एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की पानीपत इकाई द्वारा गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गुरु सम्मान समारोह का आयोजन
प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं साहित्यकार डॉ एपी जैन और सोनम सोनिया अक्स का अखिल भारतीय साहित्य परिषद् की पानीपत इकाई के अध्यक्ष प्रदीप शर्मा ने किया अलंकृत
BOL PANIPAT , 03 जुलाई.
एसडी पीजी कॉलेज पानीपत में गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की पानीपत इकाई द्वारा शिक्षक एवं गुरु सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय साहित्य परिषद की पानीपत इकाई के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप शर्मा ने की. आज के पावन अवसर पर सुप्रसिद्ध विद्वान और लेखक डॉ एपी जैन और ख्याति प्राप्त कवयित्री श्रीमती सोनम सोनिया अक्स को उनके साहित्यिक और अपने शिष्यों के लिए किये गये विलक्षण कार्यों के लिए शाल और मुमेंटो भेंट करके सम्मानित किया गया. कार्यक्रम में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की पानीपत इकाई के सचिव करन कपूर, परिषद के संरक्षक एवं कॉलेज के प्राचार्य डॉ अनुपम अरोड़ा, परिषद की कोषाध्यक्ष डॉ भारती गुप्ता, रमेश खुराना, कमल दुआ, डॉ संतोष कुमारी, प्रो राकेश सिंगला, प्रो प्रवीन खेरडे, डॉ एसके वर्मा, डॉ रवि कुमार, प्रो मनोज कुमार ने शिरकत की और अपने गुरुजनों के प्रति नमन और आदर-भाव व्यक्त किये. ज्ञात रहे कि बदलते युग में भी हम अपने परिश्रम और विद्यार्थियों के साथ निरंतर संवाद और सहयोग से एक सुदृढ़ समाज का निर्माण कर सकते हैं तथा विलुप्त होते मानवीय मूल्यों व सामाजिक ताने-बाने को बचा सकते हैं. कॉलेज में स्थापित अखिल भारतीय साहित्य परिषद की पानीपत इकाई भी इसी दिशा में प्रयासरत है कि कैसे साहित्य की मदद से हम समाज में गिरते मूल्यों को कम और बेहतर कर सकते है. आज के कार्यक्रम में डॉ एपी जैन और श्रीमती सोनिया आक्स ने जब अपनी स्वरचित कविताओं का पाठन किया तो उपस्थित जन भाव-विभोर हो गए. विदित रहे कि कॉलेज में स्थापित अखिल भारतीय साहित्य परिषद की पानीपत इकाई राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के व्यापक लक्ष्य पर अग्रसर है और इसकी खातिर परिषद काव्य गोष्ठियाँ, कवि सम्मेलन एवं काव्यपाठ प्रतियोगिता, साहित्यकार सम्मेलन, साहित्यकार सम्मान समारोह एवं नवोदित प्रतिभाओं का प्रोत्साहन करती है. कहानी, कविता, निबन्ध एवं नाट्यलेखन प्रतियोगिता प्रशिक्षण शिविर व संस्कार कार्यशाला साहित्यकारों की जयन्ती पर विचार गोष्ठियाँ, पुस्तक समीक्षा व साहित्यिक परिचर्चा आदि भी इसकी गतिविधियों में शामिल है.

प्रदीप शर्मा अध्यक्ष ने विशिष्ट मेहमानों का परिचय देते हुए बताया कि डॉ आनंद प्रकाश जैन आर्य कॉलेज पानीपत और चौधरी देवी लाल मेमोरियल कॉलेज सिवाह में बतौर प्राचार्य के रूप में कार्य कर चुके है. अर्थशास्त्र विषय के विद्वान होने के साथ-साथ उन्हें साहित्य पढ़ने और कवितायें एवं संस्मरण लिखने का भी अत्यधिक शौक है. इसी तरह सोनम सोनिया अक्स ने भी मात्र 12 वर्ष की आयु से लिखना प्रारम्भ कर दिया था. लेखन के साथ वे अपना यू-टयूब चैनल भी चला रही है. राष्ट्रपति सम्मान के अलावा सोनम सोनिया ने आशु कवयित्री सम्मान, बेस्ट वुमन अवार्ड, राष्ट्रिय कवयित्री कानपुर और लखनऊ अवार्ड जैसे बेशुमार सामान हासिल किये है. उनकी लिखी एक गज़ल को ख्याति प्राप्त गायक अनूप जलोटा भी अपनी आवाज़ दे चुके है.
सोनम सोनिया अक्स ने अपनी लिखी शायरी कुछ यूँ प्रस्तुत की –
फितरत है मेरी, सख्त मराहिल से गुजरना
दिल और किसी बात पे, तैयार नहीं है.
दुनिया की खुशी, ऐश-ओ-तरब तुमको मुबारक
सोनम भी, किसी शय की तलबगार नहीं है.
उरूज था वो ज़वाल है ये, कमाल है ये
तुम्हारा भी तो ख्याल है ये, कमाल है ये
हैं यूँ तो मोहरे तमाम शतरंज में अहम् तर
मगर जो घोड़े की चाल है ये, कमाल है ये
किसी की चाहत में खुद को खोकर हमें मिला क्या
हमारा खुद से सवाल है ये, कमाल है ये
मैं चाह कर भी निकल न पाउंगी इससे बाहर
तेरी मुहब्बत का जाल है ये, कमाल है ये
जहां से लाते थे उन दिनों में जनाबे ग़ालिब
उन्ही दुकानों का माल है ये, कमाल है ये
वो जिसके हम हैं वही हमारा नहीं है सोनम
कमाल है ये, कमाल है ये, कमाल है ये
डॉ आनंद प्रकाश जैन ने अपनी कविता ‘परोपकारी पेड़’ पेश की –
हे पेड़
तुम्हारा जीवन, कितना आदर्श, त्यागी, परोपकारी है,
तुम्हे नमन,
तुमसे हम कुछ सीख पाएं,
तुम्हारे कुछ आदर्श अपना पाएं,
ईश्वर से यही विनती
करबद्ध निवेदन
अनेक बार निवेदन!
प्रदीप शर्मा ने समस्त शिक्षक जगत के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि युवा निर्माण में गुरु की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है जो किसी भी राष्ट्र की उन्नति का आधार होते हैं. उन्होंने सभी शिक्षकों से यही अपील की कि वे समाज निर्माण में पूरी निष्ठा के साथ यूं ही निरन्तर लगे रहें ताकि अपना देश फिर से सबसे आगे निकल सके.
डॉ अनुपम अरोड़ा ने कहा कि बेशक अब तकनीक का युग है और उंगली के एक क्लीक से ही सारा संसार और उसका ज्ञान हमारे सामने खुल जाता है. परंतु मानवीय गुरु की प्रासंगिकता कभी भी समाप्त नहीं हो सकती क्योंकि तकनीक जानकारी दे सकती है पर ज्ञान नहीं. इसलिए सभी शिक्षकों को हर विद्यार्थी से जुड़े रहते हुए उनके भविष्य का निर्माण कार्य करते रहना चाहिए.
परिषद की पानीपत इकाई के सचिव करन कपूर ने अपने जीवन के विभिन्न काल खंडों में अपने संस्थागत गुरु तथा आध्यात्मिक गुरुओं सहित सभी के प्रति अपना सम्मान प्रकट किया.

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