पूर्व डीजीपी अशोक कुमार वासी कुराना और पूर्व डीआरडीओ वैज्ञानिक ओ.पी. मनोचा ने संयुक्त रूप से लिखी पुस्तक का दिल्ली में खेल मंत्री ने किया विमोचन
आईआईटी दिल्ली में केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘लाइफ स्किल्स टू रीच द टॉप’ पुस्तक का किया विमोचन
500 से अधिक लोगों की मौजूदगी में आयोजित हुआ कार्यक्रम,
शैक्षणिक शिक्षा के साथ जीवन कौशल भी सफलता के लिए जरूरी, युवाओं को विकसित भारत 2047 के लिए तैयार रहने का संदेश
BOL PANIPAT , 15 अक्टूबर। नई दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने ‘लाइफ स्किल्स टू रीच द टॉप’ पुस्तक का विमोचन किया। इस पुस्तक के लेखक उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अशोक कुमार जो जिला पानीपत के गांव कुराना के मूल निवासी है और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के पूर्व वैज्ञानिक ओ.पी. मनोचा हैं। दोनो ने इसका लेखन किया।
इस अवसर पर बोट के सह-संस्थापक एवं गैर-कार्यकारी निदेशक तथा शार्क टैंक इंडिया में अपनी उपस्थिति के लिए व्यापक रूप से पहचाने जाने वाले अमन गुप्ता विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए।
अशोक गर्ग ने बताया कि एस. चंद पब्लिशिंग और आईआईटी दिल्ली एलुमनाई एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में 500 से अधिक लोगों ने भाग लिया।
‘लाइफ स्किल्स टू रीच द टॉप’ पुस्तक का उद्देश्य शैक्षणिक शिक्षा और वास्तविक जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक व्यावहारिक कौशल के बीच की दूरी को कम करना है। विद्यार्थियों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों, नौकरी तलाशने वालों और युवा पेशेवरों को ध्यान में रखकर तैयार की गई इस पुस्तक में करियर योजना, लक्ष्य निर्धारण, समय प्रबंधन, संवाद कौशल, पारस्परिक संबंध, तनाव प्रबंधन, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता, टीम निर्माण और निर्णय लेने सहित आवश्यक जीवन कौशलों पर विस्तार से चर्चा की गई है। इसमें वैज्ञानिक आधार पर तैयार मार्गदर्शन, व्यावहारिक रणनीतियों और वास्तविक जीवन के उदाहरणों को शामिल किया गया है, ताकि पाठक सोच-समझकर निर्णय ले सकें, चुनौतियों का सामना कर सकें और अपनी क्षमताओं को साकार कर सकें।
पुस्तक में स्मार्ट लक्ष्य निर्धारण, स्वॉट विश्लेषण और जापानी अवधारणा इकीगाई जैसे व्यावहारिक साधनों को भी शामिल किया गया है। इनके माध्यम से पाठकों को अपनी खूबियों की पहचान करने, अपनी आकांक्षाओं को क्षमताओं के अनुरूप बनाने और उद्देश्यपूर्ण करियर विकल्प चुनने में मदद मिलती है। लेखकों के पेशेवर अनुभवों और व्यक्तिगत जीवन यात्राओं पर आधारित यह पुस्तक इस बात पर जोर देती है कि सफलता केवल शैक्षणिक योग्यता और तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है। आत्म-जागरूकता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, परिस्थितियों के अनुरूप ढलने की क्षमता, प्रभावी संवाद, दृढ़ता और सही निर्णय लेने की योग्यता भी व्यक्तिगत एवं पेशेवर चुनौतियों से निपटने में समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।

इस पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि आज के युवाओं की राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका है और जेनरेशन जेड विकसित भारत 2047 के संकल्प को साकार करने में योगदान देने वाली पीढ़ी होगी। उन्होंने जोर दिया कि युवाओं को मजबूत जीवन कौशल और मूल्यों से स्वयं को सुसज्जित करना चाहिए, ताकि वे भारत को विकास के अगले स्तर तक ले जाने में अपनी भूमिका निभा सकें।
पुस्तक लिखने की प्रेरणा के बारे में बताते हुए उत्तराखंड के पूर्व डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि शैक्षणिक शिक्षा और योग्यताएं किसी व्यक्ति को परीक्षाएं उत्तीर्ण करने में मदद कर सकती हैं, लेकिन जीवन में ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए ये पर्याप्त नहीं हैं। भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) में अपने लंबे करियर के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि पुस्तक के अध्याय वैज्ञानिक सिद्धांतों और व्यावहारिक दृष्टिकोण पर आधारित हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि ये कौशल युवाओं को सोच-समझकर करियर संबंधी निर्णय लेने, चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने और अधिक आत्मविश्वास एवं स्पष्टता के साथ जीवन में आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं।
बोट के सह-संस्थापक एवं गैर-कार्यकारी निदेशक अमन गुप्ता ने अपनी वास्तविक रुचि को पहचानने और सफलता के लिए उपयुक्त रास्ता तलाशने की चुनौती पर बात की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उद्यमिता ही उपलब्धि हासिल करने का एकमात्र रास्ता नहीं है। उन्होंने गूगल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई का उदाहरण देते हुए कहा कि किसी संगठन में काम करते हुए एक सफल पेशेवर करियर बनाना भी उतना ही संतोषजनक और उपलब्धिपूर्ण हो सकता है।
पुस्तक विमोचन समारोह में कई विशिष्ट अतिथियों ने भी भाग लिया। इनमें मोंगिया स्टील के प्रबंध निदेशक गुणवंत मोंगिया, आईपीएस अधिकारी एवं केंद्रीय फरीदाबाद के पुलिस उपायुक्त डॉ. राजेश मोहन, प्रोफेसर अलकनंदा अशोक और पुस्तक के प्रकाशक एस. चंद एंड कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक हिमांशु गुप्ता शामिल रहे। कार्यक्रम में कई प्रशासनिक अधिकारी, आईआईटी दिल्ली के विद्यार्थी, संकाय सदस्य, पूर्व विद्यार्थी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
इस उपलब्धि पर साहित्यकारों ने विशेष रूप से बधाई दी।

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