरित्र की विशेषता है। महाराज श्री ने कहा कि यदि शक्तिशाली बनना है तो झुकना भी सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सुख आने पर भूलना नहीं चाहिए और दुख में तड़पना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा सुनने से सब कुछ प्राप्त होता है बोलने वाले सोचते हैं हम सब जानते हैं लेकिन सुनने वाला भी बहुत ज्ञानी होता है। गुरू वो सुनाता है जो आपके लिए अच्छा होता है। परमात्मा वो करता है जो आपके लिए अच्छा होता है। इससे पूर्व श्री सनातन धर्म संगठन के सदस्यों द्वारा सुन्दरकाण्ड का पाठ भी किया गया। मंच संचालन कैलाश नारंग ने किया। इस अवसर पर किशन लखीना, रामनारायण तनेजा, तिलक राज सेठी, सनातन धर्म संगठन के प्रधान कृष्ण रेवड़ी, वेद प्रकाश शर्मा, अशोक नारंग, डॉ. रमेश चुघ, शैंकी सेठी, राजेश लखीना, अनिल रेवड़ी, अशोक कुमार रेवड़ी, कृष्ण चुघ, सतीश रेवड़ी, पंकज नारंग, पुजारी प्रेम चन्द शर्मा, हरे कृष्ण जोशी आदि उपस्थित थे। कार्यक्रम के समापन पर पश्चात भण्डारे का आयोजन किया गया।

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