एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के खिलाडी ने आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी पेनचाक सिलाट चैंपियनशिप 2026 में झटका गोल्ड मैडल
-इंटरनेशनल लेवल टूर्नामेंट मोस्को कप के लिए हुआ चयन
-महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक को हरा किया मैडल पर कब्ज़ा
-पेनचाक सिलाट में सफलता का राज़ लचीलेपन, सजगता और ताकत में छिपा है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 16 मार्च, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत के खिलाडी ने आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी पेनचाक सिलाट चैंपियनशिप 2026 में गोल्ड मैडल झटक कर कॉलेज और जिले का मान बढाया । आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी विश्वविद्यालयों के स्तर पर देश का सबसे बड़ा टूर्नामेंट है । प्रशांत ने 92-95 किलोग्राम भारवर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया। इस चैंपियनशिप का आयोजन महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी रोहतक में हुआ । प्रशांत का कॉलेज पहुँचने पर स्वागत एसडी पीजी कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, शारीरिक शिक्षा विभागाध्यक्ष डॉ सुशीला बेनीवाल, प्रो नीलम, प्रो. पूजा, प्रो आनंद, प्रो अंकुश मलिक और अन्य प्राध्यापकों ने किया । प्रशांत ने इससे पहले भी राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तरीय और इंटर कॉलेज टूर्नामेंट्स में शानदार प्रदर्शन के दम पर अपनी प्रतिभा का लोहा मानवता रहा है । प्रशांत पिछले पांच साल से गोल्ड मेडलिस्ट रहा है । तीन बार आल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी मेडलिस्ट रहा है ।
कॉलेज प्रधान दिनेश गोयल ने अपने सन्देश में कहा कि खेलों में भाग लेने के हमें अनेकों फायदे मिलते है । इससे हमारा रूप और व्यक्तित्व बनता और निखरता है । खेल के मैदान और मुकाबले में हर खिलाड़ी यदि लगन के साथ भाग ले तो जीत अवश्य मिलती है । माता-पिता आज भी चाहतें हैं कि उनका बेटा या बेटी खिलाड़ी की जगह डाक्टर-इंजिनियर बने परन्तु इन खिलाड़ियों ने खेल के महत्व को समाज में स्थापित किया है । कॉलेज ऐसे खिलाडियों का निरंतर मार्गदर्शन करता रहेगा । तनाव और अवसाद से भरी आज की आधुनिक जीवन शैली में खेल ही हमें स्वस्थ और तनाव मुक्त रख सकतें है ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने सभी खिलाड़ियों की भरपूर प्रशंसा की और कहा कि इन खिलाड़ीयों की उपलब्धि अत्यंत गौरवपूर्ण है । इनकी जीत से न सिर्फ ये सभी खिलाड़ी जीवन में सफलता की सीढियां चढ़ेंगे बल्कि इनसे दूसरे विद्यार्थियों को भी भरपूर प्रेरणा मिलेगी । इंटर-कॉलेज चैंपियनशिप एक प्रतिष्ठित प्रतियोगिता है और इसमें भाग लेना मात्र ही हर खिलाड़ी का स्वप्न होता है । प्रशांत ने मैडल प्राप्त कर के एक नई बुलंदी को छुआ है । अब प्रशांत जल्द अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करे यही उनकी कामना है । पेनचाक सिलाट में शामिल खेल लचीलेपन, सजगता, ताकत, धीरज और चपलता की मांग करते है ।
डॉ सुशीला बेनीवाल ने कहा कि पेनचाक सिलाट शब्दावली का इस्तेमाल 1950 के दशक में इंडोनेशियाई आजादी के बाद आम प्रचलन में आया । यह कई तरह के मार्शल आर्ट्स के लिए सामान्य रूप से प्रयोग होने वाला शब्द है । यह पूर्ण रूप से शारीरिक युद्ध है जिसमें हमला, उठापटक, फेंकने के अलावा हथियारों का प्रयोग भी शामिल रहता है । पेनचाक सिलाट में शरीर के हर हिस्से का उपयोग किया जाता है और यह हमले के अधीन होता है । इसका अभ्यास न केवल शारीरिक रक्षा के लिए बल्कि मनोवैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए भी किया जाता है ।
इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में प्रो. प्रवीण आर. खेरडे, डॉ. संगीता गुप्ता, प्रोफ. नीलम, प्रो. पूजा, प्रोफ. आनंद, कोच अंकुश, दीपक मित्तल आदि मौजूद रहे।

Comments