Thursday, July 2, 2026
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हृदय रोग से पीड़ित मरीजों के लिए खास खबर।

By LALIT SHARMA , in HEALTH , at August 25, 2023 Tags: , , , , ,

अब बिना बाईपास सर्जरी,बिना एंजियोप्लास्टी, बिना ऑपरेशन ईईसीपी से हार्ट ब्लॉकेज का ट्रीटमेंट पानीपत में उपलब्ध।

– प्रचलित एंजियोप्लास्टी और बायपास से इलाज काफी सस्ता है ईईपीसी ट्रीटमेंट: डॉ राजीव कुमार

बोल पानीपत . पानीपत में अब हार्ट में हृदय की क्षमता बढ़ाने का ट्रीटमेंट होने लगा है। इसमें ना एंजियोप्लास्टी और ना ही बायपास सर्जरी की जाती है। ईईसीपी (एन्हांस एक्सटर्नल काउंटर पल्स) में अधिकतम 35 से 40 दिन के ट्रीटमेंट से हृदय के सारे बायपास रूट खोले जाते हैं। प्रचलित एंजियोप्लास्टी और बायपास की बजाय ईसीपी तकनीक से इलाज काफी सस्ता है व मरीज बिना ऑपरेशन,बिना रिस्क,बिना भर्ती हुए, बिना दर्द बिना कोई साइड इफेक्ट के अपने दिल का उपचार करवा सकता है।
श्री बालाजी मल्टी स्पेशलिटी अस्पताल के संस्थापक व कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि ब्लॉकेज की रिपोर्ट आते ही इस ट्रीटमेंट के द्वारा हृदय की क्षमता बढ़ाने का काम शुरू किया जाता है। इसमें प्राकृतिक तरीके से रक्त सप्लाई की मात्रा घटा-बढ़ाकर हृदय की क्षमता बढ़ाई जाती है। इसमें अधिकतम 30-35 दिन की सिटिंग में हृदय के सारे बायपास रूट खोल दिए जाते हैं।
वो सबकुछ जो नैचुरल बायपास में होता है।

ईईसीपी से छोटी धमनियां करते हैं सक्रिय :

हृदय की कोई बड़ी धमनी के ब्लॉकेज होने पर छोटी-छोटी कई धमनियां उसका काम संभालती है। बड़ी धमनी के ब्लॉकेज पर इन छोटी धमनियों को खोला जाता है। हृदय के रक्त प्रवाह को सामान्य रखा जाता है। इसे नैचुरल बायपास कहते हैं।

कैसे करती है मशीन कार्य:

इसमें मशीन से हाथ व पैरों में के उन भागों पर पट्टे बांधें जाते हैं जहां रक्त का स्टोरेज ज्यादा है। जब-जब सामान्य प्रक्रिया से रक्त हृदय तक पहुंचता है तब मशीन से दबाव बनाकर सामान्य से अधिक रक्त हृदय तक पहुंचाया जाता हैं। इससे हृदय की धमनियों की क्षमता बढ़ने लगती है।

किन मरीजों के लिए उपयोगी है ईईपीसी:

  1. मरीज हृदय रोग से पीड़ित हैं व एंजियो प्लास्टी वा बायपास सर्जरी से बचना चाहते हैं!
  2. वह मरीज जिनके शरीर एंजियों प्लास्टी या बाईपास के लिए फिट नहीं है।
  3. वह मरीज जिन्हे बाईपास सर्जरी या एंजियोप्लास्टी के बाद भी आराम नहीं आ रहा।
  4. वह मरीज जिन्हे पहले कभी हार्ट अटैक आया हो व जिन्हें चलने फिरने में दिक्कत हो। सांस फूलना या भारीपन महसूस हो।
  5. जिन्हें एंजाइना, हाई ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन, शुगर व सांस फूलने की दिक्कत हो।
  6. जिनके हृदय की पंपिंग पावर कम हो चुकी है।

डॉ राजीव कुमार ने बताया कि ईईपीसी थेरेपी एफडीए द्वारा अनुमोदित है। थेरेपी के पश्चात मरीजों के स्वास्थ्य में काफी सुधार आता है। जहां एक और एंजियोप्लास्टी व बाईपास सर्जरी में रक्त वाहक नसों में जमें वसा को नहीं हटाया जाता वहीं ईईपीसी थेरेपी के द्वारा नसों में जमी वसा भी हट जाती है। एक बार ट्रीटमेंट पूरी होने के पश्चात हार्ट अटैक या हार्ट फेल होने का खतरा टल जाता है।

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