राष्ट्रीय संस्कृति व राष्ट्रीय उत्थान की ध्वज वाहक है हिंदी – राजीव रंजन
एसडी पीजी कॉलेज में हिन्दी दिवस पर राज्य स्तरीय कार्यक्रम
भाषण प्रतियोगिता में कुमारी तनु प्रथम स्थान, सौरभ द्वितीय स्थान और मानसी तीसरे स्थान पर रही. दोहा उच्चारण प्रतियोगिता कुसुम प्रथम स्थान, यशिका द्वितीय स्थान और अनु ने तीसरा स्थान प्राप्त किया
BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज में हिन्दी दिवस धूमधाम से मनाया गया. यह आयोजन हिंदी विभाग
द्वारा किया गया जिसमें हिंदी विभागाध्यक्षा भारती गुप्ता जगमति कविता शिवरानी एवं अन्य प्राध्यापिकाओं ने भाग लिया.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कॉलेज प्रधान पवन गोयल रहे कार्यक्रम में मुख्य वक्ता तथा मार्गदर्शक की भूमिका में राजीव रंजन मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, हरियाणा सरकार रहे. यह आयोजन हिंदी विभाग द्वारा आयोजित किया गया. इस कार्यक्रम में दो प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया पहली भाषण प्रतियोगिता और दूसरी दोहा उच्चारण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. दोहा उच्चारण प्रतियोगिता में 10 प्रतिभागियों ने भाग लिया भाषण प्रतियोगिता का मंच संचालन डॉ कविता ने किया. दोहा उच्चारण प्रतियोगिता के लिए मंच का संचालन डॉक्टर जगमति ने किया. इन प्रतियोगिताओं के साथ साथ कुछ विद्यार्थियों ने कविताओं का वाचन भी किया इसके साथ ही साथ कुछ प्राध्यापिका में हिंदी दिवस के उपलक्ष पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत की.
राजीव रंजन ने बोलते हुए कहा की यह मात्र हमारा भ्रम है कि हिंदी की दुर्दशा है. जैसे हम अपनी माँ को नहीं बदल सकते वैसे ही हम अपनी मातृभाषा को भी नहीं बदल सकते है. हिंदी का विकास होता रहा है और अब भी हो रहा है. जिस भाषा में हम रोते, हँसते और स्वप्न देखते है वह हमारे अस्तित्व में निहित है. दूसरी भाषाओं को सीखना भी बड़ी अच्छी बात है परन्तु हम जाने-अनजाने अपनी भाषा का अपमान न करे. उन्होनें कहा की हाल के वर्षों में हिंदी के विकास में जितनी सेवा फ़िल्मी कलाकारों और हिंदी फिल्मों का बड़ा योगदान है. उन्होनें हिंदी भाषा के उदभव और विकास पर भी विस्तार से प्रकाश डाला. हिंदी भाषा के प्रयोग से न सिर्फ हमारा उच्चारण शुद्ध होता है बल्कि हिंदी हमारे रग-रग में समाहित होकर हमारी संस्कृति को भी संजोती है.
एसडी पीजी कॉलेज प्रबंधकारिणी के प्रधान पवन गोयल ने इस अवसर पर कहा की हम भारतीय लगभग एक लम्बे अरसे की गुलामी के बाद भी हमने अपनी संस्कृति को नष्ट नहीं होने दिया. हम दिल से आज भी भारतीय ही है. हिन्दी भाषा ने एक लंबा सफर तय किया है राजभाषा सरकार ने बनाई है, इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा हम सभी को देना है.

एसडी कॉलेज में हिन्दी की विभागाध्यक्षा डॉ भारती गुप्ता ने इस मौके पर बोलते हुए कहा की हिन्दी का पर्व एक विशेष दिन मना कर हम मात्र औपचारिकता भर निभाते है. अँग्रेजी में बोलना फैशन हो गया है और हिन्दी में बोलते हुए हम झिझक महसूस करते है. इसी रवैये ने हमें न घर का रखा है न घाट का. जरूरत इस बात की है की हिंदी भाषा को हम दिल से अपनाये, हर रोज – हर पल. मातृभाषा, राष्ट्र गीत और राष्ट्र ध्वज पर गर्व करके ही हम आगे बढ़ सकते है. जिन देशों ने अपनी भाषा पर गर्व किया है वे ही आज दुनिया में सबसे आगे है. वैसे भी मीडिया चैनल्स और हिंदी के अखबारों ने अब इस भ्रान्ति को बिलकुल खत्म कर दिया है की हिंदी भाषा का रोजगार में कोई योगदान नहीं है. रोजगार के ज्यादा अवसर अब हिंदी जानने और पढने वालो के लिए है. हिंदी में पारंगत व्यक्ति के लिए रोजगार की आज अपार संभावनाए है.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने अपने वक्तव्य में कहा की हमारे ह्रदय में विचार मातृभाषा में ही पनपते है. दृढ़ इच्छा शक्ति के अभाव में ही हमारी राष्ट्रभाषा का यह हाल है वैसे भी इतिहास गवाह है की उन्ही राष्टों ने तरक्की की है जिन्होनें अपनी भाषा का मान किया है. रूस, जर्मनी, चीन, जापान, फ्रांस की तरक्की में उनकी मातृभाषा का ही हाथ रहा है.
कमाल की बात तो यह है की हिंदी का सम्मान अब विदेशी लोग और विदेश करने लगे है. वक्त आ गया है की हम अपनी मातृभाषा के लिए कुछ करे. सर्वप्रथम डॉ भारती गुप्ता ने हिंदी दिवस पर हिंदी को प्रचारित और प्रसारित करने के लिए विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया मानवी ने एक बहुत ही सुंदर स्वरचित कविता कहकर विद्यार्थियों को मंत्र मुग्ध कर दिया प्रोफ़ेसर मनी ने मधुर स्वयं रचित कविता प्रस्तुत की हिंदी प्राध्यापिका प्रोफेसर शिवरानी स्वरचित कविता द्वारा विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया
भाषण प्रतियोगिता के परिणाम यह रहे –
प्रथम स्थान – कुमारी तनु
दूसरा स्थान – सौरभ
तीसरा स्थान – मानसी
दोहा प्रतियोगिता के परिणाम यह रहे –
प्रथम स्थान – कुसुम
दूसरा स्थान – यशिका
तीसरा स्थान – अनु
प्रतियोगिता के अंत में कॉलेज प्रधान पवन गोयल ने विजेताओं को पारितोषिक वितरित किए और प्राचार्य डॉक्टर अनुपम अरोड़ा ने ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक वचनों द्वारा हम सबका मार्गदर्शन किया.

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