Wednesday, June 10, 2026
Newspaper and Magzine


फसल अवशेष प्रबंधन बंधन को लेकर कृषि विभाग ने कमर कसी

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at August 27, 2025 Tags: , , , , ,

-विभाग की टीमें गांव – गांव जाकर लोगों को करेंगे जागरूक

-किसी विभाग के उपनिदेशक ने ली स्टाफ के सदस्यों की महत्वपूर्ण बैठक

-पुरानी जलाने पर शिकंजा  कसेगा कृषि विभाग

BOL PANIPAT , 27 अगस्त। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की एक महत्वपूर्ण बैठक बुधवार को कृषि विज्ञान केंद्र उझा में उपायुक्त डॉक्टर विरेंदर कुमार दहिया के निर्देश पर उप कृषि निदेशक पानीपत डॉ. आत्मा राम गोदारा एवं उप मंडल कृषि अधिकारी, एसडी ओ.डॉ देवेंदर कुहाड़ की उपस्थिति में संपन्न हुई।
      डीडीए आत्मा राम ने बताया कि बैठक में फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर अपनी जिम्मेदारियों को निभाने पर जोर दिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य फसल अवशेष प्रबंधन  एवं फसल अवशेष जलाने की घटनाओं की रोकथाम करना प्रमुख रूप से रहा। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं फील्ड स्टाफ को दिशा-निर्देश दिए कि फील्ड स्तर पर किसानों को व्यक्तिगत सम्पर्क करें किसान सभाओं, चौपालों एवं ग्राम स्तर पर आयोजित बैठकों के माध्यम से पराली जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों के बारे में अवगत कराए।

डीडीए ने बताया कि किसानों को फसल अवशेष जलाने से पर्यावरण प्रदूषण अत्यधिक बढ़ता है, मिट्टी की उर्वरता एवं सूक्ष्मजीव नष्ट होते हैं, मानव एवं पशु स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है और वायु गुणवत्ता सूचकांक पर नकारात्मक असर पड़ता है। उन्होंने बताया कि जिले में किसी भी स्तर पर इससे संबंधित घटना दर्ज न हो, इसके लिए सभी फील्ड स्टाफ को जिम्मेदारी से कार्य करना होगा।जिला स्तर पर, उपमंडल स्तर पर, एव ग्राम स्तर पर, समिति का गठन होगा। इन समितियों का मुख्य कार्य निगरानी करना, किसानों को जागरूक करना एवं रोकधाम सुनिश्चित करना होगा। बैठक में डीडीए ने प्रत्येक कृषि अधिकारी एवं फील्ड स्टाफ को अपने-अपने क्षेत्र में नियमित भ्रमण कर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि कोई भी किसान फसल अवशेष न जलाए।

  कृषि उप मंडल अधिकारी डॉ देवेंदर कुहाड़ ने कहा कि यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि पानीपत जिले को एएफएल मुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि इस कार्य में विभाग सभी किसानो को जागरूक करेंगा। उन्होंने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन के वैकल्पिक उपाय अपनाएंगे तो पर्यावरण संरक्षण एवं सतत कृषि विकास दोनों संभव हो पाएंगे। उन्होंने  जिले के सभी किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने की प्रथा को छोडक़र आधुनिक एवं पर्यावरण हितैषी तकनीकों का उपयोग करें और आने वाली पीढिय़ों के लिए स्वच्छ वातावरण के निर्माण में सहयोग दें।

Comments