Tuesday, June 2, 2026
Newspaper and Magzine


एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वर्ल्ड ओजोन डे के अवसर पर राज्य स्तरीय वेबिनार का आयोजन

By LALIT SHARMA , in EDUCATIONAL , at September 16, 2022 Tags: , , , ,

जगदीश चन्द्र आईऍफ़एस एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन विभाग हरियाणा सरकार ने किया युवाओं को जागरूक

ओजोन की परत पृथ्वी और इसके पारिस्थितिकी तंत्र की ढाल है: जगदीश चन्द्र आई ऍफ़ एस एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन विभाग हरियाणा सरकार

BOL PANIPAT : एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में वर्ल्ड ओजोन डे (विश्व ओजोन दिवस) के अवसर पर संगोष्ठी एवं वेबिनार का आयोजन किया गया जिसके मुख्य अतिथि एवं वक्ता जगदीश चन्द्र आईऍफ़एस एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन विभाग हरियाणा सरकार रहे. उन्होनें विद्यार्थियों और प्राध्यापकों को ओजोन लेयर की जरूरत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया और उनके कर्तव्य बोध को याद दिलाया. इस अवसर कॉलेज में एक संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया जिसमे रसायन शास्त्र विभाग से प्रो मयंक अरोड़ा ने छात्र- छात्राओं को ओजोन गैस और इसके फायदों से रूबरू करवाया. कार्यक्रम में डॉ प्रियंका चांदना, डॉ राहुल जैन, डॉ प्रवीण कुमारी, डॉ रवि कुमार ने भी शिरकत की. आज आयोजित विविध कार्यक्रमों की विधिवत शुरुआत प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने की. सम्पूर्ण वेबिनार को राजीव रंजन मुख्य जन सम्पर्क अधिकारी ने एक सूत्र में पिरोया. विदित रहे की वर्ष 2022 की थीम है ‘पृथ्वी पर जीवन की रक्षा करना’ है. अंत में पर्यावरण और ओजोन गैस को बचाने पर एक डाक्यूमेंट्री भी छात्र-छात्राओं को दिखाई गई.

जगदीश चन्द्र आईऍफ़एस एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन विभाग हरियाणा सरकार ने कहा की ओजोन एक यूनानी शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘मैं सूंघता हूं’ क्यूंकि इस गैस की एक अलग ही गंध होती है. वैज्ञानिकों ने साल 1970 के अंत में ओजोन परत में छेद होने का दावा किया था. इसके बाद 80 के दशक में दुनियाभर की कई सरकारों ने इस समस्या को लेकर चिंतन करना शुरू कर दिया. साल 1985 में ओजोन लेयर की रक्षा के लिए वियना संधि को अपनाया गया और इसके बाद 19 दिसंबर 1994 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 16 सितंबर की तारीख को अंतरराष्ट्रीय ओजोन डे मनाने के लिए चुना. इस दिन का मुख्य उद्देश्य ओजोन परत का संरक्षण करना है. इस परत के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तो हर दिन कार्य कर रहे हैं लेकिन अब आम व्यक्ति को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सीएफसी पदार्थों (क्लोरोफ्लोरोकार्बन) का उपयोग कम करना चाहिए. ओजोन हमारे ग्रह के लिए एक प्रकार की ढाल का कार्य करता है और इसका बने रहना पारिस्थितिकी के संरक्षण के लिए आवश्यक है. ओजोन की परत एक समताप मंडल की परत है जो सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरण के हानिकारक दुष्प्रभावों से पृथ्वी की रक्षा करती है. वायुमंडल में ओजोन की उपस्थिति के कारण
हानिकारक पराबैंगनी किरणों को प्रभावी ढंग से परिरक्षित किया जाता है.

यदि ओजोन परत पूरी तरह से समाप्त हो जाती है तो यह जीवित प्राणियों और हमारे ग्रह को गंभीर नुकसान पहुंचाएगी. अगर हम यूवी किरणों के सीधे संपर्क में आते हैं तो यह त्वचा कैंसर जैसी हानिकारक बीमारियों का कारण बन सकती है. विभिन्न मानवीय गैरजिम्मेदार गतिविधियों के परिणामस्वरूप वातावरण में छोड़े गए क्लोरीन और ब्रोमीन परमाणु जैसे रसायन ओजोन परत के क्षरण के लिए बहुत अधिक जिम्मेदार हैं. बेशक लगातार प्रयासों के कारण ओजोन परत में छेद को वैज्ञानिकों ने काबू में कर लिया है फिर भी खतरा अभी टला नहीं है. इस दिन को मनाने का उद्देश्य लोगों को ओजोन परत के बारे में जानकारी देना, इसके नुकसान को रोकना और प्रदूषण को कम करना है. उन्होनें सभी प्रतिभागियों और आमजन से क्लोरोफ्लोरोकार्बन, प्लास्टिक और अन्य हानिकारक प्रदार्थो के इस्तेमाल न करने की और अधिक से अधिक पेड़ लगाने की सलाह दी.

प्रो मयंक अरोड़ा ने कहा की पूरी दुनिया भले ही देश, भाषाओं, रंग-रूप, संस्कृति और सभ्यताओं में बंटी हुई है लेकिन हम सभी एक ही पर्यावरण में रहते हैं. पर्यावरण की रक्षा और सही प्रकार से देखभाल करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है फिर चाहे वह किसी भी देश का नागरिक क्यूँ न हो. बीते कुछ सालों में हम सभी ने ओजोन परत के बारे में काफी कुछ सुना है. यूनाइटेड नेशन एनवायरमेंट प्रोग्राम के अनुसार समय के साथ अच्छी ओजोन जिसे स्ट्रैटोस्फेरिक ओजोन भी कहते है अब खत्म हो रही है. ओजोन की यह परत पृथ्वी पर पड़ने वाली सूरज की हानिकारक अल्ट्रावायलेट किरणों से हम सभी का बचाव करती है. इसी ओजोन परत के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 सितंबर को वर्ल्ड ओजोन डे मनाया जाता है और इसीलिए इस दिन का महत्व और इतिहास जानना हमारे लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है.

प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा की ओजोन परत ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली गैस है और ये पृथ्वी के वायुमंडल की एक परत है जो सूर्य से आने वाली अल्ट्रावायलेट किरणों से हमें बचाने का काम करती है. फ्रांस के भौतिकविदों फैबरी चार्ल्स और हेनरी बुसोन ने 1913 में इस परत की खोज की थी.
ओजोन परत में नुकसान में मानव निर्मित रसायन प्रमुख भूमिका निभाते है जिनमें हैलो कार्बनस प्रमुख हैं.

हैलोकार्बनस कार्बन परमाणु के हैलोजेन परमाणुओं से संयुक्त होने पर प्राप्त होते हैं और इनमें सीएफसी जैसे पदार्थ प्रमुख हैं. इन पदार्थों का प्रयोग शीतलीकरण (रेफ्रिजरेशन) आदि में बहुतायत में होता है. इसके अलावा एरोसोल यानी वाष्पीकृत सुगंधित पदार्थों में भी इनका बहुत प्रयोग किया जाता है. ये पदार्थ वायुमंडल में उपस्थित ओजोन परत को क्षतिग्रस्त करते हैं. इस अवसर पर स्टाफ सदस्यों में डॉ एसके वर्मा, डॉ सुशीला बेनीवाल आदि भी उपस्थित रहे.

Comments