Wednesday, April 22, 2026
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जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अप्राकृतिक यौनाचार के मामले में सुनाया महत्वपूर्ण फैसला. दी पांच लाख की सहायता राशि.

By LALIT SHARMA , in DIPRO PANIPAT PRESS RELEASE , at April 21, 2026 Tags: , , , ,

पीडि़त को दी त्वरित 2 लाख रुपए की अंतरिम राहत।

18 साल की आयु होने के बाद भी 3 लाख रुपए की एफडी के पैसे भी मिलेंगे।

BOL PAIPAT : 21 अप्रैल। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने अप्राकृतिक यौनाचार से जुड़े एक मामले में गत दिनों सुनवाई पूरी करते हुए महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया। बोर्ड ने मामले की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए नाबालिग की पहचान गोपनीय रखते हुए सुधारात्मक दृष्टिकोण अपनाया। यह मामला विगत 24 जनवरी 2024 में समालखा थाना से जुड़े एक केस से संबंधित था जिसमें पोक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसमें पीड़ित बच्चे के बयान के साथ-साथ मां-बाप की गवाही भी हुई थी और आरोपित का मेडिकल टेस्ट भी किया गया था।

सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों,अन्य सदस्यों की रिपोर्ट तथा की राय पर विचार करते हुए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनित लिंबा ने कहा कि किशोरों से जुड़े मामले में पुनर्वास को प्राथमिकता देना आवश्यक है। इसीलिए इस पर सुनवाई करते हुए पीड़ित के अभिभावकों के खाते में त्वरित दो लाख रुपए और 3 लाख रूपये की अंतरिम सहायता प्रदान की गई। यह सहायता राशि उसके 18 साल तक उसके शिक्षा पर अन्य खर्चो के लिए प्रदान की गई है और साथ ही साथ उसके 18 वर्ष पूरी होने के बाद उसके अभिभावकों के खाते में 3 लाख रुपए की एफडी करवाई गई है ताकि उसके वयस्क होने के बाद भी वह अपने जीवन स्तर को आगे बढ़ा सके। इसमें आरोपित किशोर जिसकी आयु करीब 15 साल थी उसे 2 साल 2 महीने और 17 दिन बाल सुधार केंद्र में भी रखा गया था और इसे 6 महीने के प्रोबेशन पीरियड पर रिहा किया  गया है। बोर्ड ने संबंधित नाबालिग को परामर्श, नैतिक शिक्षा तथा व्यवहार सुधार कार्यक्रमों में सम्मिलित किए जाने के भी निर्देश दिए।

         जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पुनित लिंबा ने अभिभावकों को भी जिम्मेदारी निभाने की सलाह देते हुए कहा कि बच्चों की गतिविधियों पर उचित निगरानी और सकारात्मक मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक है। साथ ही संबंधित संस्थानों को निर्देशित किया गया कि किशोर को निर्धारित अवधि तक नियमित काउंसलिंग उपलब्ध कराई जाए तथा उसकी प्रगति पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। इस अवसर पर बोर्ड ने समाज से भी अपील की कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता बरती जाए और नाबालिगों के पुनर्वास में सहयोग दिया जाए, ताकि उन्हें मुख्यधारा में लाकर बेहतर भविष्य प्रदान किया जा सके।

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