आर्य कॉलेज के मंच पर उतरा ‘रत्नावली सांग महोत्सव’ का रंग: यूटीडी के विद्यार्थियों ने ‘नौ बहार धर्म देवी’ के सांग से बाँधा समां
-केयूके के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक प्रो.डॉ. विवेक चावला और डॉ. हरविंद्र राणा ने बढ़ाया कलाकारों का मान
BOL PANIPAT – शनिवार 21 मार्च 2026 : आर्य पीजी कॉलेज के ओ.पी. शिंगला सभागार में जारी 11वें रत्नावली युवा सांग महोत्सव के तीसरे दिन लोक-कला और आधुनिक युवा जोश का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव के तीसरे दिन मुख्य अतिथि के रूप में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के युवा एवं सांस्कृतिक विभाग के निदेशक प्रो. डॉ. विवेक चावला ने शिरकत की। वहीं, विशिष्ट अतिथि के तौर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक गतिविधियों के समन्वयक डॉ. हरविंद्र राणा विशेष रूप से उपस्थित रहे।
नौ बहार धर्म देवी’ के सांग ने मोहा मन:
महोत्सव के तीसरे दिन की सांस्कृतिक बेला में यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने सुप्रसिद्ध सांग ‘नौ बहार धर्म देवी’ का भव्य मंचन किया। कलाकारों ने अपनी सधी हुई गायकी और अभिनय के माध्यम से सांग विधा की बारीकियों को बखूबी उकेरा। ढोलक की थाप और सारंगी की सुरीली तान पर जब कलाकारों ने लोक-कथा के पात्रों को जीवंत किया, तो पूरा सभागार तालियों की गूँज से सराबोर हो गया।
मुख्य अतिथि प्रो. डॉ. विवेक चावला ने अपने संबोधन में कहा, “आर्य कॉलेज का यह मंच केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि हमारी लोक-विरासत को बचाने का एक महायज्ञ है। युवा विद्यार्थियों द्वारा सांग जैसी कठिन विधा को इतनी निपुणता से प्रस्तुत करना यह दर्शाता है कि हमारी संस्कृति सुरक्षित हाथों में है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. हरविंद्र राणा ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा, “सांग हरियाणा की वह धरोहर है जिसमें साहित्य, संगीत और लोक-जीवन का सार छिपा है। रत्नावली महोत्सव ने युवाओं के भीतर अपनी बोली और अपनी माटी के प्रति गर्व का भाव जागृत किया है।
कॉलेज प्राचार्य प्रो.डॉ. जगदीश गुप्ता ने कहा कि आज आर्य कॉलेज का यह प्रांगण कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की उस महान ‘रत्नावली’ परंपरा का साक्षी बन रहा है, जिसने हरियाणा की लोक-कला को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है।
हमारे कॉलेज का लक्ष्य केवल डिग्री बाँटना नहीं, बल्कि अपने विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति का ‘ब्रांड एंबेसडर’ बनाना है। डॉ. विवेक चावला और डॉ. हरविंद्र राणा जैसे दिग्गजों की उपस्थिति ने हमारे विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को कई गुना बढ़ा दिया है। सांग की यह गूँज केवल चार दिनों की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के संस्कारों में गूँजती रहेगी।
कॉलेज के सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रभारी डॉ. रामनिवास ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि और भारी संख्या में सांग देखने आए दर्शकों का तहे दिल से स्वागत और आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “महोत्सव के तीनों दिनों में दर्शकों का जो अपार समर्थन मिला है, उसने सिद्ध कर दिया है कि आज भी ‘सांग’ लोगों के दिलों में धड़कता है। हमारे युवा कलाकार अपनी मेहनत से इस परंपरा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिला रहे हैं।

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