Monday, April 27, 2026
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साइंस लैब में प्रैक्टिकल के दौरान सल्फ्यूरिक एसिड का जार टूटने से फैली गैस. एक छात्रा की हालत गंभीर।


BOL PANIPAT : पानीपत जीटी रोड पर लाल बत्ती के पास स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में केमिस्ट्री प्रेक्टिकल के दौरान हादसा हो गया है। साइंस लैब में प्रदर्शनी के दौरान प्रेक्टिकल कर रही एक  छात्रा के फेफड़ों व स्वास नली में  सल्फ्यूरिक एसिड के वाष्प जाने से छात्रा की तबियत खराब हो गई। अधिक मात्रा में एसिड के वाष्प सांस लेते हुए उसके शरीर में चले गए जिसकी वजह से उसके गले व छाती में जलन व बार -बार खांसी आ रही थी।  स्कूल में फर्स्ट ऐड देने के पश्चात  छात्रा को उपचार के लिए सामान्य अस्पताल लाया गया । जहां करीब आधा घंटा उपचार के बाद उसे रोहतक PGI रेफर कर दिया गया।

मिली जानकारी के अनुसार, राजकीय मॉडल संस्कृति स्कूल में साइंस प्रदर्शनी थी। 11वीं के छात्र दूसरे लेक्चर के दौरान साइंस लैब में गए। 4-4 के ग्रुप में बच्चे प्रेक्टिकल कर रहे थे। इसी दौरान वहां बच्चों ने लैब में रखे केमिकल से कुछ प्रयोग करना शुरू किया। प्रयोग के दौरान अचानक सल्फ्यूरिक एसिड का जार हाथ से छूटने की वजह से जार जमीन पर गिर कर टूट गया व सल्फ्यूरिक एसिड के वाष्प की गंध पूरी लैब में फ़ैल गयी। गंध फैलते ही बच्चों को खांसी होने लगी। एक छात्रा तनिषा को अत्याधिक खांसी होने लगी।

बच्चों ने तुरंत इस बारे में लैब इंचार्ज को बताया। उन्होंने सभी छात्राओं को लैब से बाहर निकाला। तनीषा को  स्कूल में फर्स्ट ऐड दिया गया। पानी पिलाया गया।  उसे बिना देरी किए सिविल अस्पताल ले जाया गया। जहां आधा घंटा डॉक्टरों ने इलाज किया, अपनी निगरानी में रखा। उसके बाद छात्रा को  रोहतक PGI रेफर कर दिया गया।

वहीं सरकारी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में बच्ची का इलाज करने वाले डॉक्टर अंकुश कुंडू ने बताया कि साइंस लैब में प्रयोग करते वक्त सल्फ्यूरिक एसिड नीचे गिर गया व उसके वाष्प हवा में फ़ैल गए।छात्रा के शरीर ने उस गैस को बहुत ज्यादा सोख लिया, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। छात्रा के गले में जलन और सांस में लेने में दिक्कत थी। इसी दिक्कत को देखते हुए उसे रोहतक PGI रेफर किया गया। उन्होंने बताया कि किसी भी एसिड के वाष्प नाक, श्वास नली व फेफड़ों में चले जाएँ तो जलन व सांस लेने में दिक्क्त हो जाती है। उन्होंने बताया कि लैब में प्रेक्टिकल के वक्त बच्चों को विशेष सावधानियां बरतनी चाहिए।  गनीमत यह रही कि एसिड का जार टूटने के समय एसिड के कण किसी भी छात्रा के चेहरे या आँख तक नहीं पहुंचे वरना बड़ा हादसा भी पेश आ सकता था। 

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