परम संत कृपाल सिंह जी महाराज ने सभी में प्रभु की ज्योति को देखा : संत राजिन्दर सिंह जी महाराज
BOL PANIPAT : सावन कृपाल रूहानी मिशन के प्रमुख संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने परम संत कृपाल सिंह जी महाराज (6 फरवरी, 1894 – 21 अगस्त, 1974) के 128वें प्रकाश दिवस के अवसर पर अपना पावन संदेश समस्त मानवजाति को दिया।
शिकागो, अमेरिका से यू-ट्यूब पर प्रसारित अपने पावन संदेश में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि, “परम संत कृपाल सिंह जी महाराज चाहते थे कि हम सिर्फ एक अच्छा इंसान ही नहीं बल्कि हम एक सच्चा इंसान बनें। वो हमेशा कहा करते थे कि यदि एक बार हम सच्चा इंसान बन जाएं तो पिता-परमेश्वर को पाना कोई मुश्किल कार्य नहीं।”
इस ऑन लाईन कार्यक्रम की शुरूआत में पूजनीया माता रीटा जी ने गुरु अर्जन देव जी महाराज की वाणी से ‘कर किरपा कृपाल आपे बक्श ले’ शब्द का गायन किया।
परम संत कृपाल सिंह जी महाराज की शिक्षाओं को याद करते हुए संत राजिन्दर सिंह जी महाराज ने कहा कि, ”उनका बहुत ही साधारण सा संदेश, “भले बनो, भला करो और एक हो जाओ” हमारे सामने एक उदाहरण है जिसके ऊपर हम अपनी ज़िंदगी बना सकते हैं। उन्होंने प्रत्येक मनुष्य के अंदर प्रभु की ज्योति को देखा और यही तालीम वो हम सबको देने के लिए आए थे। उनका आध्यात्मिक कार्यकाल सन् 1948 से 1974 तक रहा।
परम संत कृपाल सिंह जी महाराज के रूहानी कार्य को दयाल पुरुष संत दर्शन सिंह जी महाराज (14 सितंबर, 1921 से 30 मई, 1989) ने आगे बढ़ाया और वर्तमान में संत राजिन्दर सिंह जी महाराज विश्वभर में परम संत कृपाल सिंह जी महाराज द्वारा शुरू किए गए रूहानियत के कार्य को बड़ी ही तेजी से फैला रहे हैं।
संत राजिन्दर सिंह जी महाराज अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त आध्यात्मिक गुरु हैं जोकि संपूर्ण विश्वभर में ध्यान-अभ्यास के ़जरिये अंतरीय और बाह्य शांति लाने के लिए प्रयासरत हैं। वे ध्यान-अभ्यास विषय पर लिखी जाने वाली पुस्तकों के विश्व प्रसिद्ध लेखक भी हैं। जिसके लिए उन्हें विभिन्न देशों द्वारा अनेक शांति पुरस्कारों के साथ-साथ पाँच डॉक्टरेट की उपाधियों से भी सम्मानित किया जा चुका है।
सावन कृपाल रूहानी मिशन के आज संपूर्ण विश्व में 3200 से अधिक केन्द्र स्थापित हैं तथा मिशन का साहित्य विश्व की 55 से अधिक भाषाओं में प्रकाशित हो चुका है। इसका मुख्यालय विजय नगर, दिल्ली में है तथा अंतर्राष्ट्रीय मुख्यालय नेपरविले, अमेरिका में स्थित है।

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