जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने दुष्कर्म पीड़ित मामले में सुनाया फैसला,पीडि़ता को न्याय सर्वोपरि।
पोक्सो अधिनियम के अंतर्गत दुष्कर्म पीड़ित को मिला 5 लाख का मुआवजा।
किशोर आरोपी को सुधारात्मक अवसर, 6 महीने का प्रोबेशन पीरियड, किशोर को विभिन्न धाराओं के तहत विगत में 2 साल से ज्यादा रखा जा चुका है जेल में।
BOL PANIPAT : 14 सितंबर। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, पानीपत द्वारा पोक्सो अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में पीडि़ता के साथ न्याय सुनिश्चित करते हुए किशोर को सुधार एवं पुनर्वास का अवसर प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
उक्त मामला सेक्टर 29 थाना में विगत मई 2024 से संबंधित है। इस मामले में धारा 363, 66, 376 (2 एम)और 6 पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसमें एक नाबालिक लडक़ा एक लडक़ी को भगा कर ले गया था। जब उसके परिजनों ने उसकी गुमशुदा होने की एफआईआर दर्ज कराई तो पुलिस ने उसे बाद में बरामद किया। बरामद होने के बाद उस बच्ची ने अपने साथ दुष्कर्म होने की गवाही दी। बाद में कोर्ट में भी मां-बाप ने और पीडि़ता ने गवाही दी। जिस पर बाद में जांच की गई और मेडिकल इत्यादि में इस चीज की पुष्टि की गई कि इस लडक़े द्वारा उसे लडक़ी का रेप किया गया था और जो बाद में गर्भवती भी हो गई थी। इस मामले में माननीय न्यायालय द्वारा गर्भपात करने की मंजूरी भी दी गई थी।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट जस्टिस पुनित लिंबा ने जानकारी देते हुए बताया कि उक्त पीडि़ता को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने हाल ही में 3 लाख का मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। इससे पूर्व में भी जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड द्वारा पीडि़ता को 2 लाख का मुआवजा प्रदान किया गया था। कुल मिलाकर पीडि़ता को 5 लाख रुपये मुआवजा प्रदान किया गया है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने पीडि़ता के हितों, उसकी गोपनीयता, सुरक्षा और गरिमा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। माननीय बोर्ड के निर्देशानुसार पीडि़ता को नियमानुसार क्षतिपूर्ति, काउंसलिंग और निरंतर सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पीडि़ता की पहचान उजागर न करने के संबंध में पोक्सो अधिनियम के तहत कड़ाई से पालन किया जाएगा।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने माना कि आरोपी किशोर में सुधार की संभावना है। दंडात्मक दृष्टिकोण के स्थान पर सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए किशोर को 6 महीने की शर्त पर प्रोबेशन पीरियड पर भेज दिया गया है क्योंकि उक्त आरोपी नाबालिक ने 2 साल से ज्यादा का समय जेल में बिताया है।
जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अपने आदेशों में कहा है कि इस प्रकार के निर्णय का उद्देश्य न केवल अपराध पर रोक लगाना है, बल्कि किशोर को समाज की मुख्यधारा से जोडक़र एक जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। इसका उद्देश्य पीडि़ता की पुनर्स्थापना करना भी है ताकि वह समाज में सम्मान के साथ रह सके और एक अच्छी नागरिक बन सके। उन्होंने आमजन से अपील की है कि पोक्सो अधिनियम से संबंधित किसी भी मामले में पीडि़त की पहचान उजागर न करें और बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूक रहें।

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