Wednesday, June 3, 2026
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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पी.एम.एफ.वी.वाई) का राज्य सरकार द्वारा खरीफ  2023 व रबी 2023-24 के लिए नोटिफिकेशन जारी. फसल बीमा करवाने की अन्तिम तिथि 31 जुलाई

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at July 27, 2023 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT : 27 जुलाई। किसानों को प्राकृतिक जोखिम से सुरक्षा देने के लिए सुरक्षा कवच के रूप में लागू की गई एक महत्वकांक्षी योजनाए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना(पी.एम.एफ.वी.वाई) का राज्य सरकार द्वारा खरीफ  2023 व रबी 2023-24 के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। फसल बीमा करवाने की अन्तिम तिथि 31 जुलाई है।            
       उप कृषि निदेशक, डा0 वजीर सिहॅ ने बताया कि यह स्कीम ऋणी व गैर ऋणी दोनों श्रेणियों के लिए वैकल्पिक है। ऐसे किसान जिन्होने किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से बकों से फसली ऋणी ले रखा है उनका फसल बीमा सम्बन्धित बैक द्वारा कर दिया जायेगा। डा0 वजीर सिहॅं ने आगे बताया कि जो किसान इस स्कीम में शामिल नही होना चाहते, उन्हें 31 जुलाई से पहले सम्बन्धित बैक को लिखित में देना होगा कि वे स्कीम में शामिल नही होना चाहते है और बैक ऐसे किसानों को बीमा नही करेगा, वरना बैक की मार्गदर्शीका के अनुसार किसानों का बीमा करने को वाध्य होगा।  
उन्होंने बताया कि गैर ऋणी किसान अपना बीमा कॉमन सर्विस सैन्टर या बैक से करवा सकते है। गैर ऋणी किसानों को बीमा करवाते समय जमीन की फरद की कापी जिसमें किसान का हिस्सा स्पष्ट रूप से अकिंत होगा, बैक की पास बुक, आधार कार्ड की प्रति, टेनेंट किसान की स्थिति में जमीन मालिक के साथ किया गया ईकरारनामा और फसल बुवाई का प्रमाण पत्र साथ में लगाना अनिवार्य है। गैर ऋणी किसान उपरोक्त सभी दस्तावेजों की साफ-2 कापी लेकर अटल सेवा केन्द्र पर जाए ताकि बीमा कम्पनी उपयुक्त दस्तावेजों के आभाव में बीमा को निरस्त न कर सकें। इसके अलावा जिन किसानों ने के0सी0सी0 ऋण के दौरान बताई गई फसल से अन्य कोई फसल खेत में लगाई है तो इसकी सूचना किसान को सम्बन्धित बैक में प्रिमियम काटे जाने की अन्तिम तिथि से दो दिन पूर्व लिखित में देना होगा। ताकि बैक द्वारा किसान की सही फसल का बीमा किया जा सकें और प्राकृतिक आपदा से नुकसान की स्थिति में बीमा कलेम लेने में कोई समस्या न आए।
प्रधामंत्री फसल बीमा योजना के बारे में बताते हुए सहायक साख्यिकी अधिकारी हरबंस सिहॅंमार ने बताया कि फसल बीमा योजना के तहत तीन तरह के जौखिम को शामिल किया गया है। स्थानीय आपदा जैसे औलावृष्टि, जलभराव और बादल फटने की स्थिति में हुए फसल नुकसान के लिए किसान भाईयों को स्थानीय आपदा घटित होने के 72 घन्टे के अन्दर-2 उप कृषि निदेशक, कार्यालय पानीपत को लिखित में सूचित करना होगा। सर्वे कमेटी में बीमा कम्पनी, कृषि विभाग के साथ-2 किसान भी एक सदस्य है। यदि किसी किसान को संचालित किए गए स्थानीय आपदा सर्वे पर कोई एतराज है तो उसे छह दिन के अन्दर-2 एक लिखित एतराज उप कृषि निदेशक के कार्यालय में देना होगा। इसके बाद गठित की गई कमेटी द्वारा उस खेत का पुनरू सर्वे किया जायेगा और कमेटी का यह निर्णय अन्तिम होगा। जल पोषित फसल जैसे गन्ना और धान के लिए स्थानीय आपदा की स्थिति में व्यक्तिग स्तर पर सर्वे नही होगा और न ही धान के लिए स्थानीय आपदा सर्वे के आवेदन स्वीकार होगें।
सहायक साख्यिकी अधिकारी ने बताया कि फसल कटाई उपरांत भी यदि फसल को छोटे-2 बण्डल में बाधकर सुखने के लिए रखा है तथा औलावृष्टि, चक्रवार्तिय वर्षा व बे मौसमी बारिश से होने वाले नुकसान का मुआवजा लेने की स्थिति में भी किसान को व्यक्गित रूप से आवेदन उप कृषि निदेशक कार्यालय में आपदा गटित होने के 72 घण्टे के अन्दर-2 देना होगा। तीसरे तरह के नुकसान का आकलंन प्रत्येक राजस्व गांव में सभी नोटिफाई फसलों पर चार-चार फसल कटाई प्रयोग संचालित करने उपरांत औसत पैदावार को थ्रैसोल्ड उपज के साथ तुलनात्मक अध्ययन से निर्धारित होगा।

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