Sunday, April 19, 2026
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प्रभु अपने भक्त के अंहकार का  भी युक्ति से निवारण करते हैं।

By LALIT SHARMA , in RELIGIOUS , at December 13, 2024 Tags: , , , ,

BOL PANIPAT : श्री प्रेम मंदिर पानीपत में श्री मद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के अन्तर्गत शुक्रवार  को सातवां एवं पावन कथा भंडारा के साथ विश्राम को प्राप्त हो गई।
  कथा प्रारम्भ करते हुए पावन वृंदावन से पधारे कथा व्यास श्रद्धेय श्री हित शरण अतुल कृष्ण शास्त्री जी ने कहा कि  भगवान  अपने भक्त के लिए इस बात के लिए विशेष रूप में आतूर रहते हैं कि मेरे  भक्त में अंहकार नहीं होने पाये।         इंद्र के अंहकार का मर्दन करने के लिए भी गोबिंद ने इंद्र की पूजा करने की बजाय गोवर्धन पूजा करने का आह्वान किया। इंद्र ने कुपित होकर वर्षा करते हुए सब कुछ जलमग्न कर दिया। गोबिंद ने मथुरा गोकुल वृंदावन निवासियों को इस घनघोर वर्षा से बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी सबसे छोटी अंगुली पर  उठा लिया ताकि  सभी बृजवासी शरण ले सकें।  आखिर में इंद्र का अंहकार चकनाचूर हुआ और उन्होंने गोबिंद से क्षमा याचना की।
      इसी तरह ज्ञानवान अक्रूर जी कंस के कहने पर बालक कृष्ण और बलराम जी को मथुरा ले जाने लगे तो मार्ग में अक्रूर जी ने उनकी सुरक्षा के प्रबंध किये हुए थे। गोबिंद ने अक्रूर जी उनकी  चिंता नहीं करने को कहा तो अक्रूर जी ने उन्हें बालक कहा।  अक्रूर जी थकान दूर करने हेतु मार्ग में स्नान करने में लगे तो गोबिंद ने अक्रूर जी को अपने ईश्वरीय स्वरूप के दर्शन कराए जिससे अक्रूर जी का भय जाता रहा।
     मथुरा में पहुंच कर मामा कंस का भी संहार किया और राजा उग्रसेन को बंदी ग्रह से मुक्त कराया।
      कथा विश्राम होने से पूर्व   परम पूज्या श्री श्री 108 श्री कान्ता देवी जी महाराज व परमाध्यक्षा प्रेम मंदिर पानीपत की अध्यक्षता में श्री प्रेम मंदिर पानीपत में पावन दिव्य श्री मद्भागवत कथा प्रारम्भ हुई। उन्होंने कहा कि कलिकाल में संत ही ईश्वर के प्रतिनिधि रूप में कथाओं के माध्यम से हम सभी को सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हुए अपेक्षा करते हैं कि मनुष्य  समाज सेवा में अपने संसाधनों का सदुपयोग करें। मन में परस्पर प्रेम सहजता शालीनता सरलता का व्यवहार करें। सनातन संस्कृति और धर्म में सभी उपलब्ध ईश्वर से जुड़ी कथाएं एक ही संदेश देती है कि सन्मार्ग पर चलते हूए हम अपने कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते चलें। संसार भी ईश्वर के विराट स्वरूप का साकार रूप है इसे अपने सद्गुणों पर चलते हुए और भव्य बनावें तभी कथा का करवाना सार्थक है।

सद्गुरु जी ने श्रद्धेय शास्त्री जी को  सात दिवसीय भागवत कथा के सुन्दर भाव से विवेचन करने पर हार्दिक मंगलमय आशीर्वाद दिया। उन्होंने पावन कथा के मुख्य जजमान दया नन्द अग्घी जी व उनके परिवार को भी आर्शीवाद दिया और
साधुवाद कहा। महाराज श्री जी ने मिडिया का भी अपनी सेवाएं देने हेतु बहुत हार्दिक आभार व्यक्त किया। पावन कथा के विश्राम पश्चात भंडारा वितरण भी किया।
      सत्संग के दौरान    संजय बहल, सचिन नागपाल, सचिन मिगलानी, अनिल अरोड़ा हिमांशु असीजा के अलावा बहुत संख्या में श्रद्धालु जन उपस्थित रहे।

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