पीएम स्वनिधि योजना से पथ विक्रेताओं को मिलेगा आत्मनिर्भरता का संबल: अतिरिक्त उपायुक्त एवं निगम आयुक्त डॉ.पंकज यादव
-ऋण अवधि 31 मार्च तक बढ़ी
BOL PANIPAT , 13 जनवरी। प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के तहत शहरी पथ विक्रेताओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में केंद्र सरकार द्वारा एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा पीएम स्वनिधि पुनर्गठित योजना की ऋण अवधि को बढ़ाकर अब 31 मार्च 2030 तक कर दिया गया है। इस निर्णय से जिले के हजारों पथ विक्रेताओं, रेहड़ी-फेरी वालों को सीधा लाभ मिलेगा।
अतिरिक्त उपायुक्त एवं निगम आयुक्त डॉ पंकज यादव ने बताया कि यह योजना लॉकडाउन से प्रभावित शहरी पथ विक्रेताओं को पुन: अपनी आजीविका एवं रोजगार प्रारंभ करने के उद्देश्य से लागू की गई थी। योजना के अंतर्गत प्रदेश के समस्त नगर निकायों में कार्यरत पथ विक्रेताओं, रेहड़ी-फेरी वालों को लघु ब्याज आधारित अनुदान ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है। योजना के अंतर्गत वे सभी पथ विक्रेता पात्र हैं जो 24 मार्च 2020 या उससे पहले विक्रय गतिविधि कर रहे थे। इसके साथ ही शहरों में फेरी लगाने वाले, सडक़ किनारे सेवा प्रदान करने वाले विक्रेता, शहरी इलाकों के आसपास एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आकर नगर निकाय सीमा में विक्रय करने वाले पथ विक्रेता भी योजना का लाभ ले सकते हैं।
उन्होंने बताया कि पीएम स्वनिधि योजना के तहत लाभार्थियों को प्रारंभिक कार्य हेतु 15 हजार रुपए तक का पूंजीगत ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी वापसी एक वर्ष में 12 मासिक किस्तों के माध्यम से की जाती है। इस ऋण पर किसी भी प्रकार की बंधक या गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर या निर्धारित अवधि से पहले ऋण चुकाने पर 7 प्रतिशत की दर से ब्याज सब्सिडी का लाभ दिया जाता है। साथ ही डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए 1200 रुपए से 1600 रुपए तक की कैशबैक प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है।
विदित रहे कि योजना की विशेषता यह है कि प्रथम ऋण की समय पर वापसी करने वाले लाभार्थियों को द्वितीय चरण में 25,000 तथा तृतीय चरण में 50,000 तक का अधिक ऋण उपलब्ध कराया जाता है। द्वितीय चरण का ऋण पूर्ण करने के पश्चात लाभार्थी यूपीआई से जुड़े क्रेडिट कार्ड के माध्यम से भी क्रेडिट सुविधा के लिए पात्र होंगे। ऋण के लिए पात्रता की बात करें तो ऐसे पथ विक्रेता जिनके पास नगर निकाय द्वारा जारी विक्रेता प्रमाण पत्र अथवा पहचान पत्र है, वे योजना में शामिल हो सकते हैं।
इसके अतिरिक्त सर्वे सूची में शामिल लेकिन प्रमाण पत्र/पहचान पत्र जारी न होने वाले विक्रेता भी पात्र हैं। वहीं जो पथ विक्रेता सर्वेक्षण में छूट गए थे अथवा सर्वेक्षण पूर्ण होने के बाद विक्रय कार्य शुरू किया, उन्हें नगर निकाय या टाउन वेंडिंग कमेटी द्वारा जारी अनुशंसा पत्र के आधार पर लाभ दिया जाएगा। आसपास के विकास परिनगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों से आकर नगर निकाय की भौगोलिक सीमा के भीतर विक्रय करने वाले पथ विक्रेताओं को भी अनुशंसा पत्र के माध्यम से योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के अंतर्गत ऋण उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, सहकारी बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां एवं सूक्ष्म वित्त संस्थाएं शामिल हैं।
इस अवसर पर अतिरिक्त उपायुक्त एवं निगम आयुक्त डॉ. पकंज यादव ने कहा कि पीएम स्वनिधि योजना शहरी पथ विक्रेताओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रभावी पहल है। उन्होंने बताया कि बिना किसी गारंटी के ऋण, ब्याज सब्सिडी, डिजिटल लेन-देन पर प्रोत्साहन और चरणबद्ध रूप से अधिक ऋण की सुविधा इस योजना को आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य से जोड़ती है। ऋण अवधि को 2030 तक बढ़ाया जाना यह दर्शाता है कि सरकार पथ विक्रेताओं के दीर्घकालिक विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
डॉ. पंकज ने बताया कि नगर निगम पानीपत द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि पात्र प्रत्येक पथ विक्रेता तक योजना का लाभ पहुंचे। उन्होंने सभी पथ विक्रेताओं से अपील की कि वे योजना का लाभ लेने के लिए नगर परिषद या नगर निगम कार्यालय में संपर्क कर शीघ्र पंजीकरण कराएं। नगर निगम द्वारा जारी जानकारी के अनुसार इच्छुक पथ विक्रेता स्कीम का तत्काल लाभ लेने अथवा पंजीकरण के लिए नगर निगम/नगर परिषद कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

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