नशा मुक्त अभियान की टीम ने कुराड़ गांव में कराई कबड्डी प्रतियोगिता. 24 टीमों ने खिलाड़ियों ने दिखाया प्रतिभा का दमखम.
-नशे से दूर रहकर पढ़ाई के साथ खेलों में भविष्य बनाएं युवा: डीएसपी नरेंद्र सिंह
BOL PANIPAT , 26 दिसंबर : पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह आईपीएस के कुशल नेतृत्व में जिला पुलिस द्वारा युवाओं को नशे से दूर रखने व पढ़ाई के साथ खेलों में भविष्य बनाने की सोच के साथ गांवों में खेल प्रतियोगिता का आयोजन कराया जा रहा है। इसी कड़ी में जिला की नशा मुक्त टीम के सहयोग से गांव कुराड़ स्थित ऐकेडमी में शुक्रवार 26 दिसंबर को एक दिवसीय कबड्डी प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता में गांव कुराड़, निंबरी, गोला खेड़ा, पट्टीकल्याणा के साथ ही विभिन्न एकेडमी की 24 टीमों ने हिस्सा लिया।
नशा मुक्त अभियान के जिला नोडल अधिकारी डीएसपी नरेंद्र सिंह ने प्रतियोगिता का शुभारंभ किया। खेल प्रतियोगिता को लेकर युवाओं में उत्साह देखने को मिला और टीम के प्रत्येक खिलाड़ी ने पूरे जोश के साथ अपनी प्रतिभा का दमखम दिखाया।
डीएसपी नरेंद्र सिंह ने उपस्थित युवाओं व ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि खेल प्रतियोगिता का उद्देश्य गांव के युवाओं को प्रेरित कर खेल के मैदान में लाना है, ताकि वे अपराध और नशे से दूर रहें और अपने साथियों को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उनको अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक सही प्लेटफार्म की जरूरत होती है। युवा देश का भविष्य है, उनकी उर्जा को सही दिशा में लगाया जाए यह जरूरी है। इससे समाज व देश दोनों की तरक्की होगी।
उन्होंने कहा कि खेलकूद से सिर्फ मानसिक और शारीरिक विकास ही नहीं बल्कि जीवन में अनुशासन भी लाता है। युवा वर्ग नशे से दूर रहकर पढ़ाई के साथ खेलों में भविष्य सवारें।
डीएसपी नरेंद्र सिंह ने कहा कि पानीपत पुलिस ने जिले के प्रत्येक गांव को नशा मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। ताकि युवाओं को नशे की लत से बचाया जा सके। यह सब युवाओं की जागरूकता से ही संभव हो सकता है। आपके आसपास या क्षेत्र में कोई नशे का सेवन करता है या नशे की तस्करी करता है तो बिना डर व भय के पुलिस को सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान भी गुप्त रखी जाएगी।
इस दौरान टिंकू देशवाल सरपंच गांव कुराड, कपिल देशवाल, सुरेंद्र फौर, सोमवीर फौर, विकास रावल, योगेश कोच, जितेंद्र कोच, मुकुल, सौरभ, एएसआई जगपाल व काफी संख्या में ग्रामीण और युवा मातृशक्ति मौजूद रही।

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