Thursday, April 16, 2026
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महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से जिला प्रशासन पानीपत एवं पुलिस विभाग के सानिध्य में एसडीपीजी कॉलेज में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन.

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at February 4, 2025 Tags: , , , ,

-जेंडर सेंसिटाइजेशन से ही दुनिया खूबसूरत बनेगी: डॉ सुधा सिंह, लेखिका एवं सीनियर प्रोफेसर, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविधालय नई दिल्ली

-लैंगिक समानता का पाठ्यक्रम ही स्त्री-पुरुष समानता का आधार बनेगा: डॉ संध्या सिंह प्रोफेसर भाषा विभाग, एनसीईआरटी, नई दिल्ली

-कार्यशाला में पानीपत में स्थित  केंद्र एवं राज्य सरकार के सभी विभागों के प्रतिनिधियों ने लिया हिस्सा

BOL PANIPAT , 04 फरवरी 2025,  पानीपत की धरा से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किये गए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के 10 वर्ष पुरे होने के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा सरकार के सहयोग से और जिला प्रशासन पानीपत एवं पुलिस विभाग के सानिध्य में  एसडी पीजी कॉलेज, पानीपत में राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का विषय ‘स्त्री-पुरुष समानता में नागरिक दायित्व’ रहा। इस कार्यशाला की प्रेरणा श्रीमती अमनीत पी. कुमार, आईएएस, प्रधान सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा सरकार से मिली, जिन्होंने अपने सन्देश में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के लिए विभाग की प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यशाला का मार्गदर्शन डॉ. वीरेंद्र दहिया, आईएएस, उपायुक्त पानीपत ने किया ।

     कार्यशाला की अध्यक्षता टीना पोशवाल, सिटी मजिस्ट्रेट, पानीपत ने की, जबकि धन्यवाद प्रस्ताव परमिंदर कौर, महिला एवं बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी ने दिया। कार्यक्रम में प्रमुख वक्ता के रूप में डॉ. सुधा सिंह, वरिष्ठ प्रोफेसर, हिंदी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, डॉ. संध्या सिंह, प्रोफेसर, भाषा विभाग, एनसीईआरटी, नई दिल्ली, डॉ. सीता रश्मि, पुणे, डॉ. शिखा राय, प्रोफेसर, जन संपर्क विभाग, इग्नू, नई दिल्ली और इंस्पेक्टर रेखा, महिला थाना, पानीपत ने भाग लिया। सभी अतिथियों का स्वागत प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने पुष्प एवं स्वागत भाषण से किया ।

अमनीत पी. कुमार ने अपने संदेश में कहा कि स्त्री-पुरुष समानता सामाजिक संरचना की आधारशिला है और इसके लिए सभी सरकारी विभागों को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें समाज के हर क्षेत्र में समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि महिला एवं बाल विकास विभाग, हरियाणा सरकार लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कार्यक्रम चला रहा है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाया जा सके।

     मुख्य वक्ता डॉ. सुधा सिंह ने कहा कि जेंडर सेंसिटाइजेशन से ही दुनिया खूबसूरत बनेगी । महिलाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के समान अवसर प्रदान करना आवश्यक है, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें । डॉ. संध्या सिंह ने कहा कि लैंगिक समानता का पाठ्यक्रम ही स्त्री-पुरुष समानता का आधार बनेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आर्थिक विकास और लैंगिक समानता के बीच सीधा संबंध है, इसलिए महिलाओं को समाज के सभी क्षेत्रों में समान भागीदारी मिलनी चाहिए ।

     डॉ. शिखा राय ने कहा कि मीडिया को स्त्री-पुरुष समानता को बढ़ावा देने के लिए अभियान चलाने चाहिए ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव आ सके। इंस्पेक्टर रेखा ने कहा कि हरियाणा पुलिस महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है, और शत्रुजीत कपूर, पुलिस महानिदेशक के मार्गदर्शन में महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान की जा रही है। उन्होंने बताया कि स्कूल और कॉलेज की छात्राओं को ‘अच्छा स्पर्श और बुरा स्पर्श’ के बारे में जागरूक किया जा रहा है ।

     कार्यशाला के मुख्य आकर्षण ‘जिंदगी न मिलेगी दुबारा’ और ‘धरती करे पुकार’ नामक नाटक रहे, जो सड़क सुरक्षा पर आधारित थे और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा प्रायोजित किए गए थे। इसके अतिरिक्त, चित्रकला प्रदर्शन और डॉक्यूमेंट्री फिल्म का भी आयोजन किया गया।

     डॉ रश्मि ने कहा कि 21वीं सदी में महिला सशक्तिकरण केवल राष्ट्रीय नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रमुख मुद्दा बन चुका है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार लिंग समानता को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, लेकिन इस दिशा में सामुदायिक पहल भी आवश्यक है। उन्होंने आह्वान किया कि हम सभी को मिलकर ऐसा वातावरण बनाना चाहिए जहां महिलाओं को पूर्ण समानता मिले और वे स्वतंत्र रूप से अपने जीवन के निर्णय ले सकें ।

     इस अवसर पर वन मंडल अधिकारी विजयलक्ष्मी विशेष रूप से उपस्थित रहीं ।

     इस कार्यशाला का मंच संचालन राजीव रंजन, संस्कृति कर्मी ने किया, जिन्होंने कार्यशाला के उद्देश्यों और प्रस्तावना को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया ।

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