आरटीआई कानून पर पुनर्विचार करने के सवाल पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की हरियाणा राज्य कौंसिल ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे खारिज करने की मांग की .
BOL PANIPAT : 30 जनवरी 29 जनवरी को संसद में पेश किये गए आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 में लोकप्रिय कानून आरटीआई कानून पर पुनर्विचार करने के सवाल पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की हरियाणा राज्य कौंसिल ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसे खारिज करने की मांग की है। सीपीआई के राज्य सचिव कामरेड दरियाव सिंह कश्यप ने आज यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि इस सर्वेक्षण में सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की पुनः जांच का सुझाव दिया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण ने इसे नीति निर्माण और शासन की बाध्यताओं का बहाना बना कर तथा मंत्रियों के वीटो का सुझाव देकर इसे कमजोर करना चाहती है। सीपीआई की हरियाणा राज्य कौंसिल इस बहाने को पूर्णतः नकारती है।
कामरेड कश्यप ने कहा कि सीपीआई का मानना है कि आरटीआई अधिनियम को यूपीए -1 सरकार ने 2005 में वामपंथी पार्टियों के सुझाव पर कामन मिनीमम प्रोग्राम के तहत पेश किया था। इसे इस सोच के साथ लाया गया था कि जनता को भ्रष्टाचार जड़ से खत्म करने और सरकारों को शासन में जनविरोधी उपायों को अपनाने से रोकने के लिए सबसे लोकतांत्रिक अधिकार उपलब्ध कराया जाए। आर्थिक सर्वेक्षण में इस कानून पर पुनर्विचार के सुझाव भारत की जनता के इस अधिकार को नकारने का प्रयास है। कामरेड कश्यप ने कहा कि एनडीए सरकार के शासनकाल में आरटीआई अधिनियम पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रुप से कईं हमले हो चुके हैं। सीपीआई की हरियाणा राज्य कौंसिल का मत है कि आरटीआई अधिनियम के इस पुनर्विचार को पूरी तरह खारिज किया जाए।

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