बड़ौली और आसन गांव में बनेंगे पराली कॉलेक्शन सेंटर
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किया दोनों साइट का अवलोकन. अब किसानों के लिए आय का साधन बनेगी पराली: डॉ वजीर
BOL PANIPAT , 9 अगस्त। पानीपत रिफाइनरी में नवनिर्मित 2जी एथेनॉल प्लांट में पराली से एथेनॉल बनेगा। इसलिए अब किसानों को अपनी पराली जलाने की नौबत नहीं आएगी और पराली किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया भी बनेगी। जिलेभर में कृषि विभाग के माध्यम से स्थापित कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) द्वारा किसानों के खेत से पराली खरीदी जाएगी और वहां से बेलर मशीन द्वारा पराली की गांठें बनाकर कलेक्शन सेंटर पर भेजी जाएंगी। इनमें एक कलेक्शन सेंटर गांव बड़ौली व गांजबड़ की साइट पर और एक गांव आसन कलां की साइट पर स्थापित होगा।
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग पानीपत के उप निदेशक डॉ. वजीर सिंह व अन्य अधिकारियों ने मंगलवार को दोनों साइटों का अवलोकन किया। बता दें कि पराली से एथेनॉल बनाने वाले 2जी एथनॉल प्लांट पानीपत रिफाइनरी में बनकर तैयार हो चुका है जिसका उद्घाटन बुधवार 10 अगस्त को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा वीसी के माध्यम से किया जाएगा। इस प्लांट को पराली उपलब्ध करवाने हेतु कृषि विभाग भी तत्पर हो गया है। चूंकि बड़े पैमाने पर पराली जलाने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए राज्य व केंद्र सरकार पिछले कई साल से लगातार प्रयासरत हैं और इसी कड़ी में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किसानों को सीएचसी स्थापना व व्यक्तिगत कृषि यंत्रों पर भारी अनुदान भी दिया जा रहा है। उप कृषि निदेशक डॉ. वजीर सिंह, सहायक कृषि अभियंता सुधीर कुमार व खंड कृषि अधिकारी सेवा सिंह की टीम ने आज दोनों साइटों का मौके पर पहुंचकर अवलोकन किया।
डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि पानीपत सहित आसपास के जिले करनाल, कुरूक्षेत्र व कैथल में बड़ी मात्रा में धान का उत्पादन किया जाता है। ऐसे में पराली का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती है। अकेले पानीपत में ही 3.80 लाख टन पराली का उत्पादन प्रतिवर्ष होता है। उन्होंने बताया कि जिले में 30 सीएचसी पर बेलर मशीन उपलब्ध है और तीन व्यक्तिगत बेलर हैं। इन सभी के द्वारा किसानों से पराली खरीद करने उपरांत कलेक्शन सेंटर पर भेजी जाएगी जहां से पराली की गांठों को आसानी से एथेनॉल प्लांट में पहुंचाया जाएगा।

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