Sunday, April 19, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज में सात दिवसीय कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी स्तर एनएसएस कैंप का दूसरा दिन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at March 24, 2022 Tags: , , , ,

मिट्टी बचाओ अभियान, ड्रग एब्यूज, फर्स्ट ऐड और एटीएम के प्रयोग में सावधानियां विषयों पर किया गया युवा एनएसएस कार्यकर्ताओं को जागरूक

सांस्कृतिक गतिविधियों में एकल नृत्य प्रतियोगिता का हुआ आयोजन

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय कुरुक्षेत्र एनएसएस प्रकोष्ठ के सौजन्य से और उच्चतर शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार के प्रायोजन से 23 से 29मार्च तक चलने वाले सात दिवसीय यूनिवर्सिटी स्तर एनएसएस कैंप का आज दूसरा दिन रहा जिसमे विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों ने वक्तव्य एवं विचार-मंथन कर प्रतिभागी एनएसएस कार्यकर्ताओं के ज्ञान में वृद्धि की.श्रीमती रोहिणी भोखर फर्स्ट ऐड एवं नर्सिंग टीचर सैंट जॉन एम्बुलेंस इंडियन रेड क्रॉस पानीपत, डॉ अशोक कुमार वर्मा सब-इंस्पेक्टर नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो हरियाणा, आरएल सचदेवा पूर्व चीफ मेनेजर पंजाब नेशनल बैंक पानीपत औरगरिमा मलिक कार्यकर्ता ईशा फाउंडेशन ने अपने विषयों और अनुभवों को एनएसएस कार्यकर्ताओं के साथ साझा किया.इस फाउंडेशन के कार्यकर्ता राजेश गुप्ता, ज्योति भारद्वाज, ऋतू, उत्कर्ष वर्मा, नवीन, विपिन और अंकुश ने भी आज के कार्यक्रम में शिरकत की.रात-दिन चलने वाले इस आवासीय कैंप में कुरुक्षेत्र विश्वविधालय के अलग-अलग कालेजों के 200 से अधिक एनएसएस कार्यकर्ता और अधिकारी भाग ले रहे है. मेहमानों का स्वागत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, कॉलेज में एनएसएस प्रभारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने पुष्प-रोपित गमले और शाल भेंट कर किया. कैंप का थीम आत्मनिर्भर युवा, आत्मनिर्भर भारत है. दूसरे दिन की शुरुआत प्रात: कालीन सत्र में योग और प्राणायाम करने के साथ की गई जबकि सांयकालीन सत्र में सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की गई जिसमे आज एकल नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया.

श्रीमती रोहिणी फर्स्ट ऐड एवं नर्सिंग टीचर सैंट जॉन एम्बुलेंस इंडियन रेड क्रॉस पानीपतने व्यावहारिकप्रशिक्षण देते हुआ कहा किकिसी भी बीमारी,चोटया दुर्घटना के लिये चिकित्सक याऐम्बुलेंस आने से पहले जो राहतकार्य और उपचारकिया जाता है उसे ही प्राथमिक सहायता कहते हैं.इस उपचार के दौरान उपयोग मे आने वाले साधनो के संग्रह को फर्स्ट ऐड किट कहते हैं. फर्स्ट ऐड के तीन महत्वपूर्ण उद्देश्य होते हैं – जीवनसंरक्षणप्राथमिक उपचार का सबसे मुख्य उद्देश्य है क्यूंकि इसमें मरीज़, बीमार या घायल व्यक्ति के जीवनकी रक्षा करना होता है. दूसरा कदम स्थिति को अधिक खराब होने सेबचाना है.इसके लिये बाहरी और आंतरिक स्थिति को नियंत्रण मे रखना आवश्यक है. इसलियेबाहरी तौर पर मरीज़ या घायल व्यक्ति को उसके कष्ट या पीडा के कारण की स्थिति से दूर ले जाना होता है और आंतरिक तौर पर उसकी शारीरिक और मानसिक अवस्था कोबिगडने से  बचाया जाना शामिल है. रोग-मुक्त होने मे सहायता करना फर्स्ट ऐड का तीसरा कदम है. रोगी कोदवाई और मरहम-पट्टी दे कर उसे निरोगी और पूर्णतः स्वस्थ करना फर्स्ट ऐड का अंतिमउद्देश्य है.प्राथमिक उपचार शुरु करने पर सबसे पहले मरीज़ या घायल व्यक्ति की जाँच के लिये इन तीन चीज़ो को अहमियत दी जानी चाहिए जिसे संक्षेप मे फर्स्टऐड की एबीसी के नाम से जाना जाता है. हर एनएसएस कार्यकर्ता को फर्स्ट ऐड की जानकारी अवश्य होनी चाहिए.

डॉअशोक कुमारवर्मा सब-इंस्पेक्टर नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो हरियाणाने युवा एनएसएस कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सदा नशे से दूर रहेंगे.कभी शौक के नाम पर तो कभी दोस्ती की आड़ में, कभी दुनियाँ के दुखों का बहाना करके, तो कभी कोई मज़बूरी बताकर,कभी टेंशन तो कभी बोरियत दूर करनेके लिए लोग शराब,सिगरेट,तम्बाकू, ड्रग्स आदि अनेक प्रकार के मादक द्रव्यों को लेना शुरू करते है.  लेकिन नशा कब उनकी जिंदगी का हिस्सा बन जाता है उन्हें पता ही नहीं चलता और जब पता चलता है तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए एक्सीडेंट करना, शादीशुदा व्यक्तियों द्वारा नशे में अपनी पत्नी से मारपीट करना आम बात है. इसके साथ-साथ मुँह,गले व फेफड़ों का कैंसर, ब्लड प्रैशर,अल्सर,यकृत रोग,अवसाद एवं अन्य अनेक रोगों का मुख्य कारण विभिन्न प्रकार का नशा है. उन्होनें नशा छोड़ने के लिए उपाय एवं उपचारों बारे भी बताया.उन्होनें युवाओं को नशे से दूर रहने की शपथ दिलाई.

पंजाब नेशनल बैंक के पूर्व चीफ मेनेजर श्री आरएल सचदेवा ने कहा की एटीएम के उपयोग के दौरान हमें कुछ सावधानियां अवश्य बरतनी चाहिए अन्यथा हमारे लिए बड़ी मुसीबतपैदा हो सकती है. एटीएमकार्ड अत्यधिक गोपनीय और सुरक्षित प्रकार से रखना चाहिए तथा कार्ड पर पासवर्ड लिखने की भूल कभी नहीं करनी चाहिए. हमें अपने हर लेनदेन के पूरा होने अथवा अधूरा रहने के बाद एटीएम में दिए गए ‘कैंसल’ के बटन को कम से कम दो बार जरुर जरूर दबाना चाहिए. प्रत्येक लेनदेन की मिनी स्टेटमेंट जरूर लेनी चाहिए. बैंक की एसएमएस अलर्ट सर्विस को जरुर लेना चाहिए.यदि हमारा एटीएम कार्ड काम नहीं करता है तो इसे अलग-अलग मशीनों पर आजमाना नहीं चाहिए. हमें ऐसे पासवर्ड नहीं बनाने चाहिए जिनका अंदाजा आसानी से लग सके जैसे की हमारे घर, कार, बाइक, जन्म तिथि आदि. एटीएम के प्रयोग के समय हमें किसी दूसरे व्यक्ति की मदद बिलकुल नहीं लेनी चाहिए. कार्ड गुम या चोरी होने पर संबंधित बैंक को तुरंत सूचना देनी चाहिए और ब्लॉक करवाना चाहिए. असुरक्षित स्थान के एटीएम के उपयोग से हमें बचना चाहिए.

गरिमा मलिक कार्यकर्ता ईशा फाउंडेशन ने कहा की पूरे संसार में 300 केन्द्रों और 7 मिलियन स्वयंसेवकों के समर्थन के साथईशा फाउंडेशन मानव खुशहाली के सभी आयामों को संबोधित करती है. अपने भीतरी रूपांतरण के शक्तिशाली योग कार्यक्रमों से लेकर समाज, पर्यावरण और शिक्षा के लिए अपनी प्रेरणादायक परियोजनाओं तकईशा की गतिविधियांएक समावेशी संस्कृति है. ईशा फाउंडेशन की गतिविधियों ने हर तरह की आर्थिक, सांस्कृतिक या धार्मिक पृष्ठभूमि लोगों तक पहुंचाईहै. फाउंडेशन की सामाजिक परियोजनाएँ इस तरह तैयार की गई हैं कि वे आसानी से की जा सकें और बड़े पैमाने पर संचालित की जा सकें. पूरे संसार में मानव सशक्तिकरण और सामुदायिक कायाकल्प के आदर्श नमूने है इस फाउंडेशन का आधार. ‘माटी बचाओ अभियान’ सदगुरु द्वारा शुरू की गई मिट्टी को बचाने और शुद्ध रखने का ग्लोबल अभियान है जिसकी शुरुआत 21 मार्च को लन्दन से हुई है.‘मिट्टी बचाओ आंदोलन ’मिट्टी और धरती के प्रति जागरूकता पैदा करने वाला अभियान है. 3 अरब से अधिक लोगों का समर्थन जुटाने और जताने के लिए सदगुरु अकेले मोटर साइकिल की सवारी करते हुए 24 देशों से गुज़रेंगे और तीस हजार किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेंगे. सफर दक्षिण भारत में समाप्त होगा. एसडी पीजी कॉलेज पानीपत ने दिया‘मिट्टी बचाओ अभियान को समर्थन देकर अपने पर्यावरण बचाओ के बोध का परिचय दिया है. एनएसएस के कार्यकर्ताओं और स्टाफ सदस्यों ने उत्साहपूर्वक मौके पर ही 8000030003 नंबर पर मिस्ड कॉल देकर ‘मिट्टी बचाओ अभियान’ को सफल बनाया है. इस अभियान का उद्देश्य दुनिया भर में मिट्टी के खतरनाक क्षरण के बारे में वैश्विक जागरूकता लाना है. खराब होती मिट्‌टी खाद्य और जल सुरक्षा के लिए विनाशकारी साबित हो रही है. जलवायु आपदा और विलुप्त होती प्रजातियां भी इसी मिट्‌टी की गुणवत्ता से जुड़ी हैं. ऊपरी मिट्टी के पहले 12 से 15 इंच में जो जीवन है वही वास्तव में हमारे अस्तित्व का आधार है. यदि मनुष्य अपने अस्तित्व के आधार से सचेतन रूप से जुड़ा नहीं है तो हम उन्हें जीवन की प्रकृति और सृष्टि के स्रोत के प्रति सचेत नहीं कर सकते. उन्होनें कहा की प्रत्येक व्यक्ति को इस आंदोलन में शामिल होना चाहिए. मिट्टी को लेकर यदि देश में आवश्यक जागरूकता आ गई तो हम अपनी धरती को बचा पायेंगे.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि एनएसएस सरकार द्वारा शुरू की गयी एक शानदार और वैचारिक रूप से प्रेरित करने वाली योजना है. यदि एनएसएस को अनिवार्य बना दिया जाए और इसे पाठ्यक्रम के भाग के रूप में एकीकृत कर दिया जाए तो इसके जो फायदे हमें मिलेगे उनकी हम कल्पना भी नहीं कर सकते.

प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने कहा की राष्ट्रीय सेवा योजना छात्रों को समुदाय को समझने का अवसर प्रदान करता है. इनको समझने के बाद ही छात्र समाज की जरूरतों और समस्याओं को हल कर सकते है.      इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ बलजिंदर सिंह, प्रो मनमीत सिंह. प्रो नम्रता, प्रो हिमानी, प्रो सोनिका, प्रो सनी, दीपक मित्तल भी मौजूद रहे.

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