एसडी पीजी कॉलेज गीता जयंती के शुभ अवसर पर गीता के तीन श्लोकों से गूंज उठा.
–गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के आह्वान पर सम्पूर्ण विश्व प्रात: 11 बजे ‘एक मिनट, एक साथ, गीता पाठ’ की मुहीम से जुड़ा
–गीता न केवल हिंदू धर्म का सार है, बल्कि मानव जीवन की समस्त समस्याओं का समाधान है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT , 23 दिसम्बर. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत गीता जयंती के शुभ अवसर पर गीता के तीन श्लोकों से गूंज उठा । गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के आह्वान पर सम्पूर्ण विश्व प्रात: 11 बजे ‘एक मिनट, एक साथ, गीता पाठ’ की मुहीम से जुड़ा और इस अवसर का लाभ कॉलेज प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने प्राध्यापकों के साथ मिलकर लिया एवं गीता के तीन श्लोकों का उच्चारण किया और इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बने । विदित रहे कि ‘एक मिनट, एक साथ, गीता पाठ’ के आयोजन को दुनिया भर में जो व्यक्ति जहां भी उपस्थित था उसने श्लोकों का उच्चारण वहीँ पर रहकर किया । भारत में भी इस आयोजन को पुरे जोश और उल्लास भाव के साथ मनाया गया । श्री कृष्ण कृपा जिओ गीता सेवा समिति पानीपत के मार्गदर्शन में इस मुहीम को कॉलेज में चलाया गया । प्राचार्य और प्राध्यापकों ने निम्नलिखित श्लोकों का मधुर स्वर में उच्चारण किया जो पहले, 9वें और 18वें अध्याय के क्रमशः पहला, 22वें और 78वें श्लोक है ।
धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः।
मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय । ।
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते ।
तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम् । ।
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम । ।
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि गीता जयंती पर गीता के तीन श्लोकों से पूरा देश गूँज उठा है । गीता पाठ के लिए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सानिध्य में चल रही श्री कृष्ण कृपा समिति व जीओ गीता परिवार ने पिछले 15 दिनों से इस आयोजन की तैयारियां की । समिति ने इस मुहीम में हर एक व्यक्ति को जो जहां पर भी है को गीता पाठ के लिए प्रेरित किया । बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग सहित सभी को इस मुहिम में जोड़ा गया और गीता जयंती के शुभ दिन सुबह ग्यारह बजे तीन श्लोकों का उच्चारण हुआ जिसमे गीता के पहले, मध्य व अंतिम श्लोक का मधुर उच्चारण हुआ । गीता न केवल हिंदू धर्म का सार है, बल्कि मानव जीवन की कई समस्याओं का निदान करने वाला पवित्र ग्रन्थ है । गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का विचार है कि गीता जयंती पर एक मिनट एक साथ गीता पाठ हो । इससे हम सभी में गीता पढने की ललक पैदा होगी और हमें जीवन की समस्याओं के निदान पाने में भी मदद मिलेगी । हर व्यक्ति विशेषतौर पर युवाओं को जीवन में एक बार गीता अवश्य पढनी चाहिए । गीता पर बोलते हुए उन्होनें कहा कि जो ज्ञानी पुरुष ज्ञान और कर्म को सम देखता है, उसी की सोच सही है । सही नजरिया रखने वाला व्यक्ति इच्छित फल की प्राप्ति कर लेता है। इसलिए व्यक्ति को ज्ञान और कर्म में समभाव बनाए रखना चाहिए । मन बहुत चंचल होता है और वह सदा यहां से वहां भटकता रहता है । अशांत मन को योग और ध्यान का नियमित अभ्यास कर वश में किया जा सकता है । गीता में लिखा है कि क्रोध भ्रम पैदा करता है और भ्रम से बुद्धि विचलित होती है । जब बुद्धि का विचलन हो जाता है तो तर्क करने की क्षमता भी क्षीण हो जाती है । जब मनुष्य में तर्क करने की क्षमता नहीं रह जाती तो वह पतन की ओर अग्रसर हो जाता है । इसलिए क्रोध से बचना चाहिए । मनुष्य जिस तरह सोचता है, उसी तरह का आचरण करता है । स्वयं के अंदर के विश्वास को जाग्रत कर सोच में बदलाव ला सकता है, जो उसके जीवन के लिए बेहतर होगा । बुद्धिमान व्यक्ति कर्म को प्रधान रखता है, वह उसके फल के बारे में कभी नहीं सोचता। किसी काम को करने का यही उत्तम और उचित साधन है ।
इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ एसके वर्मा, डॉ मुकेश पुनिया, प्रो संजय चोपड़ा, डॉ राकेश गर्ग, प्रो मयंक अरोड़ा, डॉ बलजिंदर सिंह, प्रो किरण मलिक, प्रो जुगमती, प्रो कविता, दीपक मित्तल, चिराग सिंगला आदि मौजूद रहे ।

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