एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों द्वारा ‘स्वच्छता ही सेवा 2024’ पखवाड़े का आयोजन.
–वर्ष 2024 का थीम है: ‘स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता’
–स्वच्छता से मन को शांति और स्थिरता मिलती है: डॉ अनुपम अरोड़ा
BOL PANIPAT, 25 सितम्बर, एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाइयों द्वारा केंद्र सरकार के निर्देशन में ‘स्वच्छता ही सेवा 2024’ पखवाड़े का आयोजन किया गया जिमें एनएसएस स्वयंसेवकों ने रेलवे स्टेशन पर जाकर साफ़-सफाई का अभियान चलाया और नागरिकों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया । स्वच्छता पखवाड़ा 17 सितम्बर से 2 अक्टूबर तक मनाया जा रहा है और इस वर्ष का थीम ‘स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता’ है । विदित रहे कि इसी क्रम में 27 सितम्बर को कॉलेज प्रांगण में स्वच्छता पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा जिसके लिए कॉलेज एनएसएस यूनिट्स को केंद्र सरकार से 25 हज़ार रूपये की राशि प्राप्त हुई है । इसके साथ एन.एस.एस. कार्यकर्ताओं ने जिला सचिवालय, पानीपत बस अड्डे, रेलवे स्टेशन और कई आवासीय कालोनियों में जाकर लोगो को अपना वोट बनवाने के लिए भी प्रेरित किया । प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने स्वयंसेवकों को स्वच्छता अभियान और निरंतरता के साथ वोट डालने हेतू हरी झंडी दिखाकर रवाना किया । उनके साथ एन.एस.एस. प्रोग्राम अधिकारी डॉ राकेश गर्ग और डॉ संतोष कुमारी ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया । एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने खुद की पहल पर कॉलेज प्रांगण से बाहर निकलकर अपने राष्ट्रीय कर्तव्य बोध का परिचय दिया और आमजन को स्वच्छता के प्रति उनकी जिम्मेदारियों के बारें में जागरूक किया ।
प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि स्वच्छता से कई बीमारियों से बचाव होता है खासकर संक्रामक बीमारियों से. स्वच्छ रहने से शरीर को कीटाणु, बैक्टीरिया, और वायरस से बचा जा सकता है । स्वच्छता व्यक्ति के विकास में मदद करती है और उसे स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करती है । स्वच्छता से गंदगी और प्रदूषण कम होता है जिससे वनस्पति, पशु-पक्षी और जलजीवन को संरक्षित करने में मदद मिलती है । स्वच्छता सीखने की क्षमता को बढ़ाती है. साफ़-सुथरे वातावरण में छात्रों में गर्व और ज़िम्मेदारी की भावना पैदा होती है । स्वच्छता से घर और समुदाय में गरिमा बढ़ती है और स्वच्छता से मन को शांति और स्थिरता मिलती है । शारीरिक स्वच्छता में नियमित स्नान, शरीर की साफ-सफाई का ध्यान रखना, स्वच्छ कपड़े पहनना, हाथ-मुंह धोना, समय पर नाखून-बाल काटना और दांतों की सफाई शामिल होते है । मानसिक स्वच्छता के अंतर्गत अच्छे और शुद्ध विचार आते हैं । इसमें सकारात्मक सोच, ध्यान, मेधा विकास, चिंता और तनाव को कम करने के तरीके शामिल होते हैं । सामाजिक स्वच्छता में व्यक्ति के संबंधों में सभ्यता, सहानुभूति, ईमानदारी और सभ्य व्यवहार पर बल दिया जाता है । हमें पूर्ण स्वच्छता को पाने का प्रयास करना चाहिए ।
डॉ संतोष कुमारी ने कहा कि भारत एक गणतांत्रिक देश है और गणतांत्रिक देश में सबसे अहम होता है चुनाव और मत का प्रयोग । गणतंत्र एक यज्ञ की तरह होता है जिसमें मतों की आहुति बेहद जरुरी मानी जाती है । एक वोट भी सरकार और सत्ता बदलने के लिए काफी होती है । वोट न बनवाना, वोट डालने में आलस करना और ‘मेरे एक वोट से क्या बदलेगा’ जैसे तकिया-कलामों की वजह से देश को कितना नुकसान हो सकता है हम इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते । हम स्वयं को बदलेंगे तो, सिस्टम खुद-ब-खुद बदल जाएगा । इंटरनेट पर भारतीय सिस्टम और राजनीति पर बड़ी-बड़ी बहस करने वाले अकसर भारतीय गणतंत्र के इस यज्ञ में सिर्फ इसलिए वोट डालने नहीं जाते क्यूंकि उन्हें लाइन में लगता पड़ता है और कुछ देर के लिए अनुशासन का पालन करना पड़ता है । गणतांत्रिक प्रणाली तभी सुचारु रूप से चल सकती है जब हर इंसान अपने मत का प्रयोग करे और अपनी इच्छा-अनिच्छा को जाहिर करे । एन.एस.एस. स्वयंसेवकों ने वोट बनवाने की प्रक्रिया में हिस्सा लेकर देश के प्रति अपनी भागीदारी को सुनिश्चित किया है ।
एन.एस.एस. प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग ने कहा कि व्यक्तिगत स्वच्छता का महत्व न सिर्फ व्यक्तिगत विकास के लिए जरूरी है बल्कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण है ।

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