Saturday, April 18, 2026
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एसडी पीजी कॉलेज पानीपत की युवा रेड क्रॉस, एनएसएस और एनसीसी इकाइयों ने अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस को पर्यावरण जागरूकता रूप में मनाया

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at June 4, 2022 Tags: , , , , ,

– सेमीनार, जागरूकता रैली और वृक्षारोपण के माध्यम से युवाओं में पर्यावरण बचाने की जगाई गई अलख

– अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस का उद्देश्य पर्यावरण के साथ सदभाव में रहना और इसकी सुरक्षा के प्रति सभी की चेतना को जागृत करना है: डॉ सुरेन्द्र जैन, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री वीएचपी

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में स्थापित युवा रेड क्रॉस, एनएसएस एवं एनसीसी इकाइयों ने अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस को पर्यावरण जागरूकता के रूप में मनाया. इस अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और इसकी सुरक्षा को लेकर सेमीनार का आयोजन किया गया जिसके मुख्य अतिथि एवं वक्ता डॉ सुरेन्द्र जैन, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री विश्व हिन्दू परिषद् रहे. सम्पूर्ण कार्यक्रम महामंडलेश्वर एवं राष्ट्रीय संत स्वामी दिव्यानंद महाराज कालरम आश्रम (घरौंडा) के आशीर्वाद और सानिध्य में संपन्न हुआ. मेहमानो का स्वागत प्रधान पवन गोयल, प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, यूथ रेड क्रॉस के नोडल अधिकारी एवं एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर डॉ राकेश गर्ग, डॉ संतोष कुमारी, एनएसएस अधिकारी डॉ बलजिंदर सिंह और प्रो इंदु पुनिया ने किया. विदित रहे की विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की थीम ‘प्रकृति के साथ सदभाव में रहना’ अर्थात ‘केवल एक पृथ्वी’ है.

युवाओं में पर्यावरण बचाने की अलख जगाने हेतू और उन्हें संवेदनशील नागरिक बनाने के उद्देश्य से कॉलेज प्रांगण में वृक्षारोपण ड्राइव चलाई गई. तत्पश्चात पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई. फिर हाथ में बैनर और पलाकार्ड्स उठाये हुए यूथ रेड क्रॉस, एनएसएस और एनसीसी के कार्यकर्ताओं ने पर्यावरण जागरूकता रैली भी निकाली. “जिस दिन पृथ्वी में पर्यावरण नहीं होगा, उस दिन पृथ्वी में जीवन भी नहीं होगा”, “जहाँ न पेड़-पौधे हैं, न चिड़िया है, न हरियाली है, वहाँ जीवन केवल एक बोझ है”, “जब तक मानव अपना कर्तव्य नहीं समझेगा, तब तक पर्यावरण पर खतरा मंडराता हीं रहेगा” जैसे नारों से कॉलेज में सम्पूर्ण माहौल पर्यावरण को लेकर संजीदा नजर आया. इस अवसर पर प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने पर्यावरण को बचाने और पेड़-पौधे लगाने की शपथ भी सभी विद्यार्थियों और स्टाफ सदस्यों को दिलाई. डॉ सुरेन्द्र जैन, केंद्रीय संयुक्त महामंत्री विश्व हिन्दू परिषद् ने कहा कि मानव द्वारा अपने हित के लिए निरंतर पृथ्वी के संसाधनों का दोहन करने के कारण होने वाली क्षति को रोकने और पृथ्वी को बचाने के लिए पर्यावरण दिवस की शुरुआत की गई है. मानव ने पिछले 200 वर्षो में अपनी उन्नति और प्रगति के नाम पर प्रकृति का जो शोषण किया है उसी का परिणाम है जो आज हम अपने पर्यावरण में परिवर्तन देख रहें है. यदि इस पर अब भी दृढ़ता के साथ विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में हमें और भी भयंकर परिणाम भुगतने होंगे. इसी उद्देश्य हेतू विश्व में जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण करने के लिए प्रत्येक वर्ष 5 जून को वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे यानि अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. मानव ने हमेशा अपने विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने का प्रयास किया है. इसके लिए विश्व के सभी देश अपनी प्रगति के लिए प्रकृति के संसाधनों का वहन कर रहें है जिसका परिणाम है कि प्रदूषण तेज़ी से बढ़ता जा रहा है.

हम अपनी सुख-सुविधा के लिए निरंतर पेट्रोलियम जैसे पदार्थो का उपयोग करते हैं, घर को वातानुकूलित रखने के लिए एसी का उपयोग करते हैं तथा साथ ही कारखानों से निकलने वाले जैविक पदार्थ जो सुविधा के अनुसार कहीं भी छोड़ दिए जाते हैं प्रदूषण को बढ़ावा देने में अपना योगदान दे रहें हैं. इसी कारण हमारी पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में यदि इसे अभी भी कम न किया गया तो मानव सभ्यता का नाश होने में अधिक समय नहीं लगेगा. इस प्रदूषण का भयानक परिणाम यह हो सकता है कि इस पृथ्वी पर जीवन की परिकल्पना करना भी असंभव हो जाए. पवन गोयल एसडी पीजी कॉलेज प्रधान ने कहा कि हमें अपने चारों ओर के वातावरण को संरक्षित करने का तथा उसे जीवन के अनुकूल बनाए रखने का प्रयास निरंतर करना होगा. पर्यावरण और प्राणी एक-दूसरे पर आश्रित हैं और यही कारण है कि भारतीय चिन्तन में पर्यावरण संरक्षण की अवधारणा उतनी ही प्राचीन है जितना यहाँ की मानव जाति का ज्ञात इतिहास है. पर्यावरण संरक्षण का समस्त प्राणियों के जीवन तथा इस धरती के समस्त प्राकृतिक परिवेश से घनिष्ठ सम्बन्ध है. बढ़ते प्रदूषण के कारण सारी पृथ्वी दूषित हो रही है और यदि इसे अब भी रोका न गया तो उन्हें भविष्य में
मानव सभ्यता का अंत होता दिखाई दे रहा है.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस का उद्देश्य पर्यावरण के संरक्षण और सुरक्षा के प्रति सभी की चेतना को जागृत करना है. अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण दिवस प्रतिवर्ष 5 जून को मनाया जाता है और इसे पहली बार संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में 5 जून 1974 को मनाया गया. इसके बाद से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस को मनाया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के मन में पर्यावरण के संरक्षण और सुरक्षा के प्रति चेतना को जागृत करना है. उन्होनें कहा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान पूरे देश और दुनिया में लॉकडाउन लग गया था जिससे न केवल उद्योग-धंधे एवं कल-कारखाने भी बंद हो गए थे बल्कि लोगों का जीवन भी रुक गया था. अगर हमने पर्यावरण में संतुलन बनाए रखा होता और इसका अर्थहीन दोहन न किया होता तो शायद ऐसे हालात धरती पर न पैदा हुए होते. प्रकृति ने हमे एक बार फिर चेतावनी दी है की हम उससे अनवांछित छेडछाड़ न करे और उसके साथ भी उचित व्यवहार करे. हमें एक ही धरती मिली है और हमें ही इसका ख्याल रखना होगा.

डॉ राकेश गर्ग यूथ रेड क्रॉस के नोडल अधिकारी एवं एनएसएस प्रोग्राम ऑफिसर ने कहा कि आज पर्यावरण को लेकर हालात बेहद चिंताजनक है और यदि इस पर अभी भी गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो मानव-जाति का जीवित रहना ही मुश्किल हो जायेगा. ग्लोबल वार्मिंग के कारण लगातार ग्लेसियर पिघल रहे हैं जिसकी वजह से समुद्र में जल का स्तर बढ़ रहा है. यदि सब ऐसे ही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब धरती के ज्यादातर शहर जलमग्न हो जायेंगे.

कार्यक्रम में प्रो मुकेश गुप्ता, डॉ मुकेश पुनिया, डॉ एसके वर्मा, डॉ संतोष कुमारी, डॉ राकेश गर्ग, डॉ बलजिंदर सिंह, डॉ रवि कुमार, प्रो इंदु पुनिया समेत कई प्राध्यापकों एवं लगभग 300 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया.

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