स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने हनुमान जी की राम जी के प्रति अनन्य भक्ति का वर्णन किया।
BOL PANIPAT : सनौली रोड, नेता जी कालोनी स्थित श्री लक्ष्मी नारायण सांई बाबा मन्दिर के 54वें वार्षिकोत्सव के अंतर्गत त्रिदिवसीय श्री राम कथा सत्संग के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए स्वामी दयानन्द सरस्वती जी ने हनुमान जी की राम जी के प्रति अनन्य भक्ति का वर्णन किया।
कार्यक्रम का प्रारंभ मुख्य अतिथि सुरेन्द्र रेवड़ी एवं रामकुमार डावर द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि का स्वागत मंदिर कमेटी द्वारा किया गया। तत्पश्चात महाराज श्री ने रामचरित मानस की कथा करते हुए कहा कि जैसे ही जाम्बवान जी ने हनुमान जी को उनका बल याद दिलाया व यह कहा कि राम काम करने के लिए ही आप हनुमान जी का अवतार हुआ है यह सुनते ही हनुमान जी में एक अद्भुत बल आ गया तथा वे पर्वत के समान विशालकाय हो गए व लंका की ओर जाने को तत्पर हो गए। स्वामी दयानन्द सरस्वती जी महाराज ने राम नाम महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि केवल नाम स्मरण से ही सार्थक जीवन जिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि माँ के गर्भ से निकलकर हम माया के गर्भ में प्रवेश करते हैं और माया रूपी अंधकार में भटकते रहते हैं। सत्य के इस भंवर में हम भौतिक और शारीरिक सुखों के पीछे भागते रहते हैं। थोड़े से धन के लालच में पाप करते हैं। हमें इस पाप की अंधियारी नगरी से सत्य के सूरज की ओर ले जाने वाला केवल एक ही मार्गदर्शक होता है और वह है राम नाम स्मरण। इससे पूर्व मन्दिर प्रांगण में ‘एक शाम ठाकुर जी के नाम’ भक्ति संकीर्तन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। जिसमें किशोरी कृपा संकीर्तन परिवार से पधारे नरेश सहगल, शाम सुन्दर शर्मा, विक्की छाबड़ा ने ‘वो वृंदावन में पहली बार जाना याद आता है’ व ‘सुनो जी राधारानी हमारी यह कहानी’ गाकर उपस्थित श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर दिया।

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