लोग बहुत उंची वाणी बोलते है लेकिन जानते नहीं है : स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज
BOL PANIPAT : श्री संत द्वारा हरि मन्दिर, निकट सेठी चौक, पानीपत के प्रांगण में नव विक्रमी सम्वत 2081 के उपलक्ष्य के अवसर पर परम पूज्य 1008 स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज (मुरथल वाले) की अध्यक्षता में सप्ताह भर चलने वाले संत समागम कार्यक्रम के पांचवें दिन महाराज श्री ने प्रवचन करते हुए कहा कि एक फ़क़ीर आधा कलमा पड़ता था जिसकी शिकायत लोगों ने उस समय के बादशाह को की। बादशाह ने इसे जुर्म माना और उसे अदालत में बुलाकर उसे फांसी की सजा दे दी। फांसी वाले दिन बहुत से लोग उसे देखने आए। लोगों ने कहा कि तू पूरा कलमा नहीं बोलता इसलिए तुझे इसकी सजा मिल रही है, तू ऐसा क्यों करता था। तब उस फ़क़ीर ने कहा कि जब तक मैं ईश्वर को जानंूगा नहीं तब तक आधा ही बोलूंगा। जब जल्लाद ने फ़क़ीर का सर कलम किया तो कटी गर्दन ने पूरा कलमा बोलना शुरू किया। मजदूर ने कहा कि अब मैंने मालिक को पा लिया है। महाराज जी ने कहा कि लोग बहुत उंची वाणी बोलते है लेकिन जानते नहीं है। गुरू नानक देव जी ने भी कहा है कि ईश्वर अल्लाह नूर उपाया कुदरत दे सब बन्दे एक नूर ते सब जग उपज्या कौन भले कौन मंदे। लेकिन जब तक हम यह जानेंगे नहीं तब तक हम अज्ञान में ही रहेंगे। प्रसिद्ध भजन गायक वेद कमल जी ने ‘दिल मेरा सतगुरू तैनूं रोज ही बुलाव, पता नहीं तू केहिं गल्लों दरश न दिखावे।’ गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इस अवसर पर ब्रह्मऋषि श्री नाथ जी महाराज, रमेश चुघ प्रधान, हरनाम चुघ, उत्तम आहूजा, ईश्वर लाल रामदेव, किशोर रामदेव, दर्शन रामदेव, कर्म सिंह रामदेव,अमरजीत सपड़ा, महेन्द्र चुघ, गोल्डी बांगा, अमर वधवा, सुरेन्द्र जुनेजा, ओमी चुघ, अमन रामदेव, हरनारायण जुनेजा, गुलशन नन्दवानी, श्याम लाल सपड़ा, सोनू खुराना, गोपी मेंहदीरत्ता गुलशन रामदेव, आत्म खुराना, जगदीश जुनेजा, राघव चुघ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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