साधु वह है जो ऊपर वाले की मर्जी पर चलता है : स्वामी दयानन्द सरस्वती
BOL PANIPAT : (27 मार्च) सनातन धर्म सभा मंदिर भीम गोडा वार्ड नं. 9 में श्री राम नवमी के उपलक्ष्य में पांच दिवसीय कथा कार्यक्रम के दूसरे दिन स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि भए प्रगट कृपाला दीन दयाला का प्रागट्य हमारे अन्दर होना चाहिए। एक होता है दर्शन और प्रदर्शन यदि हमारा नाम जप दर्शन हो गया तो फिर रामनवमी होगी यदि कीर्तन प्रदर्शन गया तो फिर हम झोली फैलाकर खड़े रहेंगे। महाराज श्री ने गरूड़ के मोह पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वो प्रभु श्री राम को पाश में बंधा हुआ देखकर भ्रमित हो जाते हैं एवं उनकी इस लीला से उनमें सर्वशक्तिमान परमात्मा पर संदेह होने लगता है। इस भ्रम को लेकर वे परम विरक्त कागभुशुण्डि जी के पास जाते हैं जो उन्हें इस मोहपाश को अपने ज्ञान के द्वारा दूर करते हैं। महाराज श्री ने साधु की निशानियां बताते हुए कहा कि साधु वह है जो ऊपर वाले की मर्जी पर चलता है उसकी खुद की मर्जी नहीं होती। उन्होंने कहा कि साधु सच्चा साधु तब बनता है जब उसके मन एवं दिमाग में सभी द्वन्द्व समाप्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जिसे ज्ञान चाहिए उसके लिए झुकना जरूरी है और जो झुकना नहीं जानता वह साधु की शरण तक नहीं जा सकता। महाराजा श्री ने कागभुशुण्डि और गरूड़ संवाद की कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि दरिद्रता जरूरी नहीं कि पैसे की हो बल्कि असली दरिद्र वह है जिसके पास ज्ञान की भूख या सीखने की इच्छा न हो। ऐसा व्यक्ति धनवान होते हुए भी दरिद्र है। दूसरा है अच्छी वाणी का न होना आपके पास आलीशान मकान है बढ़िया कारोबार है लेकिन वाणी कड़वी है तो आप सब कुछ होते हुए भी महादरिद्र हैं। इसलिए हमें बोलते समय ध्यान रखना चाहिए।
इससे पूर्व मुख्य अतिथि गजेन्द्र सलूजा ने दीप प्रज्ज्वलित कर कथा का शुभारंभ किया। तत्पश्चात किशोरी कृपा संकीर्तन मण्डल से पधार नरेश सहगल ने ‘आओ सखी मंगल गाओ री, मोहे काला टीका लगाओ री’’, ‘‘’बरसाना प्यारो बड़ा याद आए’’ आदि भजन गाकर वातावरण को भक्तिमय कर दिया। इस अवसर पर स्वामी अरूणदास जी महाराज विशेष रूप से जगन्नाथ धाम हरिद्वार से पधारे। जोगिंदर कमल, वेद कमल, जीत लाल जुनेजा, कालू सतीजा, चुनी लाल लखीना, दैवेन्द्र रामदेव, सोहन लाल रेवड़ी, सुरेन्द्र चुघ, चुन्नी लाल चुघ, विजय चौधरी, ईश जुनेजा, ओम प्रकाश रेवड़ी, पवन जुनेजा, गुरमीत मक्कड़, प्रदीप सपड़ा, सागर रेवड़ी, जितेंद्र जुनेजा, बाल किशन रेवड़ी, गौरव अरोड़ा, तरुण जुनेजा, निखिल चुघ, कुश जुनेजा, साहिल रामदेव, राजेन्द्र सलूजा, प्रेम चुघ, मिन्टू चुघ, चिमन सेठी, चन्द्र रामदेव, अमित रामदेव, रवि सचदेवा, स्वप्निल जुनेजा, साहिल वशिष्ट, अजय चुघ, सागर रेवड़ी, आदि उपस्थित थे।

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