केवल साइंस और टेक्नोलॉजी में ही भविष्य निर्मित नहीं होता. बल्कि इसके अलावा भी बहुत सारी विधाएं हैं : डॉ निशा
ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों का सर्वागीण विकास होगा
BOL PANIPAT : मतलौडा 26 सितंबर(कविता), डीएवी पब्लिक स्कूल थर्मल में सोमवार को लिटरेचर कॉन्क्लेव (साहित्य सम्मेलन) का आयोजन प्रबन्ध समिति के कोषाध्यक्ष एवं डीएवी पब्लिक स्कूल थर्मल के प्रबंधक नानकचन्द की अध्यक्षता में किया गया। समारोह में मुख्यातिथि के रूप में डॉ निशा पेशिन डायरेक्टर स्कूलस् एंड एकेडमिक विराजमान रही। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों का रुझान साहित्य की विभिन्न विधाओं के प्रति आकर्षित करना था। इस कार्यक्रम में अनेक शिक्षाविद, साहित्यकार नाटककार, लेखक आदि अलग-अलग क्षेत्रों से आए विद्वानों ने पैनलिस्ट की भूमिका अदा की। जिनमें एसोसिएट प्रोफेसर दिल्ली विश्वविद्यालय डॉ विनय विश्वास, नेशनल जर्नलिस्ट राजन कुमार अग्रवाल , डायरेक्टर थिएटर व स्क्रिप्ट राइटर सुरेन्द्र शर्मा , भूतपूर्व छात्र पुनीत गुगलानी लैड वोकल्स, (बैंड अर्ज) तरूणकुमार सामाजिक कार्यकर्ता व पब्लिक स्पीकर, अरुण फिलोक परफॉर्मर एंटरटेनर (बैंड अर्ज) विराजमान रहे।कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथिदेवो भव की परम्परा के अनुसार प्रधानाचार्य रितु दिलबागी ने आगन्तुक सभी अतिथियों विद्वज्जनों का स्वागत किया। उन्होंने अपने वक्तव्यों के माध्यम से बच्चों को बताया कि जिन्दगी में केवल तकनीकी विज्ञान ही हमें रोजगार नहीं दिलाते। बल्कि साहित्य, संगीत, कला आदि विधाओं में भी हम बहुत आगे तक जा सकते हैं।
समारोह में पधारे विद्वानों ने बच्चों की रूची लेखन, पठन, नाटक, मंचन गायन आदि विधाओं की तरफ प्रेरित करने के लिए विद्वानों व छात्रों के बीच में मध्यस्थता करते हुए कुसुम जागड़ा ने अंग्रेजी में तथा डॉ सत्यवीर सिंह ने हिन्दी में सवाल जवाब किए।

जिनके विषय रहे साहित्य में अपना भविष्य कैसे बनाएं, साहित्य की शक्ति, बच्चों में पुस्तकों के प्रति प्रेम कैसे जगाएं। इस कार्यक्रम से छात्रों के मन में बहुत से सवाल उत्पन्न हुए। इसके लिए एक खुले मंच का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों, अभिभावकों व अध्यापकों ने प्रश्नोत्तर के माध्यम से अपनी जिज्ञासाएं शान्त की। क्योंकि गायन, मंचन, पठन आदि सब साहित्य का ही भाग होते हैं। उनका प्रदर्शन करने के लिए विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने स्वागत नृत्य, माइम (मौन अभिव्यक्ति मंचन) के माध्यम से आजादी की लड़ाई का विस्तृत वर्णन किया। जिसे देखकर दर्शकगण बहुत प्रभावित हुए। इस कार्यक्रम के माध्यम से ही विद्यालय के भूतपूर्व छात्रों को आमंत्रित किया गया। जिन्होंने अलग-अलग विधाओं में अपना करियर बनाया हुआ है। उन्हें देखकर छात्रों को और अधिक प्रोत्साहन व प्रेरणा मिली।
मैनेजर नानकचंद ने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब इन्ही श्रोताओं में से कोई छात्र कुमार विश्वास, हरिओम पंवार आदि सिद्ध होंगे व फिल्मकार कवि नाटककार आदि के रूप में हमारे सामने होंगे। समारोह की मुख्यातिथि डॉ निशा पेशिन ने इस कार्यक्रम को विद्यालय स्तर पर हरियाणा में एक अनूठी पहल बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों में साहित्य के प्रति विशेष जागृति उत्पन्न की गई। आज के समय में बच्चे अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या के अतिरिक्त समय को मोबाइल लैपटॉप पर बिताते हैं। लेकिन इस कार्यक्रम के माध्यम से अपनी पसंद का साहित्य पढने के लिए प्रेरित किया गया। साहित्य की बहुत सारी विधाएं है। जिनमें गद्य, पद्य, नाटक, एकांकी आदि अपनी अपनी पसंद के अनुसार हम चुने और उसे समय देने की आदत का विकास करें। इससे छात्र – छात्राओं की प्रतिभा में निखार आएगा।

Comments